Nepal floods : नेपाल-चीन सीमा पर एक और बाढ़ का खतरा, 72 घंटे में टूट सकती है नई झील ?
नेपाल-चीन सीमा पर बाढ़ का खतरा !
नेपाल और चीन की सीमा पर एक और विनाशकारी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. चीन ने चेतावनी दी है कि ऊपरी बैरियर झील अगले तीन दिनों में टूट सकती है, जिसमें पहले से ही 20 लाख घन मीटर पानी जमा है.
नेपाल और चीन की सीमा पर बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब एक और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. चीन ने नेपाल को चेतावनी दी है कि ऊपर की तरफ बनी एक नई बैरियर झील अगले तीन दिनों में टूट सकती है. इस झील में गुरुवार सुबह तक करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और इसमें लगातार पानी बढ़ रहा है. नेपाल ने भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे रहने वाले लोगों को फिलहाल नदी से दूर रहने की सलाह दी है.
चीन में बुधवार को मची थी तबाही?
- बुधवार सुबह चीन के शिजांग इलाके में स्थित ग्यिरोंग पोर्ट के पास भी एक अलग मलबा धंसने की घटना हुई.
- चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के मुताबिक, कुछ जगहों पर कीचड़ पांच फीट से भी ज्यादा गहरा था. इसकी वजह से सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई.
- गुरुवार सुबह तक चीन की तरफ तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी और 558 लोग लापता बताए गए हैं.
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अब नई बैरियर झील से क्यों बढ़ी चिंता?
- बुधवार की तबाही के बाद अब चीन ने एक नई संभावित बाढ़ को लेकर चेतावनी दी है. चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, छोछेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास एक बैरियर झील बनी है.
- गुरुवार सुबह तक इसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और पानी झील से बाहर भी बह रहा था.
- चीन का अनुमान है कि अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर और पानी आ सकता है. इससे प्राकृतिक बांध के टूटने का खतरा बढ़ गया है.
- चीन के इंजीनियर इस झील की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और अगर प्राकृतिक बांध टूटता है तो बाढ़ का पानी किस दिशा में और कितनी तेजी से जा सकता है, इसका फ्लड सिमुलेशन किया जा रहा है.
- नेपाल में भी अधिकारियों ने संभावित खतरे को देखते हुए लोगों से नदी के किनारे नहीं जाने को कहा है.
हिमालय में ऐसे खतरे क्यों बढ़ रहे हैं?
- यह घटना इस इलाके में पिछले 14 महीनों में इसी नदी क्षेत्र में आई दूसरी बड़ी बाढ़ है. जुलाई 2025 में भी यहां एक अचानक बाढ़ आई थी, जिसे उस समय ग्लेशियर के ऊपर बनी झील के फटने से जोड़ा गया था.
- इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट यानी आईसीआईएमओडी के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों की संख्या बढ़ी है.
- 2005 के आसपास जहां करीब 1,900 ऐसी झीलें थीं, उनकी संख्या बाद के आकलनों में 2,600 से ज्यादा हो गई. ग्लेशियरों और उनसे जुड़ी झीलों में बदलाव के कारण अचानक बाढ़ का खतरा गंभीर बना हुआ है.
- फिलहाल नेपाल और चीन दोनों तरफ हालात पर नजर रखी जा रही है. नई बैरियर झील के बढ़ते पानी को देखते हुए अगले कुछ दिन भोटेकोशी और उससे जुड़ी नदियों के किनारे रहने वाले लोगों के लिए बेहद अहम हैं.
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