एशिया-अफ्रीका सम्मेलन में भारत समेत सभी देशों ने हर तरह के आतंकवाद की आलोचना की
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Apr 2015 6:09 PM (IST)
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जकार्ता : भारत ने आज एशिया एवं अफ्रीका के राष्ट्रों के साथ आतंकवाद के सभी स्वरुपों की एक स्वर में कडी आलोचना की तथा आतंकवादियों द्वारा इंटरनेट के जरिये इसके प्रसार को रोकने के लिए ठोस सहयोग करने के मकसद से हाथ मिलाया. यहां एशिया-अफ्रीका सम्मेलन के दौरान मंत्रियों और राजनयिकों के बीच विचार विमर्श […]
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जकार्ता : भारत ने आज एशिया एवं अफ्रीका के राष्ट्रों के साथ आतंकवाद के सभी स्वरुपों की एक स्वर में कडी आलोचना की तथा आतंकवादियों द्वारा इंटरनेट के जरिये इसके प्रसार को रोकने के लिए ठोस सहयोग करने के मकसद से हाथ मिलाया.
यहां एशिया-अफ्रीका सम्मेलन के दौरान मंत्रियों और राजनयिकों के बीच विचार विमर्श के बाद देशों के बीच दो प्रस्तावों पर सहमति बनी जिसमें आतंकवाद का जिक्र किया गया है और इसकी आलोचना की गयी है. ये दो प्रस्ताव हैं बांडुंग संदेश 2015 और नई एशिया-अफ्रीका रणनीतिक भागीदारी (एनएएएसपी).
इसमें भाग लेने वाले देशों के राष्ट्र प्रमुख कल इन प्रस्तावों को मंजूर करेंगे. तीसरा प्रस्ताव आजाद फलस्तीन के समर्थन के बारे में है जिसे संभवत: 24 अप्रैल को अंगीकार किया जा सकता है.
सम्मेलन में देशों ने आतंकवाद से मुकाबला, हिंसक उग्रवाद, फिरौती सहित आतंकवाद को वित्तपोषण, आतंकवाद के मकसद से इंटरनेट के इस्तेमाल से निबटने तथा आतंकवाद से मुकाबला करते समय मानवाधिकार की रक्षा और उसका संवर्द्धन करने के लिए सहयोग के ठोस स्वरुप विकसित करने की प्रतिबद्धता दिखायी.
एनएएएसपी पर मसौदा प्रस्ताव में कहा गया, हम समग्र और एकीकृत तरीके से आतंकवाद से मुकाबले के लिए अंतर क्षेत्रीय सहयोग और समन्वय को बढाने के लिए समग्र एवं प्रभावी रणनीतियां विकसित करने की जरुरत को दोहराते हैं.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह की अगुवाई में भारत ऐतिहासिक 1955 एशियाई-अफ्रीकी सम्मेलन की 60 वीं बैठक में हिस्सा ले रहा है. इस सम्मेलन के बाद ही शीत युद्ध के दौरान गुट निरपेक्ष आंदोलन की नींव पडी.
दोनों महाद्वीपों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए तीसरी दुनिया के 50 से ज्यादा देश और 23 राष्ट्र-प्रमुख आए हैं. इन दोनों महाद्वीपों में दुनिया की 75 प्रतिशत आबादी है और समूचे वैश्विक जीडीपी में इनका 30 प्रतिशत योगदान है.
मसौदे में देशों ने संगठित आतंकवाद और आतंकवाद साथ ही इससे विकास, राजनीतिक स्थिरता और सामाजिक तथा सांस्कृतिक मूल्यों पर पडता प्रतिकूल प्रभाव पडता है. देशों ने सभी तरह के आतंकवाद की कडी निंदा की.
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