नेपाल में बाढ़ का कहर: बेटे का इंतजार करते-करते बेहोश हुई मां, गांव में खाने का संकट - हेलिकॉप्टर की आवाज पर टिकी उम्मीदें
नेपाल में बाढ़ में तबाही अपनों खोने पर रोते बिलखते लोग. फोटो- X
नेपाल के रासुवा जिले में बाढ़ ने भयावह मंजर पैदा किया है. अपनों को खोने के बाद अब लोग भोजन और जरूरी सामान की भारी कमी झेल रहे हैं. बाढ़ ने गांवों को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया है.
नेपाल के रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने तबाही की ऐसी तस्वीर छोड़ी है, जिसे देखकर कलेजा कांप उठे. द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, आमाछोदिंगमो ग्रामीण नगरपालिका के गांवों में कहीं मां अपने 21 साल के लापता बेटे की राह देखते-देखते बेहोश हो रही है, तो कहीं एक ही परिवार के दो बेटे बाढ़ की धारा में बह गए हैं. सड़कें और पुल टूटने से गांव देश के बाकी हिस्सों से कट चुके हैं. अब हालात इतने बदतर हैं कि घरों में खाना तो दूर, नमक तक खत्म हो गया है और लोग आलू उबालकर पेट भरने को मजबूर हैं.
सड़क-पुल बह गए, बाजारों से संपर्क टूटा
भोटेकोशी नदी में आई तेज बाढ़ और मलबे ने गांव को बाजारों से जोड़ने वाली सड़कें और पुल बहा दिए. छोटी दुकानों में भी जरूरी सामान खत्म हो गया है. सरकारी राहत सामग्री भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही है. ग्रामीणों के सामने अब भोजन और इलाज दोनों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
हेलिकॉप्टर की आवाज सुनते ही बाहर आते हैं लोग
जैसे ही दूर से हेलिकॉप्टर की भनभनाहट सुनाई देती है, रासुवा के लोग उम्मीदों के सहारे अपने घरों से बाहर दौड़ पड़ते हैं, उनके हाथों में खाली बैग होते हैं, आँखों में परिवार के लिए खाना ले जाने की आस. लेकिन जब वह खाली हाथ लौटते हैं, तो निराशा उनके चेहरों पर छा जाती है.
‘कम से कम नमक और तेल तो पहुंचा दीजिए’
ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष बुचुंग तामांग के मुताबिक, उन्हें हर दिन सैकड़ों फोन आ रहे हैं. लोग उनसे सिर्फ नमक और तेल जैसी बुनियादी चीजें पहुंचाने की अपील कर रहे हैं. उनका कहना है कि लोग आलू उबालकर खाने को तैयार हैं, लेकिन अब आलू का भी स्टॉक खत्म होने की कगार पर है.
भूख से हालात बिगड़ने की आशंका
बाढ़ के 11 दिन बाद भी आमाछोदिंगमो का बाहरी दुनिया से संपर्क नहीं हो सका है. यहां बाजार नहीं हैं और मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है. स्थानीय प्रशासन को डर है कि अगर तुरंत खाद्य सामग्री नहीं पहुंचाई गई तो इलाके में अकाल जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.
बच्चों के लिए सबसे मुश्किल हालात
बड़े लोग किसी तरह गांव में उपलब्ध खाना खाकर गुजारा कर रहे हैं, लेकिन छोटे बच्चों के लिए स्थिति बेहद कठिन है. बच्चे भोजन में चावल मांगते हैं, जबकि गांव में चावल और अन्य जरूरी सामान की भारी कमी हो चुकी है.
हेलिकॉप्टर से राहत पहुंचाना महंगा, NGOs ने भी खड़े किए हाथ
स्थानीय प्रशासन का आरोप है कि कई गैर-सरकारी संगठनों ने हेलिकॉप्टर से राहत पहुंचाने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इसके लिए हेलिकॉप्टर चार्टर करना महंगा पड़ता है. सेना के हेलिकॉप्टर से पहले पहुंचाई गई राहत सामग्री भी अब खत्म हो चुकी है. राहत की देरी से न केवल भूख, बल्कि जीवन का संकट भी गहराता जा रहा है, और मदद का इंतजार कर रहे लोगों की उम्मीदें लगातार क्षीण हो रही हैं.
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