बच्चों में कैंसर को लेकर रहें सावधान और जागरूक: डॉ. चौधरी

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दुर्गापुर : लायंस क्लब ऑफ दुर्गापुर की ओर से बच्चों में कैंसर को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. रविवार को क्लब परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में टाटा मेडिकल सेंटर, कोलकाता के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. कुणाल चौधरी के अलावा क्लब के अध्यक्ष संजय बाजोरिया, दीपक मुखर्जी, आर.एस. कंबो, चंदन दे, सुजीत सिकदार, रवीन्द्र […]

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दुर्गापुर : लायंस क्लब ऑफ दुर्गापुर की ओर से बच्चों में कैंसर को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. रविवार को क्लब परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में टाटा मेडिकल सेंटर, कोलकाता के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. कुणाल चौधरी के अलावा क्लब के अध्यक्ष संजय बाजोरिया, दीपक मुखर्जी, आर.एस. कंबो, चंदन दे, सुजीत सिकदार, रवीन्द्र सिंह, सुब्रत विश्वास मुख्य रूप से उपस्थित थे. इस मौके पर डॉ. चौधरी ने कहा कि आजकल बच्चों में भी कैंसर के मामले पाये जा रहें हैं.

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हालांकि इसकी संख्या बहुत कम है. इसके बाद भी सावधान रहना बेहद जरुरी है. ये रोग छः माह से 16 वर्ष की आयु के बीच बच्चों में पाया जाता है. बाल्यावस्था में जो कैंसर होता है, वह मुख्यत: ब्लड कैंसर, ब्रेन व स्पाइन ट्यूमर, न्यूरोब्लास्टोमा, विल्मस ट्यूमर, लिम्फोमा एवम रेटिनो ब्लास्टोमा आदि बाल्यावस्था में 90 प्रतिशत से अधिक कैंसर निम्न श्रेणी में पाये जाते हैं.
इनमें से ज्यादातर कैंसर ऐसे हैं कि यदि सही समय पर पता चल जाये और सही इलाज पाने से पूरी तरह से रोग से छुटकारा मिल सकता है. क्योंकि बाल्यावस्था में होने वाला कैंसर का यदि सही उपचार हो जाय तो दोबारा कैंसर होने का अंदेशा कम रहता है.
उन्होंने कहा कि बच्चों में समय रहते कैंसर को पहचानने के लिए अभिभावक को कुछ लक्षणों जैसे निरन्तर बुखार रहना, हड्डियों में दर्द रहना, शरीर में सूजन रहना, मूत्र से रक्त आना और शरीर या पेट मे गांठ के होने का ध्यान रखना आवश्यक है. इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इलाज का सर्वश्रेष्ठ मौका पहला मौका ही होता है.
पर्याप्त देखभाल के बाद भी अनावश्यक देरी, गलत परीक्षण, अधूरी सर्जरी या अपर्याप्त केमोथेरेपी से इलाज पर नकारात्मक असर पड़ता है. एक औसत सामान्य चिकित्सक या बाल चिकित्सक शायद ही किसी बच्चे में कैंसर की पहचान कर पाते हैं. बच्चों में कैंसर के लक्षणों से इस अनभिज्ञता की स्थिति को देखकर समझा जा सकता है कि इसकी पहचान देरी से क्यों होती है या फिर इसकी पहचान क्यों नहीं हो पाती है.
बच्चों मेंअधिकांश कैंसर के प्रकार का उपचार हो सकता है. यदि कैंसर का समय पर पता चल जाता है तो इस बीमारी का सही उपचार संभव है. क्लब के अध्यक्ष संजयबाजोरिया कहा कि पीडियाट्रिक कैंसर इस समय गम्भीर बीमारी के रूप में विश्व में तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए लायंस क्लब इन्टरनेशनल ने इस रोग से लोगों को बचाने के लिए इसे स्थाई कार्यक्रम के रूप में स्वीकार किया है.
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