हर बच्चे को पढ़नी चाहिए पीएम मोदी की ‘एग्जाम वॉरियर्स’ सीएम योगी युवाओं से बोले- अपना बुक बैंक बनाएं

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CM योगी आदित्यनाथ

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ पुस्तक महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक 'एग्जाम वॉरियर्स' को सभी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि ज्ञान को विरासत से जोड़कर बढ़ाना चाहिए.

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Yogi Adityanath Speech: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर बच्चे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ जरूर पढ़नी और आत्मसात करनी चाहिए. यह कहना अन्याय होगा कि आज का युवा किताबें नहीं पढ़ता. जरूरत सिर्फ इतनी है कि किताबों को युवाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान को संकुचित दायरे में सीमित करने के दुष्परिणाम समाज और राष्ट्र दोनों को भुगतने पड़ते हैं. उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विरासत से जुड़कर ही ज्ञान का विस्तार संभव है.

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बच्चों को बांटी ‘एग्जाम वॉरियर्स’

मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित पांचवें गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 का शुभारंभ करने के बाद युवाओं को संबोधित कर रहे थे. इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ वितरित की. पुस्तक पाने वाले बच्चों के चेहरे खिल उठे. मुख्यमंत्री ने छात्राओं के साथ तस्वीर भी खिंचवाई.

हर युवा के लिए उपयोगी पुस्तक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘एग्जाम वॉरियर्स’ सिर्फ स्कूली छात्रों के लिए नहीं, बल्कि हर युवा और नागरिक के लिए उपयोगी है. जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी परीक्षा से गुजरना पड़ता है. कभी डिग्री के लिए, कभी सर्टिफिकेट कोर्स के लिए और कभी जीवन की विषम परिस्थितियों में. मुश्किल समय में जब व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगता है, तब यह पुस्तक संबल और मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकती है.

युवा किताब नहीं पढ़ता कहना अन्याय

सीएम योगी ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि युवा पुस्तकों से दूर हो गया है और सोशल मीडिया पर अपना समय बर्बाद कर रहा है. ऐसा कहना युवाओं के साथ अन्याय होगा. असल जरूरत पुस्तकों को युवाओं तक पहुंचाने की है. उन्होंने बताया कि जब पहली बार युवराज मलिक ने लखनऊ में पुस्तक महोत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था, तब उन्होंने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से इस संबंध में चर्चा की थी और इसे प्रोत्साहित करने की बात कही थी.

गोरखपुर में भी मिला अच्छा परिणाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव का अच्छा परिणाम सामने आया तो गोरखपुर में भी इसे आयोजित करने का सुझाव दिया गया. वहां लखनऊ से भी ज्यादा लोग पहुंचे और अधिक पुस्तकों की बिक्री हुई, इससे यह धारणा गलत साबित हुई कि आज का युवा किताबें नहीं पढ़ता.

विरासत से दूरी के दुष्परिणाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति की तरह समाज और राष्ट्र भी तब बीमार होता है, जब उसकी क्षमता समाप्त होने लगती है और वह अपनी विरासत से दूरी बनाने लगता है. भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पहले संकुचित दायरे में बांधने का प्रयास किया गया, जिसके दुष्परिणाम समाज को भुगतने पड़े.

यूपी रहा ज्ञान परंपरा का केंद्र

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में ऋषियों ने चिंतन और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया. काशी ज्ञान और संवाद की भूमि रही है. वहीं मुजफ्फरनगर स्थित शुक्रतीर्थ से करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा जुड़ी है.

ज्ञान-विचारों के आदान-प्रदान का मंच

सीएम योगी ने कहा कि पुस्तक महोत्सव युवाओं, छात्रों, लेखकों और प्रकाशकों को एक मंच उपलब्ध कराता है. यहां युवा ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों को देख और उनके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. नौ दिनों तक चलने वाले गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 में पुस्तकों के विमोचन के साथ लेखकों से संवाद और उनकी रचनात्मक यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा.

ज्ञान के रास्ते खुले रखें

मुख्यमंत्री ने भारतीय ऋषि परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान को सीमित नहीं किया जाना चाहिए. हमारी परंपरा चारों दिशाओं से ज्ञान के आने के लिए द्वार खुले रखने की पक्षधर रही है. केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम पढ़ लेना ही व्यक्ति को पूर्ण रूप से ज्ञानवान नहीं बनाता. समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों से परिचित होना जरूरी है.

