तृणमूल ने दी जलढाका परियोजना ठप करने की चेतावनी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 May 2016 8:15 AM
न्यूनतम मजदूरी नहीं दिये जाने का विरोध प्रबंधन ने कहा- हमारी नहीं, ठेकेदार की जिम्मेदारी सिलीगुड़ी : दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में जलढाका जल विद्युत परियोजना के अधीन झालोंग तथा बिन्दू बिजली उत्पादन केन्द्र को बंद करने की धमकी तृणमूल कांग्रेस ने दी है. कूचबिहार में चुनाव खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को […]
न्यूनतम मजदूरी नहीं दिये जाने का विरोध
प्रबंधन ने कहा- हमारी नहीं, ठेकेदार की जिम्मेदारी
सिलीगुड़ी : दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में जलढाका जल विद्युत परियोजना के अधीन झालोंग तथा बिन्दू बिजली उत्पादन केन्द्र को बंद करने की धमकी तृणमूल कांग्रेस ने दी है. कूचबिहार में चुनाव खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को ही सिलीगुड़ी से कोलकाता के लिए रवाना हुई हैं.
उनके सिलीगुड़ी से जाते ही तृणमूल कांग्रेस के गोरूबथान ब्लॉक युवा तृणमूल के अध्यक्ष अनूप गुरूंग ने यह धमकी दी है. इन दोनों बिजली उत्पादन केन्द्रों में 52 अस्थायी कर्मचारी हैं. आरोप है कि इन लोगों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जाती. झालोंग यूनिट के एक कर्मचारी अमरचंद प्रधान ने बताया है कि वह पिछले 25 वर्षों से यहां काम कर रहे हैं. उसके बाद भी उन्हें मात्र सात हजार रुपये की तनख्वाह दी जाती है. यह बिजली संयंत्र पूरी तरह से केन्द्र सरकार के अधीन है. लेकिन यहां के कर्मचारियों को ठेकेदार के अधीन रखा गया है.
महंगाई के इस जमाने में सात हजार रुपये के तनख्वाह पर काम करना संभव नहीं हो पा रहा है. उन्होंने सभी अस्थायी श्रमिकों को स्थायी करने के साथ ही न्यूनतम तनख्वाह बीस हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है. बिन्दू यूनिट के पंप ऑपरेटर जीवन गुरूंग ने कहा है कि ग्रुप डी के पद पर बाहर के लोगों की यहां नियुक्ति की जा रही है. उनकी तनख्वाह भी अधिक है.
स्थानीय कर्मचारी पिछले 25 साल से यहां काम कर रहे हैं, उसके बाद भी ना तो उनके स्थायीकरण की कोई व्यवस्था की गई है और न ही उचित पैसे दिये जा रहे हैं. तृणमूल नेता अनूप गुरूंग ने कहा है कि इन बिजली केन्द्रों से डुवार्स, पहाड़, सिक्किम तथा भूटान को भी बिजली की आपूर्ति की जाती है. यहां के 52 अस्थायी कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं दी जाती. कई बार मांग करने के बाद भी प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की है.
बाध्य होकर सभी कर्मचारियों ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है. श्री गुरूंग ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो वह लोग न केवल दोनों संयंत्रों को बंद कर देंगे, बल्कि भूख हड़ताल भी करेंगे. जलढाका जल विद्युत परियोजना के सहायक मैनेजर एसके आइच ने कहा है कि अस्थायी कर्मचारियों को ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्त किया जाता है. उन श्रमिकों की सारी जिम्मेदारी ठेकेदारों की होती है. उन्होंने कहा है कि आंदोलन कर बिजली का उत्पादन बंद कर देने से कोई लाभ नहीं होगा.
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