नीतीश सरकार के शासन में बढ़ा भ्रष्टाचार

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कोलकाता: भाजपा से गंठबंधन टूटने के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) कमजोर हुआ है. पार्टी में कार्यकर्ताओं की कमी हो गयी है. जद यू के कार्यकर्ता काम व सम्मान चाहते हैं. एमपी व एमएलए की फंड से ये लोग काम करवाते हैं और समाज में रूतबा दिखाते हैं. नौकरशाही के कारण नीतीश सरकार में भ्रष्टाचार […]

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कोलकाता: भाजपा से गंठबंधन टूटने के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) कमजोर हुआ है. पार्टी में कार्यकर्ताओं की कमी हो गयी है. जद यू के कार्यकर्ता काम व सम्मान चाहते हैं. एमपी व एमएलए की फंड से ये लोग काम करवाते हैं और समाज में रूतबा दिखाते हैं. नौकरशाही के कारण नीतीश सरकार में भ्रष्टाचार 10 गुणा बढ़ गया है. इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को कई पत्र लिख चुका हूं, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही. सीएम को समाज के अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोगों की कोई चिंता नहीं है. ये बातें मुजफ्फरपुर से जद यू के सांसद कैप्टन (रिटायर्ड) जयनारायण प्रसाद निषाद ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कहीं. वह मंगलवार की शाम को प्रभात खबर, कोलकाता के कार्यालय भी पहुंचे.

उन्होंने कहा : मैं फौजी हूं. सच कहने से डरता नहीं हूं. चाहे मेरी ही सरकार की बात क्यों न हो. महाराजगंज लोकसभा उपचुनाव में पार्टी की हार कार्यकर्ताओं की कमी के कारण हुई थी. 200 बूथों पर पार्टी के एजेंट नहीं थे. मैं नहीं चाहता था कि भाजपा के साथ गंठबंधन टूटे, क्योंकि उसके पास समर्पित कार्यकर्ताओं की फौज है. नीतीश के विकास मॉडल की चर्चा करते हुए श्री निषाद ने कहा कि मीडिया में हल्ला है कि नीतीश के नेतृत्व में बिहार का विकास हो रहा है. जमीनी स्तर पर यह सच नहीं है. मैं मुजफ्फरपुर से लोकसभा का सांसद हूं, मेरे सांसद कोटे के छह करोड़ पड़े हैं. अगर यह खर्च होता, तो पांच करोड़ रुपये और मिलते. दुर्भाग्य है कि एमपी फंड का इस्तेमाल सांसद अपनी इच्छा से नहीं कर सकता. यह पार्टी के मुखिया व सरकार तय करती है. उन्होंने कहा : जदयू से मेरा मोहभंग नहीं हो रहा है, लेकिन नीतीश की कार्यशैली से खुश नहीं हूं.

वह बिहार के भरोसे पीएम नहीं बन सकते हैं. उन्होंने एक शेर उद्धृत करते हुए कहा : बेवफा को बा वफा कैसे कहूं, जिसे एक बार अच्छा कह दिया, उसे बुरा कैसे कहूं. क्या वह फिर पार्टी बदल सकते हैं, तो उन्होंने कहा : सीएम को एमपी से मिलने का समय नहीं है. मैं नीतीश से बार-बार मिलने की कोशिश करता हूं, लेकिन मुङो भी समय नहीं देते.

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