UP Election 2027: श्रीराम के बाद अब श्रीकृष्ण की शरण में CM योगी, क्या मथुरा से होगी जीत की हैट्रिक का सियासी प्लान

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श्रीराम के बाद अब श्रीकृष्ण की शरण में CM योगी

UP Politics: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्माष्टमी पर मथुरा दौरा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की नई बिसात बिछा रहा है. करोड़ों की विकास परियोजनाओं के साथ, यह दौरा आस्था और राजनीतिक दांव-पेंच का संगम है.

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UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा दौरा राजनीतिक रूप से खास माना जा रहा है. भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर उनका दो दिनों तक प्रवास और लगातार धार्मिक मुद्दों को लेकर दिए जा रहे संदेशों ने सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है. सीएम योगी का यह दौरा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे विकास और चुनावी रणनीति के बड़े संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है.

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मथुरा को 1051 करोड़ की सौगात, विकास योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास

अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री मथुरा को करीब 1051 करोड़ रुपये की 229 विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे. इनमें 540 करोड़ रुपये से अधिक की 62 परियोजनाओं का लोकार्पण और करीब 437 करोड़ रुपये की 167 नई परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है. इसके साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता राशि, चेक, प्रमाण पत्र और अन्य लाभ भी दिए जाएंगे.

आवास से लेकर आधुनिक सभागार तक कई बड़ी परियोजनाएं

सीएम योगी पीएम आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को 72 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि वितरित करेंगे. इसके अलावा करीब 42 करोड़ रुपये की लागत से बने श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का भी लोकार्पण किया जाएगा. आधुनिक सुविधाओं से लैस इस सभागार में बड़ी संख्या में लोगों के बैठने की व्यवस्था है. सरकार मथुरा में धार्मिक पर्यटन के साथ बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को भी तेजी देने का संदेश दे रही है.

श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा क्यों बना सियासी चर्चा का केंद्र

सीएम योगी पिछले कुछ समय से अपने भाषणों में मथुरा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख लगातार कर रहे हैं. उन्होंने विपक्षी दलों से भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी है. ऐसे में जन्माष्टमी के अवसर पर उनका मथुरा दौरा राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है. समर्थक इसे आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों की ओर से इस पर राजनीतिक सवाल भी उठाए जा सकते हैं.

2017 और 2022 के बाद अब 2027 की नई चुनावी बिसात

उत्तर प्रदेश में 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान अयोध्या और राम मंदिर का मुद्दा भाजपा की राजनीति के प्रमुख केंद्रों में रहा. दोनों चुनावों में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी. अब 2027 का चुनाव सामने है और ऐसे में मथुरा तथा श्रीकृष्ण से जुड़े मुद्दों की बढ़ती चर्चा को नई चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.

राम से कृष्ण तक, क्या 2027 के लिए तैयार हो रही नई रणनीति

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि क्या 2027 के चुनाव से पहले भाजपा मथुरा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी बड़े राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाएगी. CM योगी का दो दिवसीय मथुरा दौरा इसी कारण महत्वपूर्ण हो गया है. एक तरफ सरकार करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का संदेश दे रही है, तो दूसरी ओर आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर भी राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है.

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