आसनसोल : 13.5 हजार हेक्टेयर जमीन बनी दोफसली, 22 हजार हेक्टेयर जमीन को दोफसली बनाने का है लक्ष्य
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :20 Dec 2018 1:13 AM
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आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिला में सिंचाई की उचित व्यवस्था कर साढ़े तेरह हजार हेक्टेयर जमीन को दोफसली बनाने का दावा जिला प्रशासन ने किया है. आगामी दो वर्षों में 22 हजार हेक्टेयर जमीन को दोफसली बनाने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य आरंभ किया गया है. जिलाशासक शंशाक सेठी ने कहा कि जिले में कुल […]
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आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिला में सिंचाई की उचित व्यवस्था कर साढ़े तेरह हजार हेक्टेयर जमीन को दोफसली बनाने का दावा जिला प्रशासन ने किया है. आगामी दो वर्षों में 22 हजार हेक्टेयर जमीन को दोफसली बनाने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य आरंभ किया गया है.
जिलाशासक शंशाक सेठी ने कहा कि जिले में कुल 43 हजार हेक्टेयर जमीन पर साल में एक बार धान की खेती होती थी. आठ हजार हेक्टेयर जमीन में सिंचाई की सुविधा बहाल किये जाने के बाद दो बार फसल होने लगी है. जिसमें धान, दलहन, सब्जी आदि शामिल हैं. कोयलांचल में खेती सिर्फ बारिश पर ही निर्भर थी.
जिला प्रशासन ने किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित किया और एक फसली जमीन को दो फसली बनाने की कवायद शउरू की. धान कटने के बाद इस साल दो हजार हेक्टेयर जमीन पर खेसारी, ढ़ाई हजार हेक्टेयर जमीन पर मसूर दाल और पांच सौ हेक्टेयर जमीन पर चना की खेती के लिए किसानों को बीज दिये गये.
उन्होंने कहा कि एक हजार हेक्टेयर जमीन पर बांग्ला सिंचाई परियोजना के तहत अनुसेंच प्रक्रिया से जमीन को खेती योग्य बनाया जा रहा है. 43 हजार हेक्टेयर जमीन में से इस वर्ष साढ़े 13 हजार हेक्टेयर जमीन को दो फसली किया गया है . आगामी दो वर्षों में 22 हजार हेक्टेयर जमीन को दो फसली बनाने को लेकर कार्य किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि शिल्पांचल में पानी की समस्या होने के कारण किसान सिर्फ बारिश पर ही निर्भर रहते थे. जिला गठन के बाद किसानों को लगातार प्रशिक्षण देकर कम पानी में भी खेती करने का प्रशिक्षण दिया गया. खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न परियोजनाएं शुरू की गई.
मिट्टी परीक्षण के बाद दाल, सब्जी आदि की वैकल्पिक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया गया. पानी के लिए बोरिंग, तालाब, कुंआ आदि के उपयोग को लेकर किसानों की मदद की गई. जिसके तहत कुल 14 हाजर हेक्टेयर जमीन को दोफसली बनाया गया. उन्होंने कहा कि किसानों को मिट्टी का हेल्थ कार्ड दिया गया है. जिससे उन्हें पता है कि धान के साथ कौन-कौन सी फसल हो सकती है.
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