स्कूल में लंबे अंतराल के बाद बच्चों को परोसा गया मध्याह्न भोजन

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पार्षद के प्रयास से शुरू हुई परिसेवा ·आठ महीने बाद मिड डे मील पाकर बच्चे हुए उत्सािहत दुर्गापुर : शहर स्थित भारतीय हिंदी स्कूल में लंबे अंतराल के बाद मंगलवार को बच्चों को मिड डे मील परोसा गया. नये साल के दूसरे दिन काफी समय से बंद पड़े मिड डे मील परिसेवा शुरू होने से […]

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पार्षद के प्रयास से शुरू हुई परिसेवा

·आठ महीने बाद मिड डे मील पाकर बच्चे हुए उत्सािहत
दुर्गापुर : शहर स्थित भारतीय हिंदी स्कूल में लंबे अंतराल के बाद मंगलवार को बच्चों को मिड डे मील परोसा गया. नये साल के दूसरे दिन काफी समय से बंद पड़े मिड डे मील परिसेवा शुरू होने से स्कूल के बच्चे काफी उत्साहित दिखे. गौरतलब है िक पिछले साल अप्रैल महीने में स्कूल के प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र प्रसाद को मध्याह्न भोजन के चावल में हेराफेरी सहित कई आरोपों में निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद से स्कूल में मध्याह्न भोजन बंद हो गया था. इससे बच्चों को काफी परेशानी हो रही थी. बच्चों की इस परेशानी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने इसके हल के लिये लगातार प्रयास किया.
पार्षद प्रभात चटर्जी के अथक प्रयास से नये साल की शुरुआत में ही स्कूल के बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसा गया. मंगलवार को मध्याह्न भोजन के पुनःआरम्भ के मौके पर नगर नगिम के िशक्षा अधिकारी संघमित्र सेनगुप्ता के अलावा इलाके के पार्षद प्रभात चटर्जी, स्कूल प्रभारी समीर कुमार दे, स्कूल कमेटी के कल्याण गुप्ता, शिक्षक जीतेन्द्र पांडे, मनोज पांडेय, अनिल पांडे सहित कई लोग उपस्थित थे. मौके पर पार्षद प्रभात चटर्जी ने कहा कि मां-माटी-मानुष की सरकार का उद्देश्य समाज के हर क्षेत्र में विकास करना है. समाज के हर क्षेत्र के विकास पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है. शिक्षा का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. राज्य की तृणमूल सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र को बढ़ावा देने के िलये कई योजनाएं चला रखी हैं. इसका पूरा फायदा बच्चों को मिल रहा है. मौके पर शिक्षा अधिकारी ने कहा िक अधिक छात्रों के नामांकन और अधिक छात्रों की नियमित उपस्थिति के संबंध में स्कूल भागीदारी पर मध्याह्न भोजन का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है. अधिकतर बच्चे खाली पेट स्कूल पहुंचते हैं. जो बच्चे स्कूल आने से पहले भोजन करते हैं उन्हें भी दोपहर तक भूख लग आती है और वे अपना ध्यान पढ़ाई पर केन्द्रित नहीं कर पाते हैं. मध्याह्‌न भोजन बच्चों के लिये ‘पूरक पोषण’ के स्रोत और उनके स्वस्थ विकास के रूप में भी कार्य कर सकता है. मध्याह्‌न भोजन स्कूल में बच्चों के मध्य जाति व वर्ग के अवरोध को मिटाने में सहायता कर सकता है. स्कूल की भागीदारी में लैंगिक अंतराल को भी यह कार्यक्रम कम कर सकता है. यह योजना छात्रों के ज्ञानात्मक, भावात्मक और सामाजिक विकास में मदद करती है. उन्होंने कहा कि मिड डे मील को लेकर जो गतिरोध था, वह ख़त्म हो चुका है. अब इस स्कूल के बच्चों को नियमित रूप से मिड डे मील मिलेगा. स्कूल के तक़रीबन दो सौ से अधिक बच्चों ने मिड डे मील में हिस्सा लिया.
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