अंधेरे में बांग्लादेश! टॉर्च के सहारे अस्पताल, रसोई ठप और गारमेंट उद्योग पर तालाबंदी का खतरा

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सांकेतिक फोटो, PHOTO एक्स

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बांग्लादेश इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. बिजली और गैस की भारी किल्लत ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. जानें कैसे प्रभावित हो रहे हैं अस्पताल, रसोई और गारमेंट उद्योग.

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बांग्लादेश इस समय इतिहास के सबसे भीषण ऊर्जा और बिजली संकट के मुहाने पर खड़ा है. देश भर में बिजली और गैस की भारी किल्लत के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि अस्पतालों में डॉक्टरों को टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

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बिजली की भारी कमी

बांग्लादेश अवामी लीग ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर देश के इस भयावह बिजली संकट को लेकर एक विस्तृत पोस्ट साझा किया है. अवामी लीग के अनुसार, देश में बिजली की कमी 3,500 मेगावाट से अधिक हो गई है. बांग्लादेश में बिजली की मांग 16,345 मेगावाट तक पहुंच गई है, लेकिन उत्पादन सिर्फ 12,788 मेगावाट ही हो पा रहा है. अडानी पावर की एक यूनिट से अचानक आपूर्ति कम होने, RNPL प्लांट के बंद होने, तकनीकी खराबी और गैस की भारी किल्लत ने इस संकट को और विकराल बना दिया है.

अस्पतालों और जनजीवन पर गहरा असर

इंडिया टुडे और बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, भीषण गर्मी और उमस के बीच ग्रामीण इलाकों में रोजाना 7 से 10 घंटे की कटौती की जा रही है, जबकि शहरों में भी बार-बार बिजली गुल हो रही है. अस्पतालों में मरीजों की देखभाल के लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को टॉर्च का सहारा लेना पड़ रहा है.

पुराने ढाका में गैस संकट पर अवामी लीग की चेतावनी

अवामी लीग ने एक अन्य X पोस्ट में पुराने ढाका के गैस संकट को उजागर किया. पार्टी ने लिखा कि हर महीने बिल भरने के बावजूद गैस का प्रेशर इतना कम हो गया है कि लोग बमुश्किल चूल्हा जला पा रहे हैं. परिवार लकड़ी, मिट्टी के चूल्हे, केरोसिन और इलेक्ट्रिक कुकर का इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं, जिससे जहरीले धुएं और जलने का खतरा बढ़ गया है. समय पर खाना न बनने के कारण छात्र और नौकरीपेशा लोग बिना नाश्ते के घर से निकलने को मजबूर हैं.


गारमेंट उद्योग पर बंद होने का खतरा

बांग्लादेश के आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले गारमेंट सेक्टर को लेकर भी अवामी लीग ने X पर गंभीर चिंता जताई है. कारोबारी नेताओं का कहना है कि पीक सीजन (सितंबर-दिसंबर) में गैस और ईंधन की कमी से कारखाने बंद होने की कगार पर हैं. अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो 3 महीने के भीतर फैक्ट्रियां पूरी तरह ठप हो सकती हैं. उद्योग जगत ने ऊर्जा संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और एक हाई-लेवल टास्क फोर्स तथा आपातकालीन राशनिंग प्लान बनाने की मांग की है.

बिजली और गैस आंकड़े

  • मांग: 16,345 मेगावाट
  • कुल उत्पादन: 12,788 मेगावाट
  • कुल बिजली घाटा: 3,500 मेगावाट से अधिक
  • घरेलू गैस उत्पादन: 27.2 BCM से घटकर 19.6 BCM हुआ
  • भारत से बिजली आयात: लगभग 2,656 मेगावाट

संकट के मुख्य कारण

  • गैस पर निर्भरता और उत्पादन में गिरावट: बांग्लादेश अपनी 44% बिजली प्राकृतिक गैस से बनाता है. घरेलू गैस निष्कर्षण 27.2 बिलियन क्यूबिक मीटर से घटकर 19.6 बिलियन क्यूबिक मीटर रह गया है.
  • LNG आयात में अड़चनें: कतर और अन्य विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता और वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से गैस का आयात ठप हो गया है.
  • बिजली उत्पादन ठप: देश के गैस चालित प्लांट अपनी 12,472 मेगावाट क्षमता के मुकाबले मात्र 5,100 मेगावाट बिजली ही बना पा रहे हैं.

भारत से मदद की उम्मीदें कितनी?

इस संकट के बीच भारत की ओर से तुरंत बड़ी मदद पाना व्यावहारिक रूप से कठिन है. भारत खुद प्राकृतिक गैस आयात करता है, इसलिए बांग्लादेश को गैस निर्यात करना संभव नहीं है. बांग्लादेश पहले से ही भारत से करीब 2,656 मेगावाट बिजली ले रहा है, लेकिन ट्रांसमिशन ग्रिड क्षमता की सीमाओं के कारण तुरंत अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाना मुश्किल है. हालांकि, भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए भारत लगातार डीजल की आपूर्ति कर रहा है, जिससे बांग्लादेश को कुछ हद तक राहत मिल रही है.

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