एफआरएस तकनीक से स्टेशन में दाखिल होते ही अपराधियों की होगी पहचान

By Prabhat Khabar Digital Desk
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  • आसनसोल और दुर्गापुर स्टेशन में इस तकनीक का कार्य आरंभ
  • दोनों स्टेशनों पर लगे 259 सीसीटीवी कैमरे के दायरे में आते ही कंट्रोल रूम में सिग्नल शुरू
  • इस्टर्न रेलवे में आसनसोल मंडल पहला, जहां होगा इस तकनीक का इस्तेमाल
  • एक हजार अपराधियों का चेहरा और डेटा अपलोड होगा
आसनसोल : आसनसोल और दुर्गापुर स्टेशन परिसर में दाखिल होने वाले अपराधियों के अच्छे दिन जल्द खत्म होने वाला है. स्टेशन में दाखिल होते ही अपराधियों की पहचान के लिए चार माह के अंदर दोनों स्टेशनों पर फेशियल रिकॉगनाइजेशन सिस्टम (एफआरइस) के तहत कार्य आरंभ हो जाएगा. इस प्रणाली में अपराधी का चेहरा सीसीटीवी कैमरा में आते ही कंट्रोल रूम में सिंगल आरम्भ हो जाएगा. जिससे रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) आसानी से अपराधी को गिरफ्तार कर सकेंगे.
इस्टर्न रेलवे में पहली बार आसनसोल मंडल अंतर्गत आसनसोल और दुर्गापुर स्टेशन पर इस प्रक्रिया का उपयोग होगा. जिसे लेकर सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन का कार्य आरंभ हो गया है. आसनसोल मंडल के वरिष्ठ सुरक्षा आयुक्त चंद्रमोहन मिश्रा ने बताया कि इस प्रक्रिया के आरम्भ होने में अधिकतम चार माह का समय लगेगा. इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है, सिर्फ सॉफ्टवेयर इंस्टाल होते ही कार्य आरंभ हो जाएगा.
रेलवे ने बढ़ते अपराधों पर रोक लगाने के लिए इंट्रीग्रेटेड सिक्युरिटी सिस्टम (आईएसएस) के तहत इस्टर्न रेलवे के आसनसोल रेल मंडल में दो स्टेशनों आसनसोल और दुर्गापुर में एफआरसी आरम्भ किया जा रहा है. वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त श्री मिश्रा ने बताया कि एफआरसी में अपराधियों का चेहरा और उनके अपराध का सम्पूर्ण विवरण अपलोड होगा.
आसनसोल और दुर्गापुर स्टेशन पर कुल 259 सीसीटीवी कैमरा लगा है. वह अपराधी यदि स्टेशन परिसर में किसी भी सीसीटीवी के दायरे में आएगा तो कंट्रोल रूम के मॉनिटर में सिग्नल आरम्भ हो जाएगा. जिससे सुरक्षा कर्मी हरकत में आ जाएंगे और वह अपराधी पकड़ा जाएगा.
फिलहाल सॉफ्टवेयर में एक हजार अपराधियों का डेटा अपलोड करने का कार्य चल रहा है. रेलवे में अपराध करने वाले पांच सौ अपराधियों का डेटा अपलोड होगा. इसके अलावा राज्य पुलिस या अन्य जगहों से यदि किसी अपराधी का डेटा अपलोड करने अनुरोध आता है तो उसे भी उपलोड कर दिया जाएगा.
इस प्रक्रिया के आरम्भ हो जाने से अपराध में काफी कमी आएगी. इस प्रक्रिया का उपयोग मनमाड और भुसावल स्टेशन पर शुरू हो गया है. इस तकनीक में अपराधियों के चेहरों की मैपिंग भी की जाएगी. मैपिंग करने के बाद उनका फोटो क्लिक करते ही देश के हर स्टेशन पर पहुंच जाएगा. कहीं भी उसका कोई अपराध है तो वह डेटा भी उपलब्ध होगा.
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