स्कूलों में छात्रों को मानसिक यातना देने पर होगी कानूनी कार्रवाई
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
Updated:
विज्ञापन
आसनसोल : सीबीएसइ और आइसीएसइ संचालित स्कूलों में बोर्ड की क ड़ाई के बाद छात्रों की शारीरिक प्रताड़ना समाप्त हो गयी है. लेकिन मानसिक प्रताड़ना बढ़ने लगी है. इसका छात्रों की मानसिकता पर गहरा असर पड़ने लगा है. उनकी पढ़ाई भी बाधितत होने लगी है. कई मामलों विभिन्न कोर्ट व बाल अधिकार संरक्षण आयोग में […]
विज्ञापन
आसनसोल : सीबीएसइ और आइसीएसइ संचालित स्कूलों में बोर्ड की क ड़ाई के बाद छात्रों की शारीरिक प्रताड़ना समाप्त हो गयी है. लेकिन मानसिक प्रताड़ना बढ़ने लगी है. इसका छात्रों की मानसिकता पर गहरा असर पड़ने लगा है. उनकी पढ़ाई भी बाधितत होने लगी है. कई मामलों विभिन्न कोर्ट व बाल अधिकार संरक्षण आयोग में जाने लगा है. इससे शैक्षणिक माहौल बिगड़ने लगा है.
उपरोक्त दो मामलों में मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा मामला कोई रजनी गुप्ता या अनिकेत का नहीं, बल्कि अधिकांश स्टूडेंट्स का यही हाल है. छात्रों को छोटी-छोटी बातों पर भी मेंटल टॉर्चर से स्कूल से गुजरना पड़ता है. किसी भी बात का विरोध करने पर स्कूल के टीचर और स्कूल प्रशासन उस स्टूडेंट्स के पीछे पड़ जाते हैं. वे स्टूडेंट्स के एकेडमिक कैरियर को भी खत्म करने से बाज नहीं आते हैं.
स्कूलों में स्टूडेंट्स के ऊपर मानसिक प्रताड़ना को लेकर तैयार की गयी सीबीएसइ की रिपोर्ट के अनुसार देश भर के स्कूलों में स्टूडेंट्स के साथ मानसिक प्रताड़ना होती है. इसकी वजह से कई बार स्टूडेंट्स सुसाइड करने की कोशिश करते हैं या कर भी लेते हैं. इस रिपोर्ट को सीबीएसइ ने देश भर के स्कूलों में किये गये सर्वे करने के बाद जारी किया है.
निर्णय को मिल रहा भारी समर्थन
सीबीएसइ के सहोदया सचिव सीबी सिंह ने कहा कि सीबीएसइ व आइसीएसइ का यह कदम काफी सराहनीय है. सही में स्कूलों में मेंटल ह्रासमेंट काफी बढ़ गया है. इससे छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है. कभी-कभी इसके चक्कर में स्टूडेंट्स एकेडमिक कैरियर भी खत्म कर लेते हैं. वे दुबारा स्कूल नहीं जाना चाहते हैं. स्कूलों पर कार्रवाई होने से ऐसे घटनाएं कम होंगी.
फिजिकल ह्रासमेंट में आयी कमी
आइसीएसइ द्वारा किये गये सर्वे के अनुसार वर्ष 2009 में शिक्षा के अधिकार कानून के खत्म हो जाने के बाद फिजिकल ह्रासमेंट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. बच्चों को मारने और पीटने की घटनाएं बंद कर दी गयीं.
इसके बाद स्कूलों की ओर से बच्चों को मेंटल ह्रासमेंट देना शुरू किया गया. रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक दूसरे स्टूडेंट्स के सामने बेइज्जती करने का मेंटल ह्रासमेंट स्टूडेंट्स को दिया जाता है. इसका बहुत ही बुरा असर बच्चों के कैरियर पर पड़ता हैं.
बच्चे स्कूल जाना बंद कर देते है. उन्हें बेइज्जती महसूस होती है. शिक्षा के अधिकार कानून के अनुसार किसी भी स्टूडेंट् को फिजिकल के साथ मेंटल ह्रासमेंट भी नहीं दिया जा सकता है.
हर पांच बच्चों में एक शिकार
सीबीएसइ के अनुसार वर्तमान में मेंटल ह्रासमेंट से हर पांच में से एक छात्र शिकार हो रहा है. इसका बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है.
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने तमाम स्कूलों को आगाह किया है कि अगर किसी भी स्कूल में स्टूडेंट्स के साथ मेंटल ह्रासमेंट किया जायेगा तो उस स्कूल प्रशासन और वहां के टीचर पर आइपीसी (इंडियन पैनल कोड) की धारा के तहत मुकदमा चलेगा. इसमें स्कूल प्रशासन और वे टीचर भी फंसेंगे, जो इस तरह के काम को अंजाम देते हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










