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इटली में संविधान संशोधन के लिए जनमत संग्रह जारी, पढ़िये, सरकार हारी, तो क्या होगा असर

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date

आरके नीरद

इटली में आज रविवार को संविधान संशोधन के लिए जनमत संग्रह हो रहा है. इस पर इटली की जनता और शासन के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजर है. यह जनमत संग्रह न केवल इटली के आंतरिक मामलों और वैश्विक संबंधों, बल्कि वहां के प्रधानमंत्री मैटियो रेंजी और उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी के भविष्य की भी दिशा तय करेगा. मैटियो रेंजी संविधान में बदलाव करना चाहते हैं, जबकि उनके विपक्षी के अलावा इटली का एक बहुत बड़ा वर्ग इसके विरोध में है.

मैटियो रेंजी इस बदलाव को देशहित की जरूरत मानते हैं, जबकि संशोधन प्रस्ताव का विरोध करने वाले इसे गैर जरूरी और केवल डेमोक्रेटिक पार्टी की ताकत बढ़ाने की कोशिश मान रहे है. ऐसे में अगर जनमत संविधान में बदलाव के पक्ष में नहीं गया, तो प्रधानमंत्री मैटियो रेंजी को अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ सकता और अगले साल इटली में होने वाले चुनाव में उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है.

इटली के संविधान में होने बदलाव के लिए वहां की जनता आज ‘हां’ या ‘ना’ में अपना मत देगी. सरकार संविधान में बड़े संशोधन करना चाहती है और इसके लिए इटली की जनता की राय जानना चाहती है. इसी के लिए यह जनमत संग्रह करवाया जा रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रधानमंत्री मैटियो रेंजी की बड़ी परीक्षा की घड़ी है. अगर वहां की जनता ने इस जनमत संग्रह को ही नकार दिया या फिर ज्यादा में लोगों ने ‘ना’ में मत दिया, तो मैटियो रेंजी के लिए बड़ी परेशानी पैदा हो सकती है. उन्हें कुरसी तक छोड़नी पड़ सकती है. विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जनमत संग्रह का रास्ता अख्तियार कर रेनजी ने अपने राजनीतिक करियर को दांव पर लगा दिया है. अगर सब कुछ सरकार के अनुकूल नहीं रहा, तो इस जनमत संग्रह का सीधा और बड़ा असर वहां अगले साल यानी 2018 में होने वाले आम चुनावों पर भी पड़ेगा.

बाजार की भी नजर
इटली में आज होने वाले जनमत संग्रह पर बाजार की भी पैनी नजर है. इस जनमत संग्रह का असर बाजार की चाल पर भी पड़ेगा. बाजार के जानकार मानते हैं कि जनमत संग्रह के फैसले से बाजार में एक बार फिर अस्थिरता देखने को मिल सकती है. अगर जनमत संग्रह का नतीजा सरकार के पक्ष में नहीं जाता है और इटली के प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा, तो वैश्विक बाजार पर इसका नकारात्मक रुझान पड़ना तय पाना जा रहा है.

जनमत संग्रह के विरोध में लहर
इटली में इस जनमत-संग्रह को लेकर जितना उत्सुकता है, उतना ही इसके खिलाफ लहर पैदा करने की कोशिशें भी हो रही है. वहां की जनता का एक बहुत बड़ा वर्ग संवैधानिक सुधार के मुद्दे पर हो रहे इस जनमत संग्रह का विरोध कर रहा है. विरोध करने वालों में इटली की मशहूर एक्ट्रेस पाओला सॉलिनो शामिल है. पाओला ने लोगों से जनमत-संग्रह में ‘ना’ का समर्थन करने की अपील की है और ऐसा करनेवालों के लिए सेक्स एक्ट परफॉर्म करने का ऑफर दिया है. एक्ट्रेस पाओला का दावा है कि देश में सबकुछ ठीक चल रहा है और संविधान में संशोधन की कोई जरूरत ही नहीं है. पाओला का कहना है कि संविधान में बड़ा बदलाव करके सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है.

68 साल पुराना है इटली का मौजूदा संविधान
इटली का संविधान 1948 में बना था. 68 साल पुराने इस संविधान में बदलाव को समय की जरूरत माना जा रहा है. ऐसे भी लोग हैं, जो इसमें संशोधन की गुंजाइश देखते हैं.

