UP Swine Flu Alert: 364 केस और लखनऊ में पहली मौत से मचा हड़कंप, अस्पतालों में शुरू हुई आइसोलेशन वार्ड और इलाज की तैयारी

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364 केस और लखनऊ में पहली मौत के बाद योगी सरकार अलर्ट (AI)

UP News: उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, 364 केस सामने आ चुके हैं और लखनऊ में पहली मौत की पुष्टि हुई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं.

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UP News: उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 इन्फ्लुएंजा को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है. प्रदेश में 25 अगस्त तक स्वाइन फ्लू के 364 मामले सामने आ चुके थे. इसी बीच राजधानी लखनऊ में स्वाइन फ्लू से पहली मौत की पुष्टि के बाद योगी सरकार ने पूरे प्रदेश में सतर्कता और बढ़ा दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग, जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब सवाल सिर्फ बीमारी के बढ़ते मामलों का नहीं, बल्कि यह भी है कि अगर H1N1 का संक्रमण तेजी से फैलता है तो यूपी के अस्पताल कितने तैयार हैं?

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364 केस के बाद बढ़ी निगरानी

स्वास्थ्य विभाग ने 25 अगस्त तक प्रदेश में 364 स्वाइन फ्लू मामलों की जानकारी दी थी. इसके बाद भी संक्रमण को लेकर निगरानी जारी है. प्रदेश के सभी 75 जिलों के अस्पतालों को संदिग्ध मामलों की पहचान और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी में विशेष रूप से गंभीर श्वसन संक्रमण यानी SARI वाले मरीजों तथा खांसी जैसे लक्षण वाले मरीजों पर नजर रखने को कहा गया है. इसका मतलब साफ है कि अब अस्पतालों में सिर्फ स्वाइन फ्लू की पुष्टि वाले मरीज ही नहीं, बल्कि संदिग्ध मरीजों की पहचान और ट्रैकिंग पर भी जोर दिया जा रहा है.

लखनऊ में पहली मौत ने बढ़ाई चिंता

राजधानी लखनऊ में एक महिला की स्वाइन फ्लू से मौत की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने परिवार और संपर्क में आए लोगों की निगरानी शुरू की. महिला की ट्रैवल हिस्ट्री और संक्रमण से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है. परिवार के सदस्यों को एहतियात बरतने और जरूरत के अनुसार अलग रहने की सलाह दी गई है. इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को और ज्यादा सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं.

योगी सरकार की अस्पतालों को बड़ी तैयारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने, आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने और जांच किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. साथ ही मरीजों के तत्काल उपचार के लिए जरूरी चिकित्सकीय व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है. जिलाधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में स्थिति की नियमित समीक्षा करने के साथ किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी तत्काल शासन को देने के निर्देश दिए गए हैं.

सरकार की तैयारी को ऐसे समझिए

आइसोलेशन वार्ड — संदिग्ध/पुष्ट मरीजों के लिए अलग व्यवस्था.

जांच किट — जरूरत पड़ने पर समय से जांच की व्यवस्था.

दवाओं का स्टॉक — मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने पर जोर.

निगरानी — जिलों में मामलों की नियमित समीक्षा.

SARI मरीजों पर नजर — गंभीर श्वसन संक्रमण वाले मरीजों की पहचान.

रिपोर्टिंग — स्थिति में बदलाव होने पर शासन को तत्काल सूचना.

लेकिन सरकारी तैयारी पर उठ रहे सवाल भी कम नहीं

एक तरफ सरकार अस्पतालों को तैयार रखने के निर्देश दे रही है, दूसरी तरफ कुछ जिलों में सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधाओं को लेकर सवाल सामने आए हैं.

25 अगस्त की एक ग्राउंड रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के कुछ प्रमुख अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के नमूने तक लेने की व्यवस्था को लेकर कमी का दावा किया गया था.

यानी कागज पर अलर्ट और जमीन पर तैयारी—इन दोनों के बीच कितना अंतर है, इसकी असली परीक्षा अब अस्पतालों में होगी.

नोएडा में बढ़ते केस ने बढ़ाई चिंता

दिल्ली-NCR में H1N1 संक्रमण तेजी से चर्चा में है. नोएडा में भी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी की रिपोर्ट सामने आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक नोएडा में मामले बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की और मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड सुरक्षित किए गए. गाजियाबाद में भी पिछले दिनों नए मामलों की पुष्टि हुई और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को मास्क तथा संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी. यह स्थिति उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों के लिए भी चेतावनी है कि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर पहचानना और मरीज को समय पर इलाज देना सबसे अहम होगा.

कानपुर में भी तैयारी तेज

कानपुर में H1N1 को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बेड आरक्षित किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पांच-पांच बेड सुरक्षित रखने तथा एलएलआर अस्पताल में 30 बेड का विशेष वार्ड तैयार रखने की व्यवस्था की गई है. यानी पश्चिमी यूपी से लेकर मध्य और पूर्वी यूपी तक स्वास्थ्य विभाग अब संभावित संक्रमण को लेकर तैयारी मजबूत कर रहा है.

स्वाइन फ्लू के कौन से लक्षण खतरनाक?

स्वाइन फ्लू में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं. अगर बीमारी के साथ सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार या हालत तेजी से बिगड़ने जैसे संकेत हों तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने भी संभावित लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर जांच व उपचार कराने की अपील की है.

घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत

स्वाइन फ्लू को लेकर डर का माहौल बनाने के बजाय सावधानी जरूरी है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद से जुड़े विशेषज्ञों ने वर्तमान H1N1 संक्रमण को लेकर किसी नए स्ट्रेन की बात से इनकार किया है और इसे मौसमी संक्रमण के रूप में बताया है.

इसलिए फिलहाल सबसे जरूरी है—

लक्षणों को नजरअंदाज न करें.

भीड़भाड़ में सावधानी बरतें.

खांसते-छींकते समय मुंह और नाक ढकें.

हाथों की स्वच्छता रखें.

लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें.

बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लें.

अब असली परीक्षा स्वास्थ्य विभाग की

364 मामलों और लखनऊ में पहली मौत के बाद सरकार ने अलर्ट बढ़ा दिया है. अस्पतालों को आइसोलेशन वार्ड, दवाएं और जांच किट तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं. लेकिन असली सवाल अब यही है कि क्या ये तैयारियां हर जिले में जमीन पर भी उतनी ही मजबूत हैं जितनी सरकारी निर्देशों में दिखाई दे रही हैं? क्योंकि H1N1 से लड़ाई में सिर्फ आदेश जारी करना काफी नहीं है. जांच समय पर हो, रिपोर्ट जल्दी मिले, दवा उपलब्ध हो और गंभीर मरीज को तत्काल इलाज मिले—यही यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था की असली परीक्षा होगी.

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