जिस राम वनगमन पथ का था इंतजार, लोकार्पण से पहले वहीं धंसी सड़क! 4400 करोड़ पर उठे सवाल

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लोकार्पण से पहले राम वनगमन पथ में दरारें, 100 मीटर सड़क धंसने से मचा हड़कंप

UP News: प्रयागराज में राम वनगमन पथ परियोजना की सड़क लोकार्पण से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गई है. 100 मीटर हिस्से में दरारें और धंसाव देखा गया है, जिससे 4400 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं. प्रशासन ने मरम्मत का काम शुरू करा दिया है.

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UP News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में सोमवार, 7 सितंबर को राम वनगमन पथ परियोजना के तहत बन रही सड़क के क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है. नवाबगंज के श्रृंगवेरपुर धाम में गंगा पुल के पास करीब 100 मीटर के हिस्से में सड़क पर कई जगह दरारें और धंसाव दिखाई दिए हैं. सड़क किनारे का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ है. मामला सामने आने के बाद प्रभावित हिस्से में बड़े वाहनों की आवाजाही रोक दी गई और मरम्मत का काम शुरू कराया गया. करीब 4,400 करोड़ रुपये की इस परियोजना को लेकर अब निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं.

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100 मीटर हिस्से में दिखीं दरारें

श्रृंगवेरपुर धाम में गंगा पुल की ओर जाने वाली सड़क के करीब 100 मीटर हिस्से में कई जगह नुकसान सामने आया है. रिपोर्टों के मुताबिक, चार स्थानों पर सड़क में दरार और धंसाव देखा गया. कुछ जगह सड़क का हिस्सा नीचे बैठा नजर आया. सड़क के किनारे बना बॉर्डर भी क्षतिग्रस्त मिला. सड़क और पुल की स्थिति से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया. इसके बाद प्रभावित हिस्से पर बड़े वाहनों की आवाजाही रोक दी गई. मौके पर मरम्मत का काम भी शुरू करा दिया गया है.

बारिश के बाद सामने आई समस्या

सड़क के क्षतिग्रस्त होने की वजह को लेकर निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने बारिश का हवाला दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, लगातार बारिश के कारण सड़क का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ और कुछ स्लैब दब गए. हालांकि, सड़क धंसने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी. इसमें सड़क के नीचे की मिट्टी, जल निकासी और निर्माण की अलग-अलग परतों की स्थिति अहम हो सकती है.

अभी निर्माणाधीन है राम वनगमन पथ

इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि राम वनगमन पथ का संबंधित हिस्सा अभी निर्माणाधीन है. इसका औपचारिक लोकार्पण नहीं हुआ है. जिलाधिकारी से हुई बातचीत के हवाले से सामने आया है कि संबंधित पुल को भी अभी औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं किया गया है. यही वजह है कि क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत निर्माण पूरा होने से पहले ही कराई जा रही है. इसलिए फिलहाल इसे निर्माण पूरा होने के बाद खराब हुई सड़क कहना सही नहीं होगा. मामला निर्माण के दौरान सामने आए धंसाव और दरार का है.

4400 करोड़ की है पूरी परियोजना

राम वनगमन पथ परियोजना के तहत अयोध्या से चित्रकूट तक करीब 210 किलोमीटर लंबा मार्ग विकसित किया जा रहा है. परियोजना की लागत करीब 4,400 करोड़ रुपये बताई गई है. इसका उद्देश्य भगवान राम के वनवास से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ना है. श्रृंगवेरपुर धाम भी इस मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है. परियोजना पूरी होने के बाद इन धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच आसान होने की उम्मीद है.

सड़क की मजबूती पर उठे सवाल

निर्माणाधीन सड़क में दरार और धंसाव सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच इसकी मजबूती को लेकर सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है कि बारिश के कारण नुकसान हुआ है तो भी यह देखना जरूरी है कि सड़क की डिजाइन, जल निकासी और निर्माण प्रक्रिया ने भारी बारिश का सामना कैसे किया. हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सड़क की खराबी की वजह निर्माण गुणवत्ता में कमी ही है. इसकी वास्तविक वजह तकनीकी जांच से ही सामने आएगी.

केशव मौर्य ने क्या कहा?

राम वनगमन पथ की सड़क क्षतिग्रस्त होने को लेकर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से भी सवाल किया गया. उन्होंने कहा कि अभी बारिश का मौसम है. अगर सड़क धंसी है तो उसे बनाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि अगर जांच में कहीं गुणवत्ता की कमी सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी. ऐसे में अब मरम्मत के साथ सड़क के क्षतिग्रस्त होने की वजह की जांच पर भी नजर रहेगी.

मरम्मत शुरू, अब जांच के नतीजे का इंतजार

फिलहाल प्रभावित हिस्से में मरम्मत का काम कराया जा रहा है और बड़े वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है. प्रशासन और निर्माण एजेंसी के सामने तत्काल चुनौती सड़क को सुरक्षित बनाने की है. लेकिन मामला सिर्फ सड़क को दोबारा ठीक करने तक सीमित नहीं है. करीब 4,400 करोड़ रुपये की परियोजना में निर्माणाधीन सड़क के धंसने की वास्तविक वजह क्या रही, यह तकनीकी जांच से साफ होना जरूरी है. बारिश इसका कारण थी या कोई तकनीकी खामी सामने आई, इसका जवाब जांच के बाद ही मिलेगा. फिलहाल बिना जांच के किसी तरह की लापरवाही या घटिया निर्माण का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा.

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