ममता का एक और मास्टर स्ट्रोक: अब गोरामुमो नेताओं को भी मिलेगा सत्ता का सुख, जीटीए के बाद एचएडीसी का गठन

सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को दबाने के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक और मास्टर स्ट्रोक चला है. गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन(जीटीए) के माध्यम से गोजमुमो नेताओं को सत्ता सुख चखाने के बाद अब स्वर्गीय सुभाष घीसिंग द्वारा गठित गोरामुमो के नेताओं को सत्ता का स्वाद चखाने की […]
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जीटीए के बाद अब एचएडीसी यानी हिल एरिया डेवलपमेंट कमेटी का गठन किया है. इसके चेयरमैन गोरामुमो सुप्रीमो तथा सुभाष घीसिंग के बेटे मन घीसिंग बनाये गये हैं. राज्य सरकार की ओर से इस आशय की अधिसूचना भी जारी कर दी गयी है. मुख्यमंत्री इनदिनों सिलीगुड़ी के चार दिवसीय दौरे पर हैं. उन्होंने बुधवार को उत्तरकन्या में दार्जिलिंग तथा उत्तर बंगाल के और भी तीन जिलों को लेकर एक उच्चस्तरीय प्राथमिक बैठक की. उसके बाद ही एचएडीसी गठन किये जाने की की पूरी जानकारी मिली.
हालांकि कहा यह जा रहा है कि इस बात का निर्णय पहले ही हो चुका था. इसकी अधिसूचना इस महीने की 13 तारीख को ही जारी हो गयी थी. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ममता बनर्जी ने इस नये मास्टर स्ट्रोक से पहाड़ से एक तरह से गोरखालैंड के जाल को खत्म कर दिया है. इनका मानना है कि ममता बनर्जी ने पहले गोरखालैंड की मांग को दबाने के लिए गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग तथा अन्य नेताओं को सत्तासुख का भोग करवाया. उसके बाद करीब पांच साल तक पहाड़ पर शांति बनी रही और कहीं से भी अलग राज्य की कोई मांग नहीं उठी. वह तो बांग्लाभाषा को पहाड़ के स्कूलों में पढ़ाये जाने के विवाद को लेकर गोरखालैंड की आग एक बार फिर से भड़की. करीब चार महीने तक पूरा पहाड़ एक तरह से अचल हो गया. साढ़े तीन महीने से भी अधिक समय तक बेमियादी बंद चला और एक दर्जन से अधिक लोग मारे गये. उस परिस्थिति में भी ममता बनर्जी ने धीरज नहीं खोया और बड़ी चालाकी से काम लिया. आज आलम यह है कि विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे विमल गुरुंग ही फरार हैं.
उनका सामने आना मुश्किल है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विमल गुरुंग के खिलाफ विस्फोटक कानून के साथ ही देशद्रोह और हत्या आदि के गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं. एक बार यदि वह पुलिस की गिरफ्त में आ गये, तो उनका लंबे समय तक बाहर आना मुश्किल है. यही कारण है कि वह सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से कुछ राहत पाने की जुगत में लगे हुए हैं. दूसरी ओर पहाड़ से गायब रहने के कारण विमल गुरुंग की पार्टी पर पकड़ कमजोर हो गयी. कभी उनके खासमखास रहे विनय तमांग अब ममता बनर्जी के खासमखास हो गये हैं . उन्होंने अपने बॉस विमल गुरुंग को ही पार्टी से बाहर का दरवाजा दिखा दिया है. विमल गुरुंग तथा उनके अन्य सहयोगी अनित थापा आदि अब जीटीए पर काबिज हैं. श्री तमांग जहां जीटीए के चेयरमैन हैं वहीं अनित थापा को वाइस चेयरमैन बनाया गया है.
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