डॉक्टरों ने पहली बार किया इंसानी खोपड़ी का सफल प्रत्यारोपण, वीडियो में देखें पूरी सच्चाई
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Jun 2015 1:25 PM (IST)
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दुनिया के इतिहास में पहली बार किसी जीवित इंसान की खोपड़ी और उसकी त्वचा का सफल प्रत्यारोपण किया गया है. अमेरिकी सर्जनों की टीम ने कैंसर के उपचार की वजह से सर में हुए बड़े घाव के बाद एक व्यक्ति की खोपड़ी का सफल प्रत्यारोपण करने में कामयाबी पायी है. अमेरिका के ऑस्टिन के रहने […]
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दुनिया के इतिहास में पहली बार किसी जीवित इंसान की खोपड़ी और उसकी त्वचा का सफल प्रत्यारोपण किया गया है. अमेरिकी सर्जनों की टीम ने कैंसर के उपचार की वजह से सर में हुए बड़े घाव के बाद एक व्यक्ति की खोपड़ी का सफल प्रत्यारोपण करने में कामयाबी पायी है.
अमेरिका के ऑस्टिन के रहने वाले 55 साल के जेम्स बोयसन का अमेरिका के ह्यूस्टन शहर के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर और ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पिटल के चिकित्सकों के दल ने सफल ऑपरेशन किया. इस दल के डॉक्टरों ने कल बताया कि 22 मई को उन्होंने करीब 15 घंटों में ये ऑपरेशन पूरा किया.
जेम्स बोयसन की खोपड़ी के अलावा सिर और चेहरे से जुड़ी हुई त्वचा का भी प्रत्यारोपण किया गया. इसके अलावा मरीज की एक किडनी और पैंक्रियाज (अग्न्याशय) का प्रत्यारोपण भी डॉक्टरों की टीम को करना पड़ा, जिसके लिए उन्हें लगभग पूरा एक दिन लगा.
इस सर्जरी के बाद जारी की गयी बोयसन की एक तस्वीर में उनके सिर के ऊपरी हिस्से में एक गोल घेरे (रिंग) के आकार में लगे हुए टांके दिखायी दे रहे हैं. ये टांके उनके कान से करीब 2.5 सेंटीमीटर ऊपर लगाये गए हैं, जहां उनकी खोपड़ी और सिर की त्वचा का प्रत्यारोपण किया गया था.
प्लास्टिक सर्जरी करने वाले डॉक्टरों की टीम के मुखिया रहे डॉक्टर माइकल क्लेबक ने मीडिया को बताया कि ये एक बहुत ही जटिल स्तर पर नसों और ऊतकों को जोड़ने वाली प्रक्रिया थी.
उन्होंने कहा कि हमने इस प्रक्रिया में मरीज के सिर से गायब हो गयी खोपड़ी की हड्डी को उसके ऊपर की त्वचा के अन्दर प्रत्यारोपित किया. इतना ही नहीं बल्कि इसके अलावा हमने इस त्वचा में रक्त और अन्य पोषक पदार्थों को पहुंचाने वाली नसों को भी जोड़ने का कठिन काम किया है.
डॉक्टर क्लेबक ने बताया कि इस सर्जरी के बाद बोयसन को अपनी त्वचा में हल्की संवेदना का भी अनुभव होना शुरू हो गया है, जो बहुत ही अच्छा संकेत है. इसके अलावा अब उनकी खोपड़ी की प्रत्यारोपित त्वचा पर पसीने भी आने लगे हैं. इस तरह का तिहरा ट्रांसप्लांट हमारी जानकारी में पहले कभी नहीं किया गया है.
बोयसन को खोपड़ी के अलावा सिर की त्वचा में भी कैंसर हो गया था जिसके इलाज के लिए कई तरह की शल्य-क्रिया और रेडियेशन किया गया. इसकी वजह से उनके सिर में बड़ा घाव हो गया, जो उनके दिमाग के अन्दर के हिस्सों को प्रभावित कर रहा था. बोयसन को पांच साल की उम्र में ही डायबिटिज होने की वजह से 1992 में उनका किडनी और पैंक्रियाज का भी ट्रांसप्लांट करना पड़ा था और वो तब से अपनी किडनी और पैंक्रियाज के बचाव की दवाएं ले रहे थे.
शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली इन दवाओं की वजह से उनके शरीर में कैंसर का जोखिम बढ़ गया और इसकी वजह से उन्हें एक दुर्लभ किस्म का कैंसर (लिओमायोसारकोमा) हो गया. इसके बाद इस कैंसर के इलाज के लिए दिये गये रेडियेशन ने उनकी खोपड़ी के कुछ हिस्सों को खराब कर दिया. शरीर के इम्यून सिस्टम को दबाने वाली दवाओं की वजह से उनका शरीर प्राकृतिक तरीके से इन घावों को नहीं भर पाया और उनके पहले के प्रत्यारोपित अंग (किडनी और पैंक्रियाज) अपना काम करना बंद करने लगे.
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