मां को खुश रखो, पिता को भ्रष्ट मत होने दो : डॉ कलाम

।। सुनील तिवारी/अक्षय कुमार ।।
बोकारो : मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने मंगलवार की सुबह बोकारो के स्टूडेंट्स की क्लास ली. सेक्टर पांच स्थित चिन्मय विद्यालय में आयोजित डॉ. कलाम को सलाम कार्यक्रम में चास-बोकारो सहित जिले के कोने-कोने से आये लगभग 10 हजार विद्यार्थियों को डॉ. कलाम ने नैतिकता का पाठ पढाया. कहा : मां को खुश रखों, पिता को भ्रष्ट मत होने दो. देश खुशहाल होगा.

डॉ. कलाम को देखने व सुनने के लिए चिन्मय विद्यालय में विद्यार्थियों का महाकुंभ लगा. जगह कम पड़ गयी. लेकिन, चिन्मय स्कूल प्रबंधन की वैकल्पिक व्यवस्था व बोकारो के अनुशासित बच्चों के कारण कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ. जिन्हें बैठने की जगह नहीं मिली, उन्होंने खड़े-खड़े डॉ. कलाम को देखा और सुना. डॉ. कलाम ने बच्चों को जीवन में

सफलता का गुर बताया.
द मिशन : यू कैन बी यूनिक
डॉ. कमाल ने कहा कि जब भी मैं अपने सामने इतनी बढ़ी संख्या में युवाओं को देखता हूं. तो मैं एक जोश से भरपूर उत्साह को देख पाता हूं. साथ ही एक सुलगता हुआ दिमाग उनके आंखों में दिखता है.

श्री कलाम ने मौजूद सभी बच्चों से पूछा कि इन सब में कौन है जो खास नहीं बनना चाहता. आवाज आयी सभी बनना चाहते हैं. उन्होंने थोमस एलवा एडिसन (बल्ब के आविष्कारक), राइट ब्रदर्स (हवाई जहाज के आविष्कारक), ग्राहम बेल (फोन के आविष्कारक), सीबी रमन (नोबेल विजेता), चंद्रशेखर सुब्रमण्यम(नोबेल विजेता), मैडम क्यूरी(नोबेल विजेता) का उदाहरण लेते हुए कहा कि इन सभी का नाम हम सब इसलिए लेते हैं कि यह सभी यूनिक हैं.

दुनिया में इनकी एक अलग पहचान है. और तुम्हें भी (बच्चों को ) इन्हीं के जैसा खास बनना है. उन्होंने साफ कहा कि इतिहास गवाह है कि किसी भीड़ ने अपनी उतनी पहचान नहीं बनायी है जितना कि एक अकेला इनसान ने बनाया है. इसलिए भीड़ का हिस्सा नहीं बनना है एक अलग पहचान और खास इंसान बनना है.

बच्चों से श्री कलाम ने पूछा कि जब भी रिजल्ट के बाद अपने माता-पिता के पास जाते हैं. उनसे यहीं कहा जाता है पहले पांच में तुम क्यों नहीं, शिक्षक भी ऐसा ही कुछ कहते हैं. इस बात के मतलब को समझने की जरूरत है. वह आपसे सबसे अव्वल होने को क्यों कह रहे हैं. वह कह रहे हैं कि आपको कुछ से अलग होना ही पड़ेगा. या फिर सबसे अलग होना पड़ेगा.

ज्ञान के अलावा कुछ नहीं बचता
श्री कलाम ने कहा कि आपकी पढ़ाई पूरी होने के बाद आपके पास सिर्फ आपका ज्ञान रह जाता है. और ज्ञान अजिर्त करने का एक फॉमूला होता है. तीन चीजों को एक साथ मिलाया जाय तो ज्ञान बनता है. रचनात्मकता (क्रिएटिविटी)+ धार्मिकता (राइचस्नस) + हिम्मत (करेज) = ज्ञान. बोकारो के शिक्षकों को संबोधित करते हुए श्री कलाम ने कहा कि मुङो पूरा भरोसा है कि बोकारो के शिक्षक बच्चों में ऐसी शिक्षा दे रहे हैं जिससे बच्चों में आत्मविश्वास के साथ-साथ हिम्मत भी पैदा हो रही होगी ताकि आने वाले दिनों में सारी समस्याओं का समाधान वो खुद कर सकें.

सभी को दस पेड़ लगाना है
कलाम ने अपनी जिंदगी में सभी बच्चों को आगे बढ़ने के साथ-साथ सभी से यह वायदा लिया कि वो कम-से-कम दस पेड़ जरूर अपने हाथ से लगायेंगे. उन्होंने समझाया कि एक पेड़ एक साल में 20 किलो कार्बन डाक्ससाइड निगलता है. वहीं करीब 14 किलो आक्सीजन एक पेड़ हमें देता है. इसलिए पिछले पिछले सात सालों से मैं करीब 15 मिलियन युवाओं से यह कसम ली है.

- मैं जरूर ऊड़ूंगा
मैं जरूर ऊडूंगा/मेरा जन्म संभावनाओं के साथ हुआ है/मेरा जन्म अच्छाई और भरोसे के साथ हुआ है/मेरा जन्म विचारों और सपनों के साथ हुआ है/मेरा जन्म महानता के साथ हुआ है/मेरा जन्म आत्मविश्वास के साथ हुआ है/मेरा जन्म पंखों के साथ हुआ है/इसलिए, मैं रेंगने के लिए नहीं बना हूं/मेरे पास पंख हैं, मैं उडूंगा/मैं उडूंगा, और उडूंगा..असीम ऊर्जा से भर देनेवाले 13 वीं शताब्दी के मशहूर परसियन सुफी कवि जल्लालुद्दीन रूमी की इस कविता के साथ डॉ कलाम ने बच्चों को शपथ दिलायी.

डॉ. कलाम सुफी कवि जल्लालुद्दीन रूमी की कविता को पढ़ते गये और स्टूडेंट्स का अह्वान किया कि वे उनके साथ इस कविता को दोहरायें. डॉ. कलाम के पीछे जब 8000 बच्चों ने यह कविता दोहरायी, तो पूरी फिजां पॉजेटिव ऊर्जा से भर उठी.

This Article Posted on: May 3rd, 2012

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