कोलकाता : होमियोपैथी से ऑटिज्म की बेहतर चिकित्सा

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कोलकाता : क्या आपका बच्चा आपके चेहरे के हावभाव को देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है? क्या वह आपकी आवाज सुनने के बावजूद न तो खुश होता है और न ही कुछ जवाब देता है? क्या वह दूसरे बच्चों की तुलना में ज्यादा चुप रहता है? अगर आपके बच्चे में भी ये लक्षण हैं तो […]

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कोलकाता : क्या आपका बच्चा आपके चेहरे के हावभाव को देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है? क्या वह आपकी आवाज सुनने के बावजूद न तो खुश होता है और न ही कुछ जवाब देता है? क्या वह दूसरे बच्चों की तुलना में ज्यादा चुप रहता है? अगर आपके बच्चे में भी ये लक्षण हैं तो हो सकता है कि वह ऑटिज्म से पीड़ित हो. ऑटिज्म एक मानसिक बीमारी है, जिसके लक्षण बचपन से ही नजर आने लग जाते हैं.
इस रोग से पीड़ित बच्चों का विकास तुलनात्मक रूप से धीरे होता है. ये जन्म से लेकर तीन वर्ष की आयु तक विकसित होने वाला रोग है, जो सामान्य रूप से बच्चे के मानसिक विकास को रोक देता है. ऐसे बच्चे समाज में घुलने-मिलने में हिचकते हैं, वे प्रतिक्रिया देने में काफी समय लेते हैं और कुछ में ये बीमारी डर के रूप में दिखाई देती है.
हालांकि ऑटिज्म के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन ऐसा माना जाता है कि ऐसा सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने के कारण होता है. कई बार गर्भावस्था के दौरान खानपान सही न होने की वजह से भी बच्चे को ऑटिज्म का खतरा हो सकता है. लेकिन अब मानसिक बीमारी का इलाज होम्योपैथी में भी किया जा रहा है. यह दावा महानगर के डॉ प्रणब मल्लिक ने किया है.
डॉ मल्लिक होम्योपैथी से जरिए अब 11 बच्चों की चिकित्सा कर रहे हैं. वह महानगर के प्रेस क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन करते हुए इसकी जनाकीर दी. इस दौरान उनकी चिकित्सक ले रहे आटिज्म ग्रस्त पांच बच्चे अपने माता-पिता के साथ उपस्थित थे. यहां उपस्थित बच्चे इस धीरे-धीरे इस बीमारी से उभर रहे हैं.
अटिज्म ग्रसित शिशु जो कभी अपने नाम तक ठीक से नहीं बोल पाते थे, गुरूवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान बच्चों ने अपना परिचय दिया. उधर डॉ मल्लिक ने बताया कि अटिज्म का होम्योपैथी में पूरी तरह से इलाज संभव हैं. इलाज के दौरान असर 8 से 9 महीने के भीतर दिखने लगता है.
उन्होंने कहा कि आम तौर पर होम्योपैथी से इलाज के दौरान अटिज्म से ग्रसित बच्चों को स्पीच थैरेपी लेने की वह सलाह नहीं देते हैं, जबकि अन्य पैथी में ऐसे बच्चों को स्पीच थैरेपी दिया जाता है. उन्होंने कहा कि हम्योपैथी में काभी कम खर्च में इस बीमारी का इलाज संभव है, जो मध्यम वर्गीय परिवार की पहुंच में है. उन्होंने आटिज्म से ग्रसित बच्चों को अंडा, पक्का फल, पावरोटी, कुम्हड़ा तथा बादाम ना खाने की सलाह दी.
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