भारत एशिया प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा ढांचा बनाने की ओर : मेनन

Published at :03 Feb 2014 1:05 PM (IST)
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भारत एशिया  प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा ढांचा बनाने की ओर : मेनन

बर्लिन : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने कहा है कि भारत , चीन , जापान और अन्य पड़ोसी तथा मित्र देशों के साथ मिलकर सामरिक रुप से महत्वपूर्ण एशिया प्रशांत क्षेत्र में ‘‘सुरक्षा ढांचे ’’ का निर्माण करने में लगा है ताकि यहां विकास और समृद्धि का माहौल तैयार करने में मदद की जा […]

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बर्लिन : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने कहा है कि भारत , चीन , जापान और अन्य पड़ोसी तथा मित्र देशों के साथ मिलकर सामरिक रुप से महत्वपूर्ण एशिया प्रशांत क्षेत्र में ‘‘सुरक्षा ढांचे ’’ का निर्माण करने में लगा है ताकि यहां विकास और समृद्धि का माहौल तैयार करने में मदद की जा सके.

म्यूनिख में 50वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में ‘‘ यूरोप, अमेरिका और एशिया’’ विषय पर एक परिचर्चा में भाग लेते हुए मेनन ने कहा कि भारत खुद को ऐसी स्थिति में पाता है जहां वह चीन और जापान दोनों के साथ सहयोग कर सकता है.

मेनन ने कहा कि भारत, चीन , जापान और अन्य पड़ोसी तथा मित्र देशों के साथ मिलकर सामरिक रुप से महत्वपूर्ण एशिया प्रशांत क्षेत्र में ‘‘सुरक्षा ढांचे ’’ का निर्माण करने में लगा है ताकि यहां विकास और समृद्धि का माहौल तैयार करने में मदद की जा सके.

21वीं सदी में भारत द्वारा जापान को क्षेत्रीय ताकत के रुप में स्वीकार किए जाने संबंधी सवाल के जवाब में मेनन ने कहा कि जापान एक स्वयंभू राष्ट्र है और वह खुद यह फैसला कर सकता है कि वह क्षेत्र में क्या भूमिका निभाना चाहता है.मेनन ने कहा, ‘‘ हम जापान को यह नहीं कह सकते कि उसे किस प्रकार का राष्ट्र बनना चाहिए या उसे क्या भूमिका अदा करनी चाहिए. मुझे विश्वास है कि जापान अकेले दम पर यह फैसला कर सकता है.’’

परिचर्चा में चीनी प्रतिनिधि फू यिंग ने जापानी नेतृत्व द्वारा देश के सैनिकों द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध में अंजाम दिए गए कथित युद्ध अपराधों की स्वीकारोक्ति तक उसके साथ किसी प्रकार की सुरक्षा साङोदारी से इनकार किया.

नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की विदेश मामलों संबंधी समिति की अध्यक्ष फू ने कहा कि हालिया सीमाई विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच संबंध ‘‘निम्नतम स्तर’’ पर आ गए हैं.उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या युद्ध अपराधों से इनकार करना है जो द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी सैनिकों ने ढाए थे.

चीन का नाम लिए बिना जापानी विदेश मंत्री फुमियो किशिदा ने कहा कि उनका देश क्षेत्र में कुछ देशों द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे सैन्य खर्च और हथियारों का जखीरा खड़ा करने को लेकर चिंतित है.

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