US-Iran War : अमेरिकी हमले के बाद खाड़ी देशों पर अटैक से लेकर होर्मुज बंद करने तक, जानिए ईरान के पास कितने विकल्प

Updated:
विज्ञापन

1. अमेरिकी हमले में घायल बच्ची. 2. जिस बिल्डिंग में गिरी अमेरिकी मिसाइल (PC : X)

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष तेज हो गया है. ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. अब सवाल है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई कितनी आगे जा सकती है.

विज्ञापन

US-Iran War : अमेरिका और ईरान के बीच छह महीने से जारी संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है. मंगलवार रात ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नया सैन्य अभियान शुरू कर दिया है. ऑस्ट्रिया में ईरानी एंबेसी ने अपने एक्स पोस्ट में बताया कि अमेरिकी हमले में एक शादी फंक्शन निशाने पर आ गए. जिसमें एक 4 साल के बच्चे समेत 5 लोग मारे गए. इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है और अब सवाल है कि ईरान जवाबी कार्रवाई को कितना आगे ले जा सकता है.

विज्ञापन

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के सामने अब कई विकल्प हैं. इनमें खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले बढ़ाना, तेल आपूर्ति को प्रभावित करना और पश्चिमी हितों को निशाना बनाना शामिल है.

खाड़ी देशों में बढ़ सकता है तनाव

ईरान के लिए सबसे सीधा विकल्प खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूसरे लक्ष्यों पर हमले बढ़ाना हो सकता है. युद्ध शुरू होने के बाद से जॉर्डन समेत इस क्षेत्र में अमेरिकी ठिकाने ईरानी हमलों के निशाने पर रहे हैं.

ये भी पढ़ें: MP Weather kal ka mausam: 3 सितंबर को पूर्वी MP में भारी बारिश का अलर्ट, जानें अपने जिले के मौसम का हाल

हालांकि, खतरा सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है. ईरान खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बना सकता है. तेल और गैस से जुड़ी सुविधाओं पर बड़े हमले होने की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार में अचानक उथल-पुथल देखने को मिल सकती है.

बिजली उत्पादन और पानी को समुद्र से पीने योग्य बनाने वाले संयंत्र भी जोखिम में आ सकते हैं. ऐसे किसी घटनाक्रम का असर उन देशों पर पड़ सकता है जो अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका रखते हैं.

होर्मुज से तेल की आवाजाही रोकने की धमकी

ईरान के पास सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आवाजाही को और बाधित करना हो सकता है. यह रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

ईरान के पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स प्रमुख और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व सचिव मोहसिन रेजाई पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर तेहरान पर आर्थिक दबाव जारी रहा तो ईरान होर्मुज के रास्ते तेल निर्यात रोक सकता है.

संघर्ष के दौरान इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही पहले ही काफी प्रभावित हुई है. कुछ टैंकर अभी भी गुजर रहे हैं, लेकिन कारोबार का स्तर बहुत कम है. किसी नए व्यवधान से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है और इसका असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ सकता है.

Red Sea में भी बढ़ सकता है दबाव

ईरान सीधे खाड़ी क्षेत्र में कार्रवाई करने के अलावा अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के जरिए लाल सागर (Red Sea) में दबाव बढ़ाने का विकल्प भी अपना सकता है.

ईरान समर्थित हूती पहले ही जहाजों पर हमलों और धमकियों के जरिए लाल सागर की शिपिंग को प्रभावित कर चुके हैं. सउदी अरब से एशिया की ओर जाने वाले कच्चे तेल के जहाज भी इस मार्ग से गुजरते हैं.

हाल के घटनाक्रमों के बाद कुछ चीनी शिपिंग कंपनियों ने भी बाब-अल-मन्देब के रास्ते से अपने जहाजों को दूसरे मार्गों पर भेजना शुरू किया है. अगर हमले और बढ़ते हैं तो तेल की सप्लाई के साथ-साथ वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी दबाव बढ़ सकता है.


ये भी पढ़ें: Nepal Flood : अलर्ट आया, लेकिन तबाही पहले पहुंच गई; 38 मिनट में खुल गई वार्निंग सिस्टम की पोल

पश्चिमी देशों को सीधे निशाना बनाने की कोशिश?

ईरान के पास मध्य पूर्व से बाहर जवाब देने का विकल्प भी मौजूद है. इसमें साइबर हमले या दूसरे गुप्त अभियानों का सहारा लिया जा सकता है.

पश्चिमी देशों के अधिकांश हिस्से ईरान की प्रमुख मिसाइलों की सीधी पहुंच से बाहर हैं, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स पहले भी अपने विरोधियों के खिलाफ दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करते रहे हैं.

ब्रिटेन का कहना है कि ईरान से जुड़े हैकरों ने एक छोटे बिजली संयंत्र की बिजली आपूर्ति बाधित की थी. वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने मिनेसोटा में पानी के संयंत्रों पर हुए साइबर हमलों के पीछे ईरान के होने की आशंका जताई थी. हालांकि, ईरान ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

अब आगे क्या होगा?

ईरान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए वह कितना दबाव बढ़ाए और साथ ही क्षेत्रीय युद्ध को और फैलने से कैसे रोके. खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर हमले, Hormuz में तेल की आवाजाही को प्रभावित करना और रेड सी में शिपिंग पर दबाव इनमें से किसी भी कदम का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा.

खास तौर पर होर्मुज में किसी बड़े व्यवधान की स्थिति में दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा हो सकती है. यही वजह है कि ईरान की अगली कार्रवाई पर अमेरिका के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.


ये भी पढ़ें: VIDEO : नेपाल बाढ़ का खौफनाक मंजर, अस्पतालों में कम पड़ रही जगह; जंगलों में दफनाई जा रही लाशें

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola