डीए बैठक में केवल चार कर्मचारी संगठनों को बुलावा, बंगाल सरकार पर लगे ‘भेदभाव’ के आरोप

Author Ashish Jha
Updated:
विज्ञापन

बंगाल सचिवालय

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Bengal News : मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होनेवाली इस बैठक के लिए संग्रामी संयुक्त मंच, कन्फेडरेशन ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज, यूनिटी फोरम और पश्चिम बंग सरकारी कर्मचारी परिषद को बुलाया गया है, लेकिन राज्य के कई अन्य कर्मचारी संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब डीए आंदोलन में वर्षों से अनेक संगठन सक्रिय रहे, तो केवल चुनिंदा संगठनों को ही चर्चा के लिए क्यों बुलाया गया.

विज्ञापन

Bengal News : कोलकाता : बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा महंगाई भत्ता (डीए) मुद्दे पर 30 मई को बुलायी गयी बैठक को लेकर राज्य के कर्मचारी संगठनों के बीच नयी बहस शुरू हो गयी है. राज्य सचिवालय में होने वाली इस बैठक में केवल चार सरकारी कर्मचारी संगठनों को आमंत्रित किये जाने पर कई अन्य संगठनों ने नाराजगी जतायी है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 30 मई को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री डीए और वेतन आयोग से जुड़े मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे.

विज्ञापन

बढ़ सकता है असंतोष

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होनेवाली इस बैठक के लिए संग्रामी संयुक्त मंच, कन्फेडरेशन ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज, यूनिटी फोरम और पश्चिम बंग सरकारी कर्मचारी परिषद को बुलाया गया है. बैठक में आमंत्रण नहीं मिलने से नाराज बंगीय शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी समिति के नेता स्वपन मंडल ने कहा-डीए आंदोलन में कई कर्मचारी संगठन लगातार संघर्ष कर रहे थे. सरकार बदलने में भी उनकी भूमिका रही है. ऐसे में उन्हें बैठक से बाहर रखना गलत संदेश देता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारी संगठनों के बीच विभाजन पैदा कर रही है, जिससे असंतोष और बढ़ सकता है.

हमारे आंदोलन को सम्मान नहीं दिया

माकपा समर्थित को-ऑर्डिनेशन कमेटी के नेता विश्वजीत गुप्ता चौधरी ने नाराजगी जताते हुए कहा- मुख्यमंत्री किसी भी दल के हों, उन्हें हमेशा निष्पक्ष दृष्टिकोण रखना चाहिए. लेकिन बैठक बुलाने के मामले में वह निष्पक्षता दिखाई नहीं दी. उन्होंने कहा कि 2011 से ही को-ऑर्डिनेशन कमेटी डीए, वेतन आयोग और कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर लगातार आंदोलन करती रही है. पिछली सरकार के दौरान हमारे कई साथियों को जेल तक जाना पड़ा. इतने लंबे संघर्ष के बावजूद सरकार ने हमारे आंदोलन को सम्मान नहीं दिया.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

‘अस्पृश्य’ समझने का आरोप

बैठक में बुलाये गये संग्रामी संयुक्त मंच के संयोजक भास्कर ने कहा कि किसे बुलाना है और किसे नहीं, यह पूरी तरह सरकार का अधिकार है. उन्होंने कहा-डीए के मुद्दे पर हमने लंबे समय तक संघर्ष किया है. शायद इसी वजह से सरकार को लगा कि समाधान के लिए हमारे सुझाव जरूरी हैं. घोष ने कहा कि बैठक में सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों को मजबूती से उठाया जायेगा. साथ ही उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि तब कर्मचारियों को लगभग ‘अस्पृश्य’ समझा जाता था और उनकी राय लेने की जरूरत नहीं समझी जाती थी.

Also Read: ‘झुकेगा नहीं’ से ‘छुप गया पुष्पा’ तक, दिलीप घोष का जहांगीर खान पर तीखा तंज

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola