मोबाइल पर नोटिफिकेशन चेक करने के चक्कर में कट रहे दुनिया से

-हाइटेक जमाने में खोया-खोया रह रहा इंसान, खतरे में जानचलते-चलते कहीं रुक जाता हूं मैं, बैठे-बैठे कहीं खो जाता हूं मैं…मोहब्बतें फिल्म का यह गाना इन दिनों मोबाइल एडिक्शन के शिकार लोगों पर फिट बैठ रहा है. मोबाइल चेक करने की लत लोगों को इस कदर से पागल कर रही है कि वे बीच सड़क […]
-हाइटेक जमाने में खोया-खोया रह रहा इंसान, खतरे में जान
चलते-चलते कहीं रुक जाता हूं मैं, बैठे-बैठे कहीं खो जाता हूं मैं…मोहब्बतें फिल्म का यह गाना इन दिनों मोबाइल एडिक्शन के शिकार लोगों पर फिट बैठ रहा है. मोबाइल चेक करने की लत लोगों को इस कदर से पागल कर रही है कि वे बीच सड़क पर भी फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप के नोटिफिकेशन चेक कर रहे हैं. यह लत अब इंसानों में दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. सोशल साइट की यह बीमारी अब न सिर्फ खाली समय में देखी जा रही बल्कि अब लोग अपने हर जरूरी कामों के साथ भी फेसबुक पर कुछ न कुछ करते दिख रहे हैं. ऐसे में सीरियस मीटिंग हो या फिर अन्य जरूरी काम लोग पहली प्राथमिकता सोशल साइट्स को दे रहे हैं.
-इन बातों का रखें ख्याल
वॉट्सएप पर ज्यादा ग्रुप बनाने से परहेज करें
किसी भी फोटो या स्टेटस को डालने के बाद बार-बार न चेक करें
रात में सोने के समय फोन को थोड़ी दूर रख दे, ताकि नोटिफिकेशन पर नजर न परे
बच्चों को शुरू में गेम खेलने के लिए स्मार्ट फोन का लत न लगाये
किसी मीटिंग में फोन को साइलेंट या नेट को डिस्कनेक्ट कर सकते हैं
रोड क्रॉस करने समय फोन को पॉकेट में रखे
गाड़ी चलाते समय भी चेक कर रहे नोटिफिकेशन
लोगों में यह लत इस कदर बढ़ रही है कि वे अपनी जान की बाजी लगा कर भी सोशल मीडिया में खोये हुए रह रहे हैं. ऐसा दृश्य हर दिन शहर में देखने को मिल रहा है कि लोग गाड़ी चलाने के दौरान भी लोग मोबाइल में लगे रहते हैं.
हर नियम को भूल रहे हैं लोग
नोटिफिकेशन चेक करने की चक्कर में लोग कहीं भी रहे वॉट्सएप और फेसबुक पर लगे रहते हैं. ऐसे में कई तो स्कूल, कॉलेज व ऑफिस की मीटिंग में भी सोशल साइट पर लगे रहते हैं. कई सीरियस मीटिंग में भी लोग ऐसी हरकत करने से बाज नहीं आते.
-लोग अब काल्पनिक दुनिया में जीना पसंद कर रहे हैं. इसलिए वे अपनो से खोये-खोये रहने लगे हैं. इसलिए वे हमेशा हाथ में मोबाइल थामे रह रहे हैं. कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें फेसबुक इस्तेमाल करने की समझ तक नहीं है, लेकिन वे इस पर लगे रहते हैं. हमारे पास ऐसे कई केसेज आ रहे हैं, जिसमें इस तरह की आदत से परेशान लोगों को काउंसेलिंग करानी पड़ रही है.
डॉ बिंदा सिंह, मनोचिकित्सक
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