Nepal Flood: बाढ़ में बहकर आए 250 शव, 100 को दफनाने पर भड़के हिंदू परिवार, कहा- सम्मान से हो अंतिम संस्कार
बाढ़ के बाद हुई तबाही का नजारा (Photo: PTI)
Nepal Flood : नेपाल में आयी विनाशकारी बाढ़ ने बड़ी संख्या में परिवारों को अपनों से हमेशा के लिए दूर कर दिया है. चितवन जिले में करीब 250 शव अब भी पहचान का इंतजार कर रहे हैं. इनमें से लगभग 100 शवों को अधिकारियों ने शनिवार (29 अगस्त) को अस्थायी कब्रों में दफना दिया.
Nepal Flood : शवों को अस्थायी कब्रों में दफनाने के इस फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि शवों को दफनाने के दौरान हिंदू धर्म की अंतिम संस्कार परंपराओं का पालन नहीं किया गया. इससे मृतकों के परिवारों में नाराजगी बढ़ गई है. नेपाल के दक्षिण-मध्य हिस्से में स्थित चितवन जिले में इस त्रासदी की भयावहता साफ दिखाई दे रही है. बुधवार (26 अगस्त) को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद करीब 250 शव पहचान का इंतजार कर रहे हैं, जबकि उन्हें अस्थायी रूप से दफनाने के लिए जल्दबाजी में गहरी खाइयां खोदी गई हैं. इस बाढ़ और भूस्खलन में नेपाल और तिब्बत में कम से कम 900 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और 3,000 से अधिक लोग लापता हैं. बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित इलाके से सैकड़ों किलोमीटर दूर चितवन में बरामद किए गए. ये शव भोटेकोशी नदी के तेज बहाव में बहकर पहुंचे थे.
100 शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया
अधिकारियों ने बताया कि फॉरेंसिक टीमों पर बढ़ते दबाव के बीच शनिवार को करीब 100 शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया. शवों को लेकर गाड़ियों का एक काफिला घने और हरे-भरे जंगल वाले इलाके में पहुंचा. वहां एक खुदाई मशीन ने गहरी खाई खोदी. शवों की पहचान और उन्हें संभालने की प्रक्रिया देख रहे पुलिस निरीक्षक अनिल थापा ने बताया कि शवों को दफनाने से पहले सभी के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं. इससे बाद में शवों की पहचान करने में मदद मिलेगी और परिवारों को अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी मिल सकेगी.
पुलिस निरीक्षक अनिल थापा ने बताया कि अधिकारियों ने शवों के डीएनए सैंपल सुरक्षित रखे हैं. शवों के चेहरे और पहचान में मदद करने वाली दूसरी खास चीजों की तस्वीरें भी ली जा रही हैं. हर शव को एक अलग नंबर दिया गया है, ताकि बाद में परिवार उसकी पहचान कर शव ले सकें. उन्होंने बताया कि कई शव करीब चार दिनों तक बाढ़ के पानी में पड़े रहे थे. इसलिए उन्हें बाहर निकालने तक सड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, जिससे पहचान करना मुश्किल हो रहा है.
शव तेजी से सड़ रहे हैं
पूरे इलाके में कई मकान, वाहन और खेतों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर अब भी कीचड़ में आधे दबे हुए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, जिले में फॉरेंसिक सुविधाओं की कमी और मुर्दाघरों में पर्याप्त जगह न होने से बड़ी संख्या में बरामद शवों को संभालने की चुनौती और बढ़ गई है. अधिक नमी और भीषण गर्मी के कारण शव तेजी से सड़ रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शवों को खुले में ज्यादा समय तक रखने से बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ सकता है.
अपने दो रिश्तेदारों के लापता होने के बाद उनकी तलाश कर रहीं रूबी चौधरी ने कहा कि परिवारों की सहमति के बिना शवों को दफन नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘मृतकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए. हमारी परंपरा है कि मृतक का अंतिम संस्कार नदी के किनारे उसके निकटतम परिजनों की मौजूदगी में किया जाता है.’’
लोगों का आरोप- शवों को दफनाने में जल्दबाजी की गई
नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद शवों को दफनाए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि मृतकों को सम्मान के साथ अंतिम विदाई नहीं मिल पायी. लापता परिजनों की तलाश कर रहे परिवारों ने भी सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों ने शवों को दफनाने में जल्दबाजी की. यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि नेपाल में हिंदू आबादी बड़ी संख्या में है और यहां परंपरा के अनुसार मृतकों का अंतिम संस्कार आमतौर पर दाह संस्कार से किया जाता है.
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