यूपी के इस गांव में जन्मे थे नीम करौली बाबा, 11 साल की उम्र में हुई थी शादी, जानिए उनका असली नाम और परिवार
नीम करोली बाबा
देश-विदेश में पूजे जाने वाले नीम करौली बाबा की जिंदगी के अनजाने पहलुओं को जानें. उनके असली नाम, परिवार और कैंची धाम की स्थापना के पीछे की कहानी समझें.
Neem Karoli Baba Life Story : नीम करौली बाबा का नाम देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी श्रद्धा के साथ लिया जाता है. बाबा नीम करौली की जिंदगी और उनकी आध्यात्मिक शक्तियों पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर चर्चा में है. फिल्म में अभिनेता शोभिनव सत्या ने बाबा नीम करौली का किरदार निभाया है. फिल्म की लोकप्रियता के बीच लोग बाबा के जीवन, उनके असली नाम, परिवार और उनके आश्रमों के बारे में जानने में दिलचस्पी ले रहे हैं.
क्या था नीम करौली बाबा का असली नाम?
नीम करौली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में करीब 1900 के आसपास हुआ था. बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म की ओर बताया जाता है. कहा जाता है कि महज 11 साल की उम्र में उनकी शादी राम बेटी देवी से हो गई थी. इसके बावजूद उनका मन सांसारिक जीवन में ज्यादा नहीं लगा और आगे चलकर उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया.
17 साल की उम्र में प्राप्त हुआ ज्ञान
बाबा नीम करौली के जीवन से जुड़ी कई कथाएं आज भी उनके भक्तों के बीच प्रचलित हैं. मान्यता है कि करीब 17 साल की उम्र में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. बाद में उन्होंने साधु जीवन अपनाने के लिए घर छोड़ दिया. हालांकि, परिवार और पिता के आग्रह पर वह कुछ समय बाद वापस अपने वैवाहिक जीवन में लौट आए. उनके जीवन को लेकर कई ऐसी घटनाएं भी बतायी जाती हैं, जिन्हें भक्त उनकी आध्यात्मिक शक्ति और चमत्कार से जोड़कर देखते हैं.
40 साल तक गांव के निर्विरोध प्रधान रहे बाबा
नीम करौली बाबा के बारे में एक दिलचस्प बात यह भी बतायी जाती है कि वह अपने गांव में करीब 40 वर्षों तक निर्विरोध ग्राम प्रधान रहे. साधारण जीवन जीने वाले बाबा बाद में आध्यात्मिक गुरु के रूप में प्रसिद्ध होते चले गये. उनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गयी और उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गयी.
'नीम करौली' नाम कैसे पड़ा?
बाबा के नाम से जुड़ी सबसे चर्चित कहानियों में से एक नीब करौरी गांव की ट्रेन वाली घटना है. बताया जाता है कि एक बार बाबा ट्रेन में सवार हुए, लेकिन टिकट नहीं होने के कारण उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया. इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी. मान्यता है कि बाबा को वापस ट्रेन में बैठाने के बाद ट्रेन चल पड़ी. हालांकि इस घटना के अलग-अलग संस्करण प्रचलित हैं. इसी घटना के बाद उनका नाम नीब करौरी बाबा के रूप में प्रसिद्ध होने की बात कही जाती है. नीम करौरी गांव फर्रुखाबाद क्षेत्र में बताया जाता है. इसी इलाके में बाबा से जुड़ा आश्रम भी है. कहा जाता है कि नीम के पेड़ों के पास बाबा ने तपस्या की और वहां गुफाएं भी बनायी थीं. इसी वजह से आगे चलकर उन्हें नीम करौली बाबा के नाम से जाना जाने लगा.
1964 में बनाया कैंची धाम
नीम करौली बाबा का सबसे प्रसिद्ध आश्रम कैंची धाम है. वर्ष 1964 में उन्होंने नैनीताल जिले के भवाली के पास क्षिप्रा नदी के किनारे कैंची धाम की स्थापना की थी. यहां हनुमान मंदिर भी बनवाया गया. आज कैंची धाम देश-विदेश में बाबा के भक्तों के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बन चुका है. हर साल 15 जून को कैंची धाम स्थापना दिवस मनाया जाता है. इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और मेले का आयोजन होता है. भक्तों के बीच मालपुआ का प्रसाद भी वितरित किया जाता है.
स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक पहुंचे बाबा के दरबार
कैंची धाम की प्रसिद्धि भारत तक सीमित नहीं है. दुनिया की कई जानी-मानी हस्तियां भी बाबा नीम करौली से प्रभावित रही हैं. एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स, मेटा के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली का नाम भी बाबा और कैंची धाम से जुड़ी चर्चाओं में आता है. बाबा के अनुयायियों का मानना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में 100 से अधिक मंदिरों का निर्माण कराया.
बाबा के परिवार में कौन-कौन है?
नीम करौली बाबा के परिवार में दो बेटे और एक बेटी होने की जानकारी सामने आती है. उनके बड़े बेटे का नाम अनेग सिंह शर्मा, जबकि छोटे बेटे का नाम धर्म नारायण शर्मा बताया जाता है. उनकी बेटी गिरिजा भाटेले आगरा में रहती हैं. बड़े बेटे अनेग सिंह शर्मा प्रचार-प्रसार से दूर रहे और सादा जीवन जीते रहे. नवंबर 2021 में उनका निधन हो गया था. वहीं छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा वन विभाग में रेंजर के पद पर रहे. वह वृंदावन में रहते थे और अप्रैल 2021 में उनका निधन हुआ. धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियां बतायी जाती हैं.
डॉक्टर हैं बाबा के पौत्र
नीम करौली बाबा के पौत्र धनंजय शर्मा, अनेग सिंह शर्मा के बेटे हैं. पेशे से डॉक्टर रहे धनंजय शर्मा भोपाल में रहते हैं और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं. बाबा के परिवार के सदस्य आज भी उनके जीवन और विरासत से जुड़े कई पहलुओं को संभाल रहे हैं.
निधन के बाद भी जारी है बाबा की लोकप्रियता
नीम करौली बाबा 11 सितंबर 1973 की रात करीब 1:15 बजे वृंदावन में ब्रह्मलीन हुए थे. उनके निधन के कई दशक बाद भी देश-विदेश में उनके भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती रही है. आज भारत समेत कई देशों में बाबा के आश्रम और मंदिर हैं. कैंची धाम समेत उनके प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.
संपत्ति को लेकर विवाद भी आया सामने
जहां एक ओर बाबा नीम करौली की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, वहीं उनके परिवार की संपत्ति को लेकर विवाद भी सामने आया है. बताया गया है कि बाबा के छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों ने फिरोजाबाद के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर आरोप लगाया कि परिवार का घर और मंदिर ट्रस्ट को दान नहीं किया गया था. इसके बावजूद ट्रस्ट की ओर से संपत्ति पर कब्जा किया जा रहा है. परिवार की ओर से ट्रस्ट के संचालन को अपने हाथ में लेने की मांग भी की गयी है. मामले में जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिये हैं. बाबा नीम करौली की जिंदगी आज भी उनके भक्तों के लिए आस्था, अध्यात्म और रहस्य से जुड़ी हुई है. यही वजह है कि उनके जीवन पर बनी फिल्म के बाद एक बार फिर उनके जीवन और विरासत को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गयी है.
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