UP की कहानी अब Gen-Z की जुबानी! 60 सेकंड की Reel में दिखाएंगे अपने शहर की अनकही पहचान
60 सेकंड की रील में दिखेगी यूपी की अनकही पहचान
UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं के लिए 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' अभियान शुरू किया है. इस पहल के तहत Gen-Z और अन्य युवा अपने शहरों की संस्कृति, विरासत और स्थानीय पहचान को 60 सेकंड की रील के माध्यम से दुनिया के सामने रख सकेंगे.
UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को अपने शहर की संस्कृति, विरासत और स्थानीय पहचान से जोड़ने के लिए ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान शुरू किया है. पर्यटन विभाग की इस पहल के तहत Gen-Z समेत अन्य युवा अपने शहर की अनकही कहानियां, स्थानीय खान-पान, परंपराएं, हस्तशिल्प और कम चर्चित पर्यटन स्थलों को अधिकतम 60 सेकंड की रील के जरिए देश-दुनिया के सामने रख सकेंगे. इस पहल का मकसद स्थानीय लोगों की आवाज और अनुभव के जरिए उत्तर प्रदेश की पर्यटन पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है.
अपने शहर की कहानी बताएंगे युवा
‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान के जरिए स्थानीय निवासियों को अपने शहर की खास पहचान और उससे जुड़ी कहानियां बताने का मौका मिलेगा. इसमें शहर की ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय व्यंजन, पुरानी परंपराएं, हस्तशिल्प और ऐसे स्थल शामिल किए जा सकते हैं, जो अभी पर्यटकों के बीच ज्यादा चर्चित नहीं हैं. युवा खुद कैमरे के सामने आकर अपने अनुभव और अपने अंदाज में शहर की कहानी बताएंगे.
60 सेकंड की रील में बतानी होगी कहानी
अभियान में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को अधिकतम 60 सेकंड की रील तैयार करनी होगी. वीडियो में प्रतिभागी का खुद कैमरे के सामने आना जरूरी होगा और उनका चेहरा स्पष्ट दिखाई देने के साथ आवाज भी साफ सुनाई देनी चाहिए. रील की शूटिंग खुले स्थान पर करनी होगी, जिसकी पृष्ठभूमि में शहर का कोई प्रमुख पर्यटन स्थल या उसकी पहचान से जुड़ी जगह दिखाई दे. प्रतिभागी हिंदी या अंग्रेजी में रील बना सकते हैं. वीडियो के अंत में ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ कहना अनिवार्य होगा.
Gen-Z बनेगा शहर का सांस्कृतिक दूत
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है. प्रदेश के हर जिले, शहर और गांव की अपनी अलग कहानी और पहचान है. उन्होंने कहा कि ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के जरिए Gen-Z समेत अन्य युवाओं को अपने-अपने शहरों का सांस्कृतिक दूत बनाने की पहल की जा रही है. युवा अपनी आवाज और शब्दों में अपने शहर की खासियत दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे.
कम चर्चित पर्यटन स्थलों को मिलेगी पहचान
अपर मुख्य सचिव, पर्यटन अमृत अभिजात ने कहा कि 60 सेकंड की एक रील के जरिए किसी स्थान की विशेषता, स्थानीय अनुभव और व्यक्ति की अपनी आवाज को प्रभावी ढंग से एक साथ प्रस्तुत किया जा सकता है. इससे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को नए नजरिए से देखने का अवसर मिलेगा और कम चर्चित जगहों को भी व्यापक पहचान मिल सकती है. अभियान के तहत लखनऊ के युवा खान-पान, चिकनकारी, पुराने मोहल्लों और सांस्कृतिक स्थलों के बारे में बता सकते हैं. इसी तरह ब्रज, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के युवा अपने इलाकों की परंपराओं, स्थानीय विशेषताओं और पर्यटन अनुभवों को रील के माध्यम से सामने ला सकते हैं.
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