सत्ता के खिलाफ आक्रोश जताने का भी मौका
'बीबीसी' के अनुसार, इस जनमत संग्रह को 'ब्रेग्जिट' के बाद यूरोप में सत्ता विरोधी भावनाओं को जाहिर करने के माध्यम के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि इसका आह्वान इटली के प्रधानमंत्री मत्तेओ रेंजी ने किया है, लेकिन बहुत से लोग इसे सरकार के खिलाफ असंतोष जाहिर करने के एक माध्यम के रूप में देख रहे हैं.

क्या है संविधान संशोधन में
'सीएनएन' के अनुसार, रेंजी (41) संविधान में संशोधन कर ऊपरी सदन सीनेट की शक्तियां कम करते हुए इसके सदस्यों की संख्या 315 से 100 सीमित करना चाहते हैं. विपक्षियों का कहना है कि सीनेट की शक्तियां कम होने की स्थिति में प्रधानमंत्री के हाथों में काफी शक्तियां आ जायेंगी.

विरोधियों की रणनीति
पॉपुलिस्ट पार्टियां संविधान में संशोधन नहीं होने के पक्ष में मतदान के लिए प्रचार कर रही हैं. हास्य कलाकार से राजनेता बने बेप्पे ग्रिलो की अगुवाई में सत्ता विरोधी फाइव स्टार मूवमेंट इसकी अगुवाई कर रही है.

रेंजी का एलान, हार गये, तो कुरसी छोड़ देंगे
वहीं, रेंजी का कहना है कि यदि वह इसमें हार जाते हैं, तो वह इस्तीफा दे देंगे. जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार उनके हारने के आसार हैं.

क्या कहता है जनमत पूर्व सर्वेक्षण
सर्वेक्षणों के अनुसार, ग्रिलो को मौजूदा समय के व्यापक असंतोष का लाभ मिल सकता है, जैसा कि अमेरिका में ट्रंप को भी मिला. 2009 में शुरू हुए उनके आंदोलन को अब प्रत्यक्ष तौर पर रेंजी की वाम रुझान वाली मध्य मार्गी पार्टिटो डेमोकेट्रिको के समान ही समर्थन मिल रहा है.

सत्ता बदली, तो क्या होगा असर
विश्लेषकों को डर है कि यदि मध्यावधि चुनाव से ग्रिलो सत्ता में आते हैं, तो वह यूरो को खत्म करने और इतालवी मुद्रा लिरा की वापसी तथा ब्रिटेन की तर्ज पर यूरोपीय संघ से अलग होने को लेकर भी जनमत संग्रह का आह्वान कर सकते हैं.

न्यूड फोटो की मल्लिका हैं पाओला
संविधान संशोधन की खिलाफत करने वाली इटालियम एक्ट्रेस पाओला सॉलिनो अक्सर चर्चा में रहती हैं. सोशल मीडिया में अपनी न्यूड फोटो शेयर करने के कारण वह हमेशा सुर्खियों में रहती हैं. इस बार भी सुर्खियों में हैं और इसकी एक वजह संविधान संशोधन के विरोध में मतदान करने वालों के लिए पब्लिकली सेक्स परफॉर्म करने का उनका एलान भी है.

पॉप सिंगर मैडोना ने भी की थी ऐसी घोषणा
पब्लिकली सेक्स परफॉर्म के लालच का सियासी मामलों मेें कितना असर होता है, यह पॉप सिंगर मैडोना के वादे के असर से समझा जा सकता है. हॉलीवुड एक्ट्रेस और पॉप सिंगर मैडोना ने अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव के वक्त वहां के लोगों से वादा किया था कि अगर हिलेरी क्लिंटन यूएस की राष्ट्रपति बनती हैं, तो वह पब्लिकली सेक्स एक्ट परफॉर्म करेंगी, मगर वहां की जनता ने डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुना.

बहरहाल, इटली में आज हो रहे जनमत संग्रह पर न केवल वहां के लोगों की, बल्कि वैश्विक बाजार और समुदाय की भी नजर है.

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