क्रिकेट खेलते-खेलते सीखी लीडरशिप, आज संभाल रहे Microsoft की कमान, जानिए सत्या नडेला की कहानी
सत्या नडेला (फोटो: एआई/चैटजीपीटी)
प्रभात खबर की इस खास सीरीज ‘टेक टाइकून्स की कहानी’ में आज हम जानेंगे Microsoft के CEO सत्या नडेला के बारे में. ये वही भारतीय मूल के टेक लीडर हैं, जिन्होंने हैदराबाद से अपना सफर शुरू किया, क्रिकेट के मैदान पर लीडरशिप सीखी और 22 साल तक Microsoft में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालने के बाद कंपनी के CEO बने.
आज दुनिया के करोड़ों लोग Windows वाले कंप्यूटर यूज करते हैं, Microsoft Office पर काम करते हैं और AI के लिए Copilot जैसे टूल का सहारा लेते हैं. लेकिन जिस कंपनी की कमान आज सत्या नडेला के हाथों में है, उस सफर की शुरुआत किसी बड़े बिजनेस परिवार या सिलिकॉन वैली से नहीं हुई थी. सत्या नडेला भारत के हैदराबाद से निकलकर अमेरिका पहुंचे और फिर धीरे-धीरे Microsoft के सबसे बड़े पद तक पहुंचे. उनकी कहानी सिर्फ एक इंजीनियर के CEO बनने की नहीं है, बल्कि क्रिकेट, कविता, पढ़ाई और लोगों को समझने जैसी आदतों से एक अलग तरह का लीडर बनने की कहानी भी है. ‘टेक टाइकून्स की कहानी’ सीरीज की इस कड़ी में आइए जानते हैं सत्य नडेला के बारे में
हैदराबाद में बीता बचपन, क्रिकेट और कविता से था खास लगाव
सत्या नडेला का जन्म और शुरुआती जीवन हैदराबाद में बीता. बहुत कम लोग जानते हैं कि टेक्नोलॉजी की दुनिया के इस बड़े नाम को बचपन से सिर्फ कंप्यूटर में ही दिलचस्पी नहीं थी. उन्हें क्रिकेट का काफी शौक था और कविता पढ़ने में भी रुचि थी. Microsoft की एक बातचीत में बताया गया है कि क्रिकेट और कविता के शौक ने उन्हें आगे चलकर लोगों के साथ काम करने और एक अच्छा लीडर बनने में मदद की.
उनके पिता एक सिविल सर्वेंट थे, जबकि उनकी मां संस्कृत नाटक से जुड़ी प्रोफेसर थीं. एक तरफ घर में पढ़ाई और विचारों का माहौल था, तो दूसरी तरफ उनका मन क्रिकेट के मैदान में लगता था. शायद यही वजह है कि आज भी वह लीडरशिप की बात करते समय क्रिकेट का उदाहरण देना नहीं भूलते.
क्रिकेट के मैदान पर मिला एक ऐसा सबक, जो CEO बनने के बाद भी काम आया
सत्या नडेला खुद कई बार बता चुके हैं कि क्रिकेट ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने बचपन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया था. उनकी टीम एक ऐसे क्लब के खिलाफ क्रिकेट मैच खेल रही थी, जिसमें कुछ विदेशी खिलाड़ी भी थे. सत्या और उनके साथी उन खिलाड़ियों को देखकर इतने प्रभावित थे कि मुकाबला करने के बजाय उन्हें ज्यादा देखने लगे.
सत्या मैदान में काफी दूर खड़े होकर मैच देख रहे थे. तभी टीम के एक मैनेजर ने उन्हें वहां से हटाकर मैदान की ऐसी जगह खड़ा कर दिया, जहां खेल का असली एक्शन चल रहा था. इस घटना से उन्हें एक सीधी बात समझ आई, मैदान में हो तो सिर्फ देखने के लिए नहीं, मुकाबला करने के लिए रहो. यही सोच आगे चलकर उनके करियर का भी हिस्सा बनी.
Microsoft के एक कार्यक्रम में उन्होंने क्रिकेट से मिली लीडरशिप की दूसरी सीख भी बताई थी. उनके मुताबिक, मुश्किल समय में भी टीम के लिए खेलना, पूरे जोश के साथ मुकाबला करना और दूसरों से उनका सर्वश्रेष्ठ काम निकलवाना एक अच्छे लीडर की पहचान है.
