डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रेड डेफिसिट वाले देशों से व्यापार बंद करने की दी सलाह, कहा- बचेंगे 1.5 ट्रिलियन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो ANI
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें तुरंत घटाने का दबाव बनाया है. उन्होंने देश के मजबूत निवेश का हवाला देते हुए कहा कि ब्याज दरें 1% से कम होनी चाहिए. इसके साथ ही, ट्रंप ने व्यापार घाटे को 'नुकसान' करार देते हुए इससे निपटने की रणनीति पर भी जोर दिया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की मौद्रिक नीति और व्यापार घाटे को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' द्वारा ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस पयइंट्स) की बढ़ोतरी कर इसे 3.75% से 4% किए जाने के तुरंत बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर तीखी पोस्ट शेयर की. ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका की साख पूरी दुनिया में सबसे मजबूत है.
'निवेश बढ़ रहा, फिर ब्याज दरें ज्यादा क्यों?'
ट्रुथ सोशल पर अपनी पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका में इस समय नए निवेश की बहार है (कंट्री इज बूमिंग विद न्यू इनवेस्टमेंट). उन्होंने लिखा, "अमेरिका में ब्याज दरें 1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि हम दुनिया में सबसे बेहतरीन क्रेडिट वाले देश हैं. हमारे देश में निवेश तेजी से आ रहा है." ट्रंप ने केंद्रीय बैंक को सीधे निर्देश देने वाले अंदाज में अंत में लिखा, "संयुक्त राज्य अमेरिका के ब्याज दरें तुरंत और तेजी से घटाई जाएं."
व्यापार घाटे पर सख्त रुख: 'घाटा मतलब सिर्फ नुकसान'
राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आयात-निर्यात में हो रहे नुकसान को लेकर भी कड़े तेवर दिखाए. उन्होंने दावा किया कि यदि अमेरिका उन सभी देशों के साथ कारोबार बंद कर दे जिनके साथ उसका व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) चल रहा है, तो अमेरिका सालाना कम से कम 1.5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 125 लाख करोड़ रुपये) की बचत कर लेगा. ट्रंप ने कहा, "डेफिसिट' (घाटा) शब्द नुकसान (Loss) के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक फैंसी शब्द भर है. हम दुनिया के लगभग हर देश का बोझ उठा रहे हैं और यह सिलसिला अब ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकता."
फेडरल रिजर्व और राष्ट्रपति के बीच टकराव की स्थिति
यह बयान ऐसे समय में आया है जब फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर काबू पाने का हवाला देते हुए तीन साल से अधिक समय बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है. फेड चेयरमैन के इस फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई. वहीं, आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले कर्ज महंगा होने को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप खासे नाराज दिख रहे हैं और केंद्रीय बैंक की स्वायत्त नीति के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं.
भारत-अमेरिका व्यापार में किसका घाटा और कितना?
भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार में नुकसान यानी व्यापार घाटा (Trade Deficit) अमेरिका को होता है, जबकि भारत ट्रेड सरप्लस (फायदे) में रहता है. इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका भारत को जितना सामान बेचता है, उससे कहीं अधिक भारत से खरीदता है. अमेरिकी वाणिज्य विभाग और आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कुल व्यापार घाटा सालाना लगभग $50 से $63 अरब डॉलर (करीब 4.5 से 5.2 लाख करोड़ रुपये) के आसपास रहता है.
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भारत अमेरिका को बड़े पैमाने पर दवाइयां (फार्मा), आईटी सेवाएं, कपड़े, रत्न-आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक सामान एक्सपोर्ट करता है, जबकि अमेरिका से मुख्य रूप से कच्चा तेल, गैस, विमान और मशीनरी आयात करता है; इसी भारी अंतर के कारण भारत व्यापार संतुलन में मजबूत स्थिति में रहता है और यही आंकड़ा ट्रंप के निशाने पर रहता है.
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