सुप्रीम कोर्ट ने सेरिडॉन, प्रीटोन और डार्ट की बिक्री की दी अनुमति, सरकार से किया जवाब तलब
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Sep 2018 7:55 PM
नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रतिबंधित दर्द निवारक सेरिडॉन और तीन अन्य एफडीसी दवाओं की बिक्री की अनुमति प्रदान कर दी है. न्यायमूर्ति आरएफ नरिमन और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कुछ दवा निर्माता कंपनियों और फार्मा एसोसिएशन की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा है. अदालत […]
नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रतिबंधित दर्द निवारक सेरिडॉन और तीन अन्य एफडीसी दवाओं की बिक्री की अनुमति प्रदान कर दी है. न्यायमूर्ति आरएफ नरिमन और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कुछ दवा निर्माता कंपनियों और फार्मा एसोसिएशन की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा है. अदालत ने जिन दवाओं की बिक्री की अनुमति प्रदान की है, उनमें पीरामल हेल्थकेयर की सेरिडॉन, ग्लैक्सोस्मिथक्लिन की प्रीटोन, जगगट फार्मा की डार्ट और एक अन्य दवा शामिल है. इनमें चौथी दवा का विवरण प्राप्त नहीं हो सका है.
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हालांकि, शीर्ष अदालत ने प्रतिबंधित एफडीसी दवाओं की 328 दवाओं की सूची को किसी अन्य प्रकार की कोई राहत प्रदान नहीं की. इन दवाओं के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सात सितंबर की अधिसूचना के माध्यम से प्रतिबंधित कर दिया है. एएफडीसी दवाएं दो या उससे अधिक दवाओं को मिलाकर एक निश्चित अनुपात में एक दवा के रूप में तैयार की जाती हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट ने इससे पहले इंडियन फार्मा कंपनी वाक्हार्ट के अपने एस प्रॉक्सीवान टेबलेट बेचने की अनुमति दी थी. यह तीन दवाओं को मिलाकर बनायी जाती है और यह प्रतिबंधित है. फार्मा कंपनी ने दावा किया कि वह 11 साल से इस दवा का उत्पादन और बिक्री कर रही है. उसका तर्क था कि उसे औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करायी गयी है, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 10 मार्च 2016 की अधिसूचना के जरिये 349 एफडीसी दवाओं के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया था. सरकार की इस अधिसूचना को भी दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी थी. शीर्ष अदालत ने दिसंबर, 2016 में एफडीसी पर लगाया गया प्रतिबंध निरस्त कर दिया था, जिसे केंद्र ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी.
शीर्ष अदलत ने पिछले साल दिसंबर में हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए प्रतिबंधित एफडीसी को औषधि तकनीकी परामर्श बोर्ड के पास फिर से विचार के लिए भेज दिया था. इसके बाद बोर्ड ने एक समिति गठित की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी थी. बोर्ड ने व्यापक जनहित में इन एफडीसी दवाओं के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी.
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