तीन मंत्री करेंगे अलग जिले की मांग पर विचार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Jul 2016 1:12 AM
सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग जिले से अलग कर सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की मांग पर अब राज्य के तीन मंत्री विचार करेंगे. यह निर्देश राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिया है. सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की मांग को लेकर वृहत्तर सिलीगुड़ी नागरिक मंच के प्रतिनिधि संगठन के अध्यक्ष सुनील सरकार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री […]
सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग जिले से अलग कर सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की मांग पर अब राज्य के तीन मंत्री विचार करेंगे. यह निर्देश राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिया है. सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की मांग को लेकर वृहत्तर सिलीगुड़ी नागरिक मंच के प्रतिनिधि संगठन के अध्यक्ष सुनील सरकार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने बुधवार को उत्तरकन्या गये थे.
वहां इन लोगों की मुलाकात मुख्यमंत्री से नहीं हो सकी, लेकिन अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री ने इनका ज्ञापन स्वीकार कर लिया. उस ज्ञापन के आधार पर ममता बनर्जी ने मंत्री अरुप विश्वास, पर्यटन मंत्री गौतम देव तथा उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवीन्द्र नाथ घोष को इस मामले पर विचार करने के लिए कहा है. सिलीगुड़ी के जिला बनने के भविष्य पर अब यही तीनों मंत्री विचार-विमर्श करेंगे. मुख्यमंत्री के इस निर्देश के बाद इन मंत्रियों ने सिलीगुड़ी वृहत्तर नागरिक मंच के सदस्यों को उसी दिन शाम को बैठक के लिए उत्तरकन्या आमंत्रित किया. सुनील सरकार, रतन बनिक तथा सोमनाथ चटर्जी के अलावा अन्य सदस्य तीनों मंत्रियों से मिलने के लिए उत्तरकन्या पहुंचे. बुधवार की शाम छह बजे तीनों मंत्रियों के साथ इन लोगों की बैठक हुई. प्राप्त जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की मांग को लेकर जुलाई महीने में एक और बैठक होगी. संगठन की ओर से सोमनाथ चटर्जी ने बताया है कि 15 से लेकर 17 जुलाई के बीच तीनों मंत्रियों के साथ वृहत्तर सिलीगुड़ी नागरिक मंच की बैठक उत्तरकन्या में होगी. वहां वह लोग सिलीगुड़ी को क्यों जिला बनाना चाहिए, इसको लेकर विभिन्न तथ्य मंत्रियों को अवगत करायेंगे. उसके बाद तीनों मंत्री अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सौंप देंगे. उन्होंने एक बार फिर से सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की जोरदार मांग की. उन्होंने कहा कि यदि कालिम्पोंग को जिला बनाया जा सकता है, तो फिर सिलीगुड़ी को अलग जिला का दर्जा क्यों नहीं मिलेगा.
उन्होंने कहा कि इस शहर की न केवल आबादी अधिक है, बल्कि यहां की ढांचागत सुविधाएं भी काफी विकसित हैं. शहर की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां तीन-तीन रेलवे स्टेशन सिलीगुड़ी जंक्शन, सिलीगुड़ी टाउन तथा न्य जलपाईगुड़ी है. इसके अलावा बागडोगरा हवाई अड्डा भी सिलीगुड़ी के निकट ही है. सिलीगुड़ी शहर में दो-दो बड़े स्टैंड भी हैं. इनमें से एक बस स्टैंड तेंजिंग नोरगे बस टर्मिनस को अंतर्राष्ट्रीय बस अड्डा का दर्जा मिलने वाला है. जाहिर तौर पर सिलीगुड़ी शहर जिला बनाने की सभी शर्तों को पूरा करता है. उन्होंने आगे कहा कि सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन 47 वार्ड हैं जिनमें से 14 वार्ड जलपाईगुड़ी जिले में पड़ते हैं. विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए सिलीगुड़ी की आधी आबादी को 40 किलोमीटर जलपाईगुड़ी अथवा 80 किलोमीटर दूर दार्जिलिंग का चक्कर काटना पड़ता है.