इंजीनियरिंग से अमेरिका तक का सफर
सत्या नडेला ने भारत में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने University of Wisconsin-Milwaukee से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया. इसके बाद उन्होंने बिजनेस की पढ़ाई भी की और University of Chicago से MBA की डिग्री हासिल की.
Microsoft की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, उनके पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और बिजनेस, तीनों क्षेत्रों की पढ़ाई का एक्सपीरियंस रहा है. यही बात उनके करियर में भी दिखाई देती है. वह सिर्फ एक टेक्निकल इंजीनियर बनकर नहीं रहे. उन्होंने टेक्नोलॉजी के साथ बिजनेस को भी समझा.

Microsoft जॉब के इंटरव्यू में पूछा गया अजीब सवाल
सत्या नडेला के Microsoft इंटरव्यू का एक किस्सा काफी दिलचस्प है और शायद बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं. University of Chicago Booth के एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया था कि Microsoft के इंटरव्यू में उनसे कंप्यूटर साइंस और एल्गोरिदम से जुड़े कई मुश्किल सवाल पूछे गए थे. वह व्हाइटबोर्ड पर लगातार सवाल हल कर रहे थे और उन्हें लग रहा था कि अब तो नौकरी मिल ही जाएगी.
लेकिन इंटरव्यू के आखिर में उनसे एक बिल्कुल अलग सवाल पूछा गया. सवाल था, अगर आप रास्ते पर चल रहे हों और किसी बच्चे को गिरते हुए देखें तो क्या करेंगे?
सत्या ने उस दौर को ध्यान में रखते हुए जवाब दिया कि वह पास के फोन बूथ पर जाकर 911 पर कॉल करेंगे. इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति ने उनका जवाब सुना और कहा कि आपको पहले बच्चे को उठाना और गले लगाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने सत्या को एक ऐसी बात कही, जो उनके साथ लंबे समय तक रही, आपको लोगों के प्रति संवेदनशीलता और एम्पैथी (Empathy) विकसित करनी चाहिए. बाद में उन्होंने इसी एम्पैथी को अपनी लीडरशिप का अहम हिस्सा बनाया.
1992 में Microsoft पहुंचे, लेकिन CEO बनने में लगे 22 साल
आज Microsoft का नाम सुनते ही सत्या नडेला का चेहरा याद आता है. लेकिन वह सीधे CEO बनकर कंपनी में नहीं आए थे. उन्होंने 1992 में Microsoft जॉइन किया. उस समय उन्होंने कंपनी के अलग-अलग बिजनेस और टेक्नोलॉजी से जुड़े पदों पर काम किया. Microsoft में CEO बनने से पहले वह Online Services Division में रिसर्च और डेवलपमेंट की जिम्मेदारी संभाल चुके थे. इसके अलावा उन्होंने Microsoft Business Division में भी काम किया.
बाद में उन्हें Cloud और Enterprise बिजनेस की जिम्मेदारी मिली. यही वह दौर था, जब Microsoft धीरे-धीरे Cloud Computing की दुनिया में अपनी जगह मजबूत कर रहा था. Microsoft की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नडेला ने कंपनी के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विसेज बिजनेस को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई.

जब CEO बने तो पहले प्रोडक्ट नहीं, कंपनी की सोच बदलने पर दिया जोर
फरवरी 2014 में सत्या नडेला को Microsoft का CEO बनाया गया. वह कंपनी के इतिहास में तीसरे CEO थे. उस समय Microsoft एक बड़ी और सफल कंपनी थी, लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही थी. स्मार्टफोन, क्लाउड और नई इंटरनेट सर्विसेज का दौर तेजी से आगे बढ़ रहा था.
ऐसे में सत्या नडेला ने सिर्फ नया प्रोडक्ट लॉन्च करने पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने सबसे पहले कंपनी की कल्चर यानी काम करने की सोच बदलने पर जोर दिया. उनका मानना रहा कि कोई भी कंपनी सिर्फ पुरानी सफलता के भरोसे हमेशा आगे नहीं बढ़ सकती. नए दौर में आगे रहने के लिए लगातार सीखना जरूरी है.
