विधानसभा चुनाव: सिलीगुड़ी की सीट को लेकर तृणमूल असमंजस में, ममता ने बनायी खास रणनीति

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सिलीगुड़ी: बंगाल विधानसभा चुनाव के बस कुछ ही महीने बचे हैं. सब कुछ ठीक रहा तो अप्रैल में चुनाव होना करीब करीब तय है.ऐसे में सिलीगुड़ी की सीट को लेकर तणमूल कांग्रेस असमंजस में है. हांलाकि इस सीट को लेकर तणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ‘दीदी’ काफी गंभीर है. राजनीति के माहिरों का मानना है कि […]

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सिलीगुड़ी: बंगाल विधानसभा चुनाव के बस कुछ ही महीने बचे हैं. सब कुछ ठीक रहा तो अप्रैल में चुनाव होना करीब करीब तय है.ऐसे में सिलीगुड़ी की सीट को लेकर तणमूल कांग्रेस असमंजस में है. हांलाकि इस सीट को लेकर तणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ‘दीदी’ काफी गंभीर है. राजनीति के माहिरों का मानना है कि 2011 के विधान सभा चुनाव में सिलीगुड़ी की सीट तणमूल के खाते में जाने के बावजूद दीदी इस बार किसी तरह का जोखिम उठाना नहीं चाहती है. पिछले चुनाव में तणमूल के टिकट पर डॉ रूद्रनाथ भट्टाचार्य इस सीट से चुनावी जंग लड़ कर जीत चुके हैं.

इस चुनाव में श्री भट्टाचार्य ने अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी वाम मोरचा के कद्दावर नेता अशोक भट्टाचार्य को कुल पांच हजार छह वोट से शिकस्त दी थी. बंगाल की राजनीति में इसी चुनाव से पहला कदम रखने वाले उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के तत्कालीन मुख्य स्वास्थय अधीक्षक डॉ रूद्रनाथ भट्टाचार्य को कुल 72 हजार 19 मत मिले थे. वहीं, 34वर्षों के वाम शासन में 20 वर्ष तक लगातार नगर विकास मंत्री का दायित्व संभालने वाले और राजनीति के गलियारे में महान तजुर्बेकार की उपाधि पा चुके अशोक भट्टाचार्य को मात्र 67 हजार 13 मत ही मिले. पिछले चुनाव में तणमूल की जीत के बावजूद इस साल दीदी सिलीगुड़ी सीट को काफी अहमियत दे रही हैं. वजह 2011 एवं 2016 के बीच सिलीगुड़ी की राजनीति में काफी उतार-चढ़ाव आया है.

2011 के चुनाव में वाम मोरचा जिस तेजी के साथ धराशायी हुआ उसी तेजी के साथ 2015 से वाम मोरचा का ग्राफ बढ़ा भी. इन पांच वर्षों में अशोक भट्टाचार्य के बदौलत वाम मोरचा की ताकत बढ़ी. इन पांच वर्षों में अशोक ने अपना राजनीति तजुर्बे का खूब इस्तेमाल किया. बीते वर्ष अशोक मॉडल की राजनीति ने ही सिलीगुड़ी नगर निगम एवं सिलीगुड़ी महकमा परिषद पर वापस दखल करने में वाम मोरचा कामयाब हुई. इस अशोक मॉडल के राजनीति की चरचा केवल कोलकाता या दिल्ली तक ही सिमित नहीं रही बल्कि देश की सीमा लांघ कर चीन तक पहुंच गयी. राजनीति के माहिरों की माने तो अशोक की जादुई राजनीति से केवल सिलीगुड़ी ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर बंगाल में ही तणमूल की हवा निकलती दिखायी दे रही है.

इस लिए इस चुनाव में दीदी टिकट बंटवारें को लेकर काफी मंथन कर रही हैं. सिलीगुड़ी विधान सभा सीट भी दीदी गंवाना नहीं चाहती़ इसके लिए स्वयं इस सीट से चुनाव लड़ लें तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए़ दीदी के इस मूड का संकेत पिछले दिनों सिलीगुड़ी दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ता मीटिंग में तणमूल के प्रदेश महासचिव एवं ममता सरकार में शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने दिया था. इस अतिगोपनीय बात की जानकारी एक कार्यकर्ता ने देते हुए बताया कि सिलीगुड़ी नगर निगम एवं सिलीगुड़ी महकमा परिषद के चुनावों में जिस तरह तणमूल कांग्रेस चारों खाने चित्त हुई है. इसे देखकर दीदी को अब सिलीगुड़ी में अपने खेमे का कोई ऐसा नेता दिखायी नहीं दे रहा, जो तणमूल की बीच मझधार में अटकी नैया पार लगा सके.

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