चिता के ऊपर क्यों ताननी पड़ी चादर? हाथरस की ये तस्वीर देखकर हर कोई पूछ रहा यही सवाल

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बारिश में जलती चिता, ऊपर तनी चादर ने उठाए सवाल

UP News: हाथरस के मांगरू गांव में अंतिम संस्कार के दौरान बारिश ने लोगों को मुश्किल में डाल दिया. चिता को बचाने के लिए चादर ताननी पड़ी, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं.

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UP News: हाथरस के सादाबाद क्षेत्र के मांगरू गांव में शनिवार को अंतिम संस्कार के दौरान बारिश शुरू हो गई. 55 वर्षीय अनिल की बीमारी से मौत के बाद परिजन उन्हें अंतिम विदाई देने श्मशान पहुंचे थे. चिता जल रही थी, तभी बारिश तेज हो गई. श्मशान