टांगन नदी से बालू का हो रहा अवैध खनन
Updated at : 23 Jun 2019 1:48 AM (IST)
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उत्तर कृष्णपुर, आड़ियाचंडी, चांदपाड़ाघाट, बोकदुआर इलाके में चल रहे कारोबार से कटाव और बाढ़ की बढ़ी आशंका कालियागंज : टांगन नदी से अवैध रुप से बालू खनन का कारोबार सरेआम चल रहा है. लेकिन प्रशासन इसके प्रति बेखबर बना हुआ है. उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज ब्लॉक अंतर्गत उत्तर कृष्णपुर, आड़ियाचंडी, चांदपाड़ाघाट, बोकदुआर समेत संलग्न […]
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उत्तर कृष्णपुर, आड़ियाचंडी, चांदपाड़ाघाट, बोकदुआर इलाके में चल रहे कारोबार से कटाव और बाढ़ की बढ़ी आशंका
कालियागंज : टांगन नदी से अवैध रुप से बालू खनन का कारोबार सरेआम चल रहा है. लेकिन प्रशासन इसके प्रति बेखबर बना हुआ है. उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज ब्लॉक अंतर्गत उत्तर कृष्णपुर, आड़ियाचंडी, चांदपाड़ाघाट, बोकदुआर समेत संलग्न इलाकों में यह कारोबार चल रहा है. अवैध कारोबारियों का एक भ्रष्ट वर्ग इस काम में संलिप्त है.
इससे जहां एक तरफ सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है वहीं, नदी का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है. इसकी जानकारी जिला परिषद को दी गयी है. वहीं, बीएलआरओ ऑफिस का कहना है कि पुलिस के सहयोग से कई बार ऐसे अवैध कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलाया गया. जिला परिषद से लेकर जिलाधिकारी तक के साथ बात की गयी है. लेकिन सवाल है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद बालू का अवैध खनन कैसे चल रहा है?
उधर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि बालू के अलावा नदी के कछार से मिट्टी भी काटकर उसे बेचा रहा है. इससे जिन सड़कों से होकर ट्रैक्टर पर बालू की ढुलाई हो रही है वे क्षतिग्रस्त हो रही हैं. नदी के बगल में जो बस्ती इलाके हैं वहां धूल उड़ रही है. प्रशासन को इसकी निगरानी करनी चाहिये.
उत्तर दिनाजपुर जिला परिषद के को-मेंटर और तृणमूल के राज्य सचिव असीम घोष ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी है. इसको लेकर बीएलआरओ और पुलिस विभाग के साथ बात हुई है. जिलाधिकारी से जल्द बातचीत की जायेगी. प्रभावित इलाकों में नदी कटाव की भी समस्या है. इसके बावजूद बालू खनन गंभीर समस्या है. कालियागंज के बीएलआरओ विद्युत कुमार माझी ने बताया कि पुलिस के सहयोग से कई जगह बालू के अवैध खनन के खिलाफ अभियान शुरु किया गया है. इलाके में कोई चेकपोस्ट नहीं है. जानकारी मिलने पर ही हम लोग मुहिम चलाते हैं. कई बार वाहन जब्त किये गये हैं. हालांकि कई बार उनके पहुंचने से पहले ही कारोबारी वाहन समेत भाग जाते हैं.
उल्लेखनीय है कि नदी के किनारे से बालू निकासी के लिये टेंडर की प्रक्रिया होती है. लेकिन व्यवसायियों का एक वर्ग इन नियमों को ताक पर रखकर खनन करते हैं जिससे सरकारी राजस्व की हानि होती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो नदी कटाव और बाढ़ जैसे संकट की आशंका बढ़ जायेगी. तब प्रशासन ही इसके लिये जवाबदेह होगा.
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