Harvard Business Review के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था कि नई सफलता पाने के लिए नए विचार, नई क्षमता और सही कंपनी संस्कृति की जरूरत होती है. Microsoft में उन्होंने ग्रोथ माइंडसेट को बढ़ावा दिया.
कविता पढ़ना पसंद करते हैं सत्या नडेला
सत्या नडेला की एक और दिलचस्प बात यह है कि उन्हें कविता से काफी लगाव है. टेक्नोलॉजी की दुनिया में काम करने वाले इस CEO को शब्दों और विचारों की ताकत भी पसंद है. Microsoft की 2025 की बातचीत में भी उनके क्रिकेट और कविता के शौक का जिक्र किया गया है. सत्य ने एक बार कोडिंग की तुलना भी पोएट्री से की थी.
भारत में छात्रों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था कि कोडिंग को वह कविता की तरह देखते हैं, क्योंकि दोनों में कम शब्दों या कम चीजों में एक बड़ा विचार व्यक्त किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि कोडिंग सिर्फ कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है.
सत्या नडेला के लिए एम्पैथी सिर्फ अच्छी आदत नहीं, काम करने का तरीका है
सत्या नडेला की कहानी में अगर एक शब्द सबसे ज्यादा बार सामने आता है, तो वह है एम्पैथी. उनकी किताब Hit Refresh में भी एम्पैथी को काफी महत्व दिया गया है. Microsoft के अनुसार, नडेला का मानना है कि तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी की दुनिया में लोगों की जरूरतों को समझना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है.
University of Chicago के एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया था कि एक अच्छे लीडर को तीन काम करने चाहिए, जब चीजें साफ न हों तो स्पष्टता लाएं, लोगों में काम करने की ऊर्जा पैदा करें और आखिर में सफलता हासिल करें.
लेकिन इन सबके पीछे एक चीज जरूरी है, लोगों को समझना. उनके मुताबिक, अगर आप ऐसा प्रोडक्ट बनाना चाहते हैं जो लोगों की असली समस्या हल करे, तो आपको उनकी जरूरतों को समझना होगा. यही एम्पैथी है.
आज AI की दुनिया में Microsoft को दे रहे हैं नई दिशा
सत्या नडेला के नेतृत्व में Microsoft ने Cloud Computing और अब Artificial Intelligence पर बड़ा फोकस किया है. आज कंपनी AI को सिर्फ एक नई टेक्नोलॉजी के तौर पर नहीं, बल्कि काम करने और जानकारी इस्तेमाल करने के तरीके में बड़े बदलाव के रूप में देखती है.
Microsoft की हालिया बातचीत में उन्होंने कहा कि कंपनी की कल्चर लगातार सीखने और नए विचारों को अपनाने वाली होनी चाहिए. उनके मुताबिक, AI आने वाले समय में लोगों को जानकारी बनाने, इस्तेमाल करने और अपने काम को बेहतर तरीके से करने में मदद कर सकता है.
सत्या नडेला से हमें क्या सीखने को मिलता है?
सत्या नडेला की कहानी की सबसे खास बात शायद यही है कि वह सिर्फ एक टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट की कहानी नहीं है. हैदराबाद का एक लड़का, जिसे क्रिकेट खेलना और कविता पसंद थी, आगे चलकर अमेरिका पहुंचा. Microsoft में नौकरी मिली तो इंटरव्यू में एम्पैथी का सबक मिला. फिर 22 साल तक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालने के बाद वह उसी कंपनी के CEO बन गए.
उनकी कहानी बताती है कि सफलता सिर्फ सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे या सबसे तेज व्यक्ति बनने से नहीं मिलती. कभी-कभी लगातार सीखते रहना, टीम के साथ काम करना और सामने वाले इंसान को समझना भी आपको बहुत आगे ले जा सकता है.
नोट: यह लेख प्रभात खबर की ‘टेक टायकून्स की कहानी’ सीरीज का हिस्सा है. इस सीरीज के जरिए हम टेक जगत की अलग-अलग दिग्गज हस्तियों की कहानी आपके सामने ला रहे हैं. जानेंगे कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कैसे की, किन चुनौतियों का सामना किया और किस तरह अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचे. इस सीरीज की अगली कड़ी में हम 14 सितंबर को टेक इंडस्ट्री के एक और बड़े नाम की कहानी आपके सामने लेकर आएंगे. तब तक जुड़े रहिए हमारे साथ.
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