AI का अगला खतरा: इंटरनेट ठप करने की तैयारी? जानिए भारत के नए Cyber Resilience मॉडल की पूरी रिपोर्ट

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एआई से बढ़ी साइबर हमलों की रफ्तार

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DSCI समिट 2026 और APNIC 62 के बीच भारत के सामने साइबर सुरक्षा की नई चुनौती. अगर एआई अटैक से UPI, बैंकिंग और इंटरनेट बंद हुआ तो भारत कितनी जल्दी रिकवर कर पाएगा? पढ़ें एक्सक्लूसिव रिपोर्ट.

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बेंगलुरु में आयोजित 'DSCI Cyber for Global Summit 2026' और मुंबई में चल रहे इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े सम्मेलन 'APNIC 62' के मंच से एक गंभीर चेतावनी उभरकर सामने आई है. एआई (AI) के इस दौर में अब साइबर सुरक्षा का मतलब केवल किसी वेबसाइट का हैक होना या डेटा चोरी होना भर नहीं रह गया है. असली खतरा अब पूरे डिजिटल इकोसिस्टम के ठप (Outage) हो जाने का है. ऐसे में भारतीय साइबर विशेषज्ञों और CERT-In का मानना है कि अब भारत को पारंपरिक 'Cyber Security' के बजाय 'Cyber Resilience' (साइबर अटैक के बाद डिजिटल सेवाओं को वापस पटरी पर लाने की क्षमता) के एक नए और मजबूत मॉडल की तत्काल आवश्यकता है.

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AI साइबर अटैक को तेज कैसे कर रहा है और पुराना Security Model क्यों कमजोर पड़ सकता है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने साइबर हमलावरों की क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है. अब हैकर्स एआई टूल्स का इस्तेमाल करके ऑटोमेटेड और लगातार बदलने वाले मैलवेयर तैयार कर रहे हैं, जो पुरानी एंटी-वायरस और फायरवॉल सुरक्षा प्रणालियों को आसानी से चकमा दे देते हैं.

  • CERT-In का अलर्ट: राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (CERT-In) की नवीनतम एडवाइजरी और एआई-इनेबल्ड साइबर थ्रेट्स रिपोर्ट के अनुसार, एआई-आधारित हमले अब सिस्टम की कमजोरियों (Vulnerabilities) को इंसानों की तुलना में 100 गुना तेजी से पहचान लेते हैं.
  • साइबर एक्सरसाइज (Cyber Drills): CERT-In ने बैंकिंग, टेलीकॉम और पावर ग्रिड जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एडवांस थ्रेट इंटेलिजेंस और नियमित 'साइबर ड्रिल' अनिवार्य कर दी हैं, ताकि एआई-जनित हमलों को रियल-टाइम में पकड़ा जा सके.

अगर Internet Routing या DNS में दिक्कत आए तो UPI, बैंकिंग और सेवाओं पर क्या असर होगा

मुंबई में आयोजित 'APNIC 62' सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने इंटरनेट के अदृश्य इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कोर राउटिंग (BGP) और डीएनएस (DNS - Domain Name System) की सुरक्षा पर सबसे बड़ा चिंता का विषय माना है.

यदि एआई-संचालित हमलों के जरिए देश के कोर इंटरनेट राउटिंग या डीएनएस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाता है, तो इसके परिणाम बेहद विनाशकारी हो सकते हैं:

  1. UPI और डिजिटल पेमेंट्स: यूपीआई सर्वर और बैंक पेमेंट गेटवे का संपर्क टूट जाएगा, जिससे देश भर में रोज होने वाले करोड़ों डिजिटल लेनदेन अचानक रुक जाएंगे.
  2. बैंकिंग और कोर सर्वर्स: बैंकों के एटीएम (ATM), नेट बैंकिंग और इंटर-बैंक सेटलमेंट सिस्टम काम करना बंद कर देंगे.
  3. सरकारी पोर्टल्स: पासपोर्ट, आधार-आधारित सेवाएं, ई-वे बिल और सरकारी डेटा बेस आम जनता के लिए पूरी तरह से पहुंच से बाहर हो जाएंगे.

भारत के Digital Infrastructure में सबसे कमजोर कड़ी कौन सी है

भारतीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एक-दूसरे पर अत्यधिक निर्भर (Interdependent) है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और डेटा सुरक्षा परिषद (DSCI) के विश्लेषण के अनुसार, सबसे कमजोर कड़ियों की मैपिंग कुछ इस प्रकार है:

  • थर्ड-पार्टी क्लाउड और डाटा सेंटर: अधिकांश सरकारी और प्राइवेट एप्स चुनिंदा ग्लोबल क्लाउड सर्वर्स पर निर्भर हैं. यदि एक मुख्य क्लाउड प्रोवाइडर डाउन होता है, तो सैकड़ों सेवाएं एक साथ ठप हो जाती हैं.
  • टेलीकॉम बैकबोन: 5G के दौर में डिजिटल भुगतान से लेकर अस्पतालों का डेटा तक टेलीकॉम नेटवर्क पर निर्भर है. फाइबर कट या कोर नेटवर्क हैक पूरे शहर को ब्लैकआउट कर सकता है.
  • स्मॉल बिजनेस (SMBs) का असुरक्षित नेटवर्क: बड़े बैंक तो सुरक्षा पर भारी खर्च करते हैं, लेकिन उनसे जुड़े छोटे वेंडर्स और थर्ड-पार्टी एपीआई (APIs) सबसे आसान शिकार बनते हैं.

