PoK में प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सुरक्षा बलों के साथ झड़प में 19 की मौत

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फाइल फोटो (Image : ANI)

पीओके में प्रदर्शन का फाइल फोटो (Image : ANI)

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़प में 19 लोगों के मारे जाने की सूचना है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने घटना की स्वतंत्र जांच, इंटरनेट सेवाएं बहाल करने और मीडिया को इलाके में जाने की अनुमति देने की मांग की है.

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PoK Protest Violence : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलाकोट में 27 जुलाई को क्षेत्रीय चुनाव के पहले दिन प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान कम से कम 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. घटना से जुड़े एक वीडियो में कई लोग खून से लथपथ जमीन पर पड़े दिखाई दिए. रिपोर्ट के अनुसार 19 मृतकों की पहचान हो चुकी है, जबकि एक अन्य मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है. हालांकि, इस वीडियो और मौतों के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने की स्वतंत्र जांच की मांग

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस घटना पर चिंता जताते हुए पाकिस्तान सरकार से सुरक्षा बलों की कार्रवाई की तुरंत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है.

संगठन की दक्षिण एशिया की कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने कहा कि रावलाकोट से आ रही खबरें जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तान की "गैरकानूनी हिंसा के लंबे इतिहास" से मेल खाती हैं. उन्होंने कहा कि इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद रहने से घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल हो रहा है. इसलिए सरकार को संचार सेवाएं बहाल करनी चाहिए और मीडिया व स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को इलाके में जाने की अनुमति देनी चाहिए.

JAAC पर प्रतिबंध को लेकर भी उठाए सवाल

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर लगाए गए प्रतिबंध की भी आलोचना की. संगठन का कहना है कि इस प्रतिबंध ने चुनाव के दौरान तनाव और बढ़ा दिया है. एमनेस्टी ने पाकिस्तान सरकार से JAAC पर लगाया गया प्रतिबंध हटाने और आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल कर आंदोलनकारियों को निशाना बनाना बंद करने की अपील की. संगठन के मुताबिक, JAAC का दावा है कि सुरक्षा बलों की फायरिंग में 19 लोग मारे गए और कई घायल हुए, जबकि पुलिस का कहना है कि उनके दो जवान भी इस झड़प में घायल हुए हैं.

चुनाव से पहले बढ़ा तनाव

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 5 जून से पूरे क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद हैं. इसी दिन JAAC को आजाद जम्मू-कश्मीर आतंकवाद निरोधक कानून, 2014 के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया था. संगठन ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव से पहले की हिंसा में अब तक कम से कम 40 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह पुलिस व अर्द्धसैनिक बल के जवान शामिल बताए गए हैं. इससे क्षेत्र में सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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आलोक पाठक

लेखक के बारे में

By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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