पूर्व कानून मंत्री ने मानी थी मांगें
श्री चटर्जी ने आगे कहा कि तृणमूल-1 सरकार में कानून मंत्री रहे मलय घटक तथा चन्द्रिमा भट्टाचार्य ने सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग का समर्थन किया था. इसके साथ ही उन्होंने सिलीगुड़ी में ही मेट्रोपोलिटन कोर्ट स्थापित करने की भी घोषणा की थी. तब से लेकर अब तक काफी समय बीत चुका है. न तो सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की कोई पहल हुई और न ही सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन कोर्ट बनाने पर ही कोई निर्णय हुआ. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नेट की तो स्थापना कर दी, लेकिन मेट्रोपोलिटन कोर्ट नहीं बनाये गये.
भक्तिनगर थाने का पेंच
सिलीगुड़ी के निकट भक्तिनगर थाना सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के अधीन है, लेकिन यहां दर्ज मामलों की सुनवाई जलपाईगुड़ी कोर्ट में होती है. भक्तिनगर थाने से सिलीगुड़ी कोर्ट की दूरी करीब तीन किलोमीटर है, जबकि जलपाईगुड़ी कोर्ट की दूरी 40 किलोमीटर से भी अधिक है. पुलिस को कैदियों को लाने-ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है और राज्य सरकार के धन की भी बरबादी होती है. आम लोगों को भी जलपाईगुड़ी कोर्ट आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. पैसे की बरबादी के साथ ही समय की भी बरबादी होती है. यदि सिलीगुड़ी में मेट्रोपोलिटन कोर्ट की स्थापना हो जाये, तो भक्तिनगर थाने में दर्ज मामलों की सुनवाई सिलीगुड़ी में ही होने लगेगी.
किन इलाकों को लेकर हो रही है अलग जिले की मांग
सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन सभी 47 वार्डों के साथ ही भक्तिनगर थाना इलाका, राजगंज, माटीगाड़ा, बागडोगरा तथा नक्सलबाड़ी एवं खोरीबाड़ी को लेकर अलग सिलीगुड़ी जिला बनाने की मांग की जा रही है. इसमें 14 वार्ड ऐसे हैं जो पड़ते तो सिलीगुड़ी नगर निगम में है, लेकिन उनका जिला जलपाईगुड़ी में है. वृहत्तर सिलीगुड़ी नागरिक मंच का तर्क है कि अलग जिला बनाये जाने के बाद यहां के लोगों को करीब 45 किलोमीटर दूर जलपाईगुड़ी तथा 80 किलोमीटर दूर दार्जिलिंग का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा.
क्या है सिलीगुड़ी के पक्ष में
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिन पांच शहरों को जिला बनाने की घोषणा की है, उनमें से कालिम्पोंग के नाम को लेकर विवाद है. दो वर्ष पहले तक कालिम्पोंग को जिला बनाने की मांग नहीं की जा रही थी. कालिम्पोंग के तत्कालीन गोजमुमो विधायक हर्क बहादुर छेत्री के अपनी पार्टी से बगावत करने के बाद अचानक जिला बनाने की मांग शुरू हो गई. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पहाड़ पर अलग गोरखालैंड राज्य के लिए आंदोलन कर रहे गोजमुमो सुप्रीमो बिमल गुरूंग को कमजोर करने के लिए कालिम्पोंग को जिला बनाने का निर्णय लिया गया. दूसरी तरफ सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग कई वर्षों से की जा रही है. कालिम्पोंग के मुकाबले ढांचागत सुविधाओं तथा अन्य मामलों में सिलीगुड़ी काफी आगे है. तर्क है कि यहां नगर निगम के साथ ही तीन-तीन रेलवे स्टेशन, एक हवाई अड्डा तथा दो बड़े बस स्टैंड हैं. जिला अस्पताल तथा उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज भी सिलीगुड़ी में ही हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