पीढ़ियों से आगे बढ़ी ज्ञान परंपरा

सीएम योगी ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा श्रुति और स्मृति से आगे बढ़कर शास्त्रों, पांडुलिपियों, ताम्रपत्रों और विभिन्न अभिलेखों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ी है. लखनऊ साहित्य की पुरानी भूमि है और यहां से अनेक साहित्यकारों ने अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से देश और समाज को दिशा दी है.

डिजिटल युग में गांव-शहर की दूरी कम

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल युग ने गांव और शहर के बीच की दूरी कम करने का काम किया है. ग्राम सचिवालयों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले ग्राम प्रधान गांव की व्यवस्था अपने घर से संचालित करता था. सरकार ने ग्राम सचिवालय की व्यवस्था विकसित की और वहां केवल ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की व्यवस्था नहीं की, बल्कि ग्रामीणों के लिए कॉन्फ्रेंस रूम और डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई.

57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है. इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध करायी गयी हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों ने युवाओं और ग्रामीणों को प्लेटफार्म उपलब्ध नहीं कराया. इसके बावजूद प्रतिभा का पर्याप्त उपयोग नहीं होने के लिए युवाओं के बारे में गलत शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था. सुविधा मिलने के बाद वही युवा और ग्रामीण अपनी क्षमता का बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं.

जर्जर स्कूलों की बदली तस्वीर

मुख्यमंत्री ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पहले स्कूलों के भवन और व्यवस्थाएं जर्जर नजर आती थीं, जब सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम का जर्जर होना स्वाभाविक था. प्रदेश में ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से स्कूलों की तस्वीर बदली गई. भवनों का निर्माण हुआ और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध करायी गयीं.

चित्रकूट की छात्रा का दिया उदाहरण

चित्रकूट का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह वहां गए थे तो स्थिति बेहद खराब थी. एक वर्ष बाद दोबारा पहुंचने पर एक विद्यालय की तीसरी कक्षा की छात्रा ने डिजिटल लाइब्रेरी संचालित करके दिखाई और पाठ्यक्रम से संबंधित सामग्री भी प्रदर्शित की. पहले सुविधा नहीं थी, इसलिए बच्ची अपनी क्षमता प्रदर्शित नहीं कर पाती थी. सुविधा मिलने के बाद वही बच्ची आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा दिखा रही थी.

युवाओं से बुक बैंक बनाने की अपील

मुख्यमंत्री ने युवाओं से जरूरत के अनुसार किताबें खरीदने और पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की. उन्होंने कहा कि पुस्तक खरीदते समय पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ रचनात्मकता और सकारात्मक सोच विकसित करने वाली पुस्तकों को भी प्राथमिकता दें. अच्छी साहित्यिक कृति, धार्मिक ग्रंथ, किसी महापुरुष की आत्मकथा या वैज्ञानिक के शोध से जुड़ी पुस्तक व्यक्ति को जीवनभर प्रेरित कर सकती है.

किताबें जीवन को दे सकती हैं नई दिशा

सीएम योगी ने युवाओं से अपना ‘बुक बैंक’ बनाने की अपील करते हुए कहा कि खाली समय में पुस्तक पढ़ने की आदत जीवन को नई दिशा दे सकती है. कोई भी मंजिल कठिन नहीं है. युवाओं को अपनी राह स्वयं तैयार करनी है और पुस्तक मेले इस राह को बनाने में महत्वपूर्ण प्लेटफार्म साबित हो सकते हैं.

नेशनल बुक ट्रस्ट की सबसे बड़ी खरीदार यूपी सरकार

मुख्यमंत्री ने गोमती पुस्तक महोत्सव के आयोजन के लिए आयोजकों, नेशनल बुक ट्रस्ट और सहयोगी संस्थाओं का आभार जताया. उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले को केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों तक भी इसका विस्तार किया जाना चाहिए. उत्तर प्रदेश सरकार इसके लिए पूरा सहयोग करेगी.

गांवों से विश्वविद्यालयों तक पुस्तकालय

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकों की सबसे बड़ी खरीदार है. गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है. यह आज की आवश्यकता है और ज्ञान की इस परंपरा को और व्यापक बनाने की जरूरत है.

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद मराठे ने मुख्यमंत्री को शॉल ओढ़ाकर और पुस्तक भेंट कर स्वागत किया. गोमती पुस्तक महोत्सव के पिछले संस्करणों की यात्रा और यादगार पलों पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई. समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, निदेशक युवराज मलिक समेत लेखक, प्रकाशक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे.

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