शिक्षा के मामले में अन्य उम्मीदवारों का हाल बेहाल
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सिलीगुड़ी : कहते हैं कि शिक्षा ही मनुष्य का भविष्य तय करती है. जबकि भारत देश की राजनीति में मुकाम हासिल करने के लियए संवैधानिक दृष्टकोण से शिक्षा महत्वपूर्ण नहीं है. देश की संविधान ने नेता,मंत्री बनने के लिये शिक्षा को आधार नहीं माना है. सरकारी स्तर पर सबसे छोटी चपरासी की नौकरी के लिये […]
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सिलीगुड़ी : कहते हैं कि शिक्षा ही मनुष्य का भविष्य तय करती है. जबकि भारत देश की राजनीति में मुकाम हासिल करने के लियए संवैधानिक दृष्टकोण से शिक्षा महत्वपूर्ण नहीं है. देश की संविधान ने नेता,मंत्री बनने के लिये शिक्षा को आधार नहीं माना है.
सरकारी स्तर पर सबसे छोटी चपरासी की नौकरी के लिये भी शैक्षणिक योग्यता आवश्यक है, लेकिन देश के सर्वोच्च पद प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने के तक के लिये शैक्षणिक योग्यता आवश्यक नहीं है. भले ही संविधान ने नेता बने के लिए शिक्षा को आवश्यक ना माना हो लेकिन आम मतदाता उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता पर ध्यान जरूर देते हैं. राज्य विधानसभा चुनाव में 19 नंबर विधानसभा केंद्र डाबग्राम-फूलबाड़ी में शिक्षित उम्मीदवारों के बीच ही कड़ी टक्कर है.
शिक्षा को आधार बनाकर यदि कोइ मतदाता मतदान करना चाहें तो यहां उन्हें परेशानी होगी़ शैक्षणिक योग्यता के मामले में माकपा, तृणमूल और भाजपा के उम्मीदवार एक से बढ़कर है. राजनीतिक दृष्टीकोण से भी ये तीनों महारथी हैं.इस चुनाव में डाबग्राम-फूलबाड़ी विधानसभा सीट से कुल सात उम्मीदवार मैदान में हैं. इन सात उम्मीदवारों में से तृणमूल व कांग्रेस समर्थिक माकपा उम्मीदवार के बीच ही मुख्य मुकाबला होना है.
शिक्षा व राजनीतिक योग्यता के दृष्टिकोण से इन दोनों ने महारथ हासिल की है. इन दोनों ने छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रखा.वर्ष 2011 के ममता लहर में गौतम देव ने माकपा उम्मीदवार दिलीप सिंह को हराकर मैदान मार लिया था. इस बार के विधानसभा चुनाव में तृणमूल व माकपा ने फिर से इन्हीं दोनों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है. पेशे से वकील तृणमूल के उम्मीदवार गौतम देव कलकत्ता विश्वविद्यालय से एल.एल.बी की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं. राजनीतिक योग्यता के आधार पर ममता सरकार ने इन्हें उत्तर बंगाल विकास मंत्री बनाया है. इस सीट से उनके मुख्य विरोधी कांग्रेस समर्थित माकपा उम्मीदवार दिलीप सिंह पेशे से उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक है.
शैक्षणिक योग्यता में ये भी गौतम देव के समान ही उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल कर चुके हैं. राजनीति में ये भी मझे हुए खिलाड़ी है. सिलीगुड़ी नगर निगम के बार्ड नंबर 42 से ये कई बार पार्षद रह चुके है. इसके अलावे वर्तमान में ये सिलीगुड़ी नगर निगम के चेयरमैन भी हैं.इस दोनों के अतिरिक्त भाजपा की ओर से रथींद्र बोस भी चुनाव मैदान में इन दोनों से मुकागला कर रहे हैं. शिक्षा व राजनीति में ये भी एक धुरंधर हैं. पेशे से ये एक चार्टर्ड अकाउटेंट हैं. आइसीएआइ से उन्होंने सी.ए.की डिग्री हासिल की है.
इन तीन को छोड़कर मैदान में उतरे अन्य चार उम्मीदवार शैक्षणिक व राजनीतिक दृष्टिकोण से माहिर नहीं हैं. बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार संजीवन सरकार बंगाल बोर्ड से मात्र माध्यमिक पास हैं.
जबकि एसयूसीआईसी की ओर से चुनाव लड़ रहे अबूल कासेम केवल नौंवी पास हैं एवं पेशे से एक किसान है. आमरा बंगाली के उम्मीदवार दुलाल सरकार व निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे सुभाष विश्वास ने अपने नामांकन हलफनामे में शैक्षणिक योग्यता का ब्यौरा पेश नहीं किया है.
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