जब मासूमों ने डीएम को लिखी 'गोपनीय चिट्ठी'... और बेनकाब हो गया 14 लाख का मिड-डे-मील घोटाला!

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बलिया में 14 लाख का मिड-डे-मील घोटाला (AI GENERATED)

UP News: बच्चों द्वारा जिलाधिकारी को लिखी गुप्त चिट्ठी ने बलिया के ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज में हुए 14 लाख रुपये के मिड-डे-मील घोटाले का पर्दाफाश कर दिया। रसोईघर बंद, सामग्री गायब, और दस्तावेजों में हेरफेर की बात सामने आई है।

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UP News: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले स्थित बांसडीह ब्लॉक के ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज में बच्चों के लिए दिए जाने वाले मिड-डे-मील भोजन में भारी अनियमिता सामने आई है. वित्तीय वर्ष 2024-25 से लेकर 2026-27 के मध्य बिना भोजन बांटे लगभग 14 लाख रुपये का घोटाला किया गया. इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब विद्यालय के मासूम विद्यार्थियों ने स्वयं जिलाधिकारी को एक गोपनीय पत्र लिखकर अपनी समस्या बताई. इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया गया.

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औचक निरीक्षण में ठप मिला रसोईघर, यू-डायस डेटा में अंतर

जिला विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रशासनिक टीम के साथ विद्यालय का अचानक औचक निरीक्षण किया. जांच के दौरान विद्यालय में मिड-डे-मील योजना का भौतिक संचालन पूरी तरह से बंद पाया गया। रसोईघर में गैस सिलिंडर, राशन सामग्री तथा बर्तन गायब थे, केवल एक पहसुल मिला और रसोइयां अनुपस्थित पाई गईं. निरीक्षण टीम ने पाया कि यू-डायस पोर्टल, आइवीआरएस कॉल डेटा और भौतिक उपस्थिति पंजिका के आंकड़ों में अत्यधिक अंतर था, जिससे धोखाधड़ी की पुष्टि हुई.

अधिकारियों की मिलीभगत और फाइलों पर फर्जी हस्ताक्षर का भंडाफोड़

जांच में खुलासा हुआ कि जिला समन्वयक एमडीएम को विद्यालय में भोजन न पकने की पूरी जानकारी पहले से थी. इसके बावजूद उन्होंने निरंतर कागजों और फाइलों पर हस्ताक्षर करके धनराशि स्वीकृत करवाई और बीएसए कार्यालय से अवैध भुगतान जारी रखा. हाल ही में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी तथा बीएसए ने भी दो वर्षों तक स्थल पर जाकर योजना की जमीनी पड़ताल नहीं की. इस लापरवाही और प्रशासनिक ढिलाई के कारण लाखों रुपये का यह फर्जीवाड़ा बिना रुकावट के चलता रहा.

13.71 लाख की रिकवरी का आदेश, दोषियों पर होगी एफआईआर

प्रशासनिक जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद जब जिला समन्वयक से वित्तीय खर्च का विवरण मांगा गया, तो उन्होंने दो दिनों तक टालमटोल की. अंततः जिलाधिकारी के सख्त रुख के बाद जब संपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत हुए, तब 13,71,573 रुपये के फर्जीवाड़े का पता चला. जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने प्रधानाचार्य चंद्रशेखर पांडेय और जिला समन्वयक अजीत पाठक को मुख्य दोषी पाया है. डीएम ने पूरी राशि की तत्काल रिकवरी करने तथा सुसंगत कानूनी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं.

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