Cyber Attack के बाद Recovery का भारत के पास कितना मजबूत सिस्टम है

असली सवाल यह नहीं है कि भारत पर साइबर अटैक होगा या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि "अटैक होने के बाद भारत कितनी जल्दी अपनी डिजिटल लाइफ वापस सामान्य कर सकता है?"

  • इंसाइडेंट रिस्पॉन्स (Incident Response): CERT-In और MeitY ने देश के सभी क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (NCIIPC) के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया है.
  • डिजास्टर रिकवरी (Disaster Recovery): प्रमुख वित्तीय संस्थानों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के पास एक्टिव-एक्टिव डेटा सेंटर मॉडल हैं. इसका मतलब है कि अगर एक सर्वर पर एआई अटैक होता है, तो मिलीसेकंड्स में दूसरा सर्वर पूरा ट्रैफिक संभाल लेता है.
  • रिकवरी टाइम (MTTR): वर्तमान में भारत का औसत डिजिटल रिकवरी टाइम (Mean Time to Recover) अलग-अलग सेक्टर्स में 15 मिनट से लेकर 4 घंटे तक है, जिसे एआई के दौर में शून्य के करीब लाने का लक्ष्य रखा गया है.

Cyber Resilience को आम नागरिक की सुरक्षा से कैसे जोड़ा जाए

साइबर रेजिलिएंस केवल टेक कंपनियों का विषय नहीं है, इसका सीधा संबंध आम नागरिक की रोजमर्रा की जिंदगी से है. यदि किसी साइबर हमले के कारण देश का डिजिटल ढांचा 24 घंटे के लिए ठप होता है, तो नागरिक सुरक्षा पर निम्नलिखित असर पड़ सकता है:

  • डिजिटल सिस्टम डाउन होने का असर:
    • अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं और पेशेंट डेटा ऐक्सेस प्रभावित होगा.
    • UPI बंद होने से राशन, ईंधन व दवाओं की तत्काल खरीदारी ठप हो जाएगी.
    • पावर ग्रिड व टेलीकॉम सिग्नल बाधित होने का जोखिम रहेगा.
  • नागरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल: सरकार और बैंकों को अब इमरजेंसी में ऑफलाइन ट्रांजैक्शन मैकेनिज्म (जैसे UPI Lite offline) और बैकअप कम्युनिकेशन चैनल्स को बढ़ावा देना होगा.
  • अस्पताल और इमरजेंसी सर्विसेज: अस्पतालों के पेशेंट केयर सिस्टम और एम्बुलेंस सेवाओं के लिए ऑफलाइन बैकअप सर्वर अनिवार्य किए जा रहे हैं ताकि साइबर हमले की स्थिति में मरीजों का इलाज न रुके.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security) और साइबर रेजिलिएंस (Cyber Resilience) में क्या अंतर है?

उत्तर: साइबर सिक्योरिटी का मुख्य काम सिस्टम पर हमला होने से रोकना (Defense) है, जबकि साइबर रेजिलिएंस का ध्यान इस बात पर होता है कि अगर हमला सफल हो जाए या सिस्टम ठप हो जाए, तो कितनी जल्दी और कितनी कुशलता से सेवाओं को दोबारा चालू (Recovery) किया जा सकता है.

Q2: AI से होने वाले साइबर हमले पारंपरिक हमलों से अलग कैसे होते हैं?

उत्तर: एआई से होने वाले हमले बहुत तेजी से रूप बदलते हैं. एआई टूल्स सेकंडों में लाखों पासवर्ड क्रैक कर सकते हैं, इंसानों जैसा हूबहू दिखने वाला फर्जी संदेश (Phishing) बना सकते हैं और सिक्योरिटी सिस्टम की कमजोरियों को अपने आप ढूंढ लेते हैं.

Q3: अगर इंटरनेट और UPI अचानक बंद हो जाए, तो आम नागरिक को क्या करना चाहिए?

उत्तर: ऐसी आपात स्थिति के लिए नागरिकों को हमेशा कुछ नकद राशि (Cash) और जरूरी दवाओं का बैकअप रखना चाहिए. साथ ही, ऑफलाइन डिजिटल वॉलेट्स (जैसे UPI Lite) का इस्तेमाल करना चाहिए जो सीमित सीमा तक बिना इंटरनेट के भी काम करते हैं.

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