योगी सरकार ने एक झटके में 4 तहसीलदार और 1 नायब तहसीलदार को किया सस्पेंड, बलिया-प्रतापगढ़ समेत इन तहसीलों में फाइलें अटकाना पड़ेगा भारी

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योगी आदित्यनाथ

UP Tehsildar Suspension: उत्तर प्रदेश में राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है. लापरवाही पाए जाने पर 4 तहसीलदार और 1 नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई लंबित वादों के त्वरित निस्तारण का संकेत देती है.

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UP Tehsildar Suspension: उत्तर प्रदेश में राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा के बाद राजस्व परिषद ने मामलों के निस्तारण में लापरवाही और धीमी गति के आरोप में चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है. इन सभी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. सरकार ने साफ संकेत दिया है कि लंबित राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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सीएम योगी की समीक्षा के बाद हुई कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी. इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि राजस्व मामलों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखना स्वीकार नहीं किया जाएगा. समीक्षा के बाद राजस्व परिषद ने न्यायालयवार और अधिकारीवार मामलों की स्थिति की विस्तृत जांच कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की.

धारा-34 के मामलों की हुई गहन समीक्षा

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की समीक्षा की गई. इसमें सिर्फ जिले या तहसील स्तर पर मामलों की संख्या नहीं देखी गई, बल्कि प्रत्येक न्यायालय और संबंधित अधिकारी के स्तर पर लंबित मामलों की स्थिति का आकलन किया गया. समीक्षा में कुछ अधिकारियों के यहां मामलों के निस्तारण की गति संतोषजनक नहीं पाई गई, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई.

इन 5 अधिकारियों पर गिरी गाज

कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों में तहसीलदार पवन कुमार सिंह शामिल हैं, जो प्रतापगढ़ की पट्टी तहसील में तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार रहे हैं और वर्तमान में प्रयागराज में तहसीलदार हैं. इसके अलावा तहसीलदार अतुल हर्ष (तहसील बलिया), तहसीलदार हरेराम यादव (धनघटा में तत्कालीन नायब तहसीलदार और वर्तमान में गोंडा में तहसीलदार) और तहसीलदार आनंद ओझा (तहसील खलीलाबाद, संतकबीरनगर) को भी निलंबित किया गया है. वहीं नायब तहसीलदार विवेक कुमार सिंह, तहसील सरोजनीनगर, लखनऊ पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई है.

निलंबन के साथ अनुशासनिक जांच भी शुरू

राजस्व परिषद ने इन पांचों अधिकारियों के खिलाफ निलंबन के साथ-साथ नियमानुसार अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित मामलों के लंबित रहने की वजह क्या रही और निस्तारण की गति अपेक्षा के मुताबिक क्यों नहीं रही. साथ ही अधिकारियों की जिम्मेदारी और लापरवाही के बिंदुओं की भी पड़ताल होगी. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

किसानों और आम लोगों से सीधे जुड़े हैं राजस्व विवाद

राजस्व न्यायालयों में लंबित मामले जमीन, नामांतरण और अन्य राजस्व विवादों से जुड़े होते हैं. ऐसे मामलों का सीधा असर किसानों, जमीन मालिकों और आम लोगों पर पड़ता है. जमीन से जुड़ा विवाद लंबे समय तक लंबित रहने पर संबंधित व्यक्ति को खेती, जमीन के इस्तेमाल और संपत्ति से जुड़े मामलों में परेशानी उठानी पड़ सकती है. इसी वजह से सरकार अब राजस्व वादों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर दे रही है. कार्रवाई के जरिए राजस्व विभाग में जवाबदेही तय करने और लोगों को समय पर राहत देने का संदेश दिया गया है.

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