ममता का एक और मास्टर स्ट्रोक: अब गोरामुमो नेताओं को भी मिलेगा सत्ता का सुख, जीटीए के बाद एचएडीसी का गठन

Published at :23 Nov 2017 8:36 AM (IST)
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ममता का एक और मास्टर स्ट्रोक: अब गोरामुमो नेताओं को भी मिलेगा सत्ता का सुख, जीटीए के बाद एचएडीसी का गठन

सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को दबाने के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक और मास्टर स्ट्रोक चला है. गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन(जीटीए) के माध्यम से गोजमुमो नेताओं को सत्ता सुख चखाने के बाद अब स्वर्गीय सुभाष घीसिंग द्वारा गठित गोरामुमो के नेताओं को सत्ता का स्वाद चखाने की […]

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सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को दबाने के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक और मास्टर स्ट्रोक चला है. गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन(जीटीए) के माध्यम से गोजमुमो नेताओं को सत्ता सुख चखाने के बाद अब स्वर्गीय सुभाष घीसिंग द्वारा गठित गोरामुमो के नेताओं को सत्ता का स्वाद चखाने की बारी है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जीटीए के बाद अब एचएडीसी यानी हिल एरिया डेवलपमेंट कमेटी का गठन किया है. इसके चेयरमैन गोरामुमो सुप्रीमो तथा सुभाष घीसिंग के बेटे मन घीसिंग बनाये गये हैं. राज्य सरकार की ओर से इस आशय की अधिसूचना भी जारी कर दी गयी है. मुख्यमंत्री इनदिनों सिलीगुड़ी के चार दिवसीय दौरे पर हैं. उन्होंने बुधवार को उत्तरकन्या में दार्जिलिंग तथा उत्तर बंगाल के और भी तीन जिलों को लेकर एक उच्चस्तरीय प्राथमिक बैठक की. उसके बाद ही एचएडीसी गठन किये जाने की की पूरी जानकारी मिली.


हालांकि कहा यह जा रहा है कि इस बात का निर्णय पहले ही हो चुका था. इसकी अधिसूचना इस महीने की 13 तारीख को ही जारी हो गयी थी. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ममता बनर्जी ने इस नये मास्टर स्ट्रोक से पहाड़ से एक तरह से गोरखालैंड के जाल को खत्म कर दिया है. इनका मानना है कि ममता बनर्जी ने पहले गोरखालैंड की मांग को दबाने के लिए गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग तथा अन्य नेताओं को सत्तासुख का भोग करवाया. उसके बाद करीब पांच साल तक पहाड़ पर शांति बनी रही और कहीं से भी अलग राज्य की कोई मांग नहीं उठी. वह तो बांग्लाभाषा को पहाड़ के स्कूलों में पढ़ाये जाने के विवाद को लेकर गोरखालैंड की आग एक बार फिर से भड़की. करीब चार महीने तक पूरा पहाड़ एक तरह से अचल हो गया. साढ़े तीन महीने से भी अधिक समय तक बेमियादी बंद चला और एक दर्जन से अधिक लोग मारे गये. उस परिस्थिति में भी ममता बनर्जी ने धीरज नहीं खोया और बड़ी चालाकी से काम लिया. आज आलम यह है कि विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे विमल गुरुंग ही फरार हैं.

उनका सामने आना मुश्किल है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विमल गुरुंग के खिलाफ विस्फोटक कानून के साथ ही देशद्रोह और हत्या आदि के गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं. एक बार यदि वह पुलिस की गिरफ्त में आ गये, तो उनका लंबे समय तक बाहर आना मुश्किल है. यही कारण है कि वह सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से कुछ राहत पाने की जुगत में लगे हुए हैं. दूसरी ओर पहाड़ से गायब रहने के कारण विमल गुरुंग की पार्टी पर पकड़ कमजोर हो गयी. कभी उनके खासमखास रहे विनय तमांग अब ममता बनर्जी के खासमखास हो गये हैं . उन्होंने अपने बॉस विमल गुरुंग को ही पार्टी से बाहर का दरवाजा दिखा दिया है. विमल गुरुंग तथा उनके अन्य सहयोगी अनित थापा आदि अब जीटीए पर काबिज हैं. श्री तमांग जहां जीटीए के चेयरमैन हैं वहीं अनित थापा को वाइस चेयरमैन बनाया गया है.

क्या है एचएडीसी
एचएडीसी का अधिकार क्षेत्र दार्जिलिंग तथा कालिम्पोंग होगा. इसका मुख्य काम इन दोनों जिलों में चल रहे विकास कार्यों की निगरानी करने का होगा. यह कमेटी राज्य सरकार के निर्देश तथा परामर्श के हिसाब से काम करेगी.राज्य में मुख्य सचिव अत्री भट्टाचार्य की ओर से इस अधिसूचना को जारी किया गया है.

गोरामुमो की बढ़ रही है शक्ति
विमल गुरुंग के फरार होने के बाद गोरामुमो की शक्ति एक बार फिर से बढ़ रही है. आगे कोई बड़ा उलटफेर हो, उससे पहले ही ममता ने मन घीसिंग तथा उनके सहयोगियों को पावर दे दिया है. राज्य सरकान ने जो अधिसूचना जारी की है, उसके अनुसार गोरामुमो के एक अन्य कद्दावर नेता महेंद्र छेत्री को एचएडीसी का वाइस चेयरमैन बनाया गया है, जबकि अजय एडवर्ड तथा सुभमय चटर्जी इसके सदस्य बनाये गये हैं.
सुभाष घीसिंग ने की थी पहली बार गोरखालैंड की मांग
ममता के इस कदम के बाद गोजमुमो की ओर से अब कोई भी नेता गोरखालैंड-गोरखालैंड चिल्लाने की स्थित में नहीं है. राजनीतिक विश्लेषकों का आगे मानना है कि गोजमुमो के बाद पहाड़ पर दूसरी सबसे बड़ी जनाधारवाली पार्टी गोरामुमो है. सुभाष घीसिंग ने गोरामुमो का गठन कर पहली बार पहाड़ पर अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था. 80 के दशक में शुरू इस आंदोलन में 1200 से भी अधिक लोग मारे गये थे. उसके बाद केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने दार्जिलिंग गोरखा पावर्त्य परिषद (दागोपाप ) का गठन किया. सुभाष घीसिंग इसके चेयरमैन बने. वह 26 साल तक इस कुर्सी पर जमे रहे और कभी भी गोरखालैंड राज्य की मांग नहीं की. इस बीच वर्ष 2007 में विमल गुरुंग का उत्थान और सुभाष घीसिंग का पतन हुआ. स्थिति यह हो गयी कि उन्हें भी तब पहाड़ छोड़ कर भागना पड़ा था. वर्तमान में उनके पुत्र मन घीसिंग पार्टी की कमान संभाल रहे हैं.
सिलीगुड़ी में जाम की समस्या होगी दूर
सिलीगुड़ी में ट्रैफिक जाम की समस्या दूर करने के लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी है. यह कहना है मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का. वह बुधवार को मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में एक सरकारी कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बात कर रही थीं. उन्होंने शहर की जाम की समस्या को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट लेने के बाद कहा कि कल यानी गुरुवार से शहर के बर्दमान रोड झंकार मोड़ पर फोर लेन का काम आरंभ होने जा रहा है. वहीं, नौकाघाट से जलपाईमोड़ तक पहले से ही यह काम शुरू हो गया है. दूसरी ओर दार्जिलिंग मोड़ में और एक फ्लाईओवर व हिलकार्ट रोड में एक नया महानंदा सेतु बनाने का भी प्रस्ताव मिला है, जिसे लेकर रेलवे और अन्य संबंधित विभागों के साथ बातचीत जारी है. मुख्यमंत्री के इस एलान के बाद शहरवासियों में जाम खत्म होने को लेकर एक आस जगी है. इन परियोजनाओं के पूरे होने पर शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम से कुछ हद तक निजात मिलने की संभावना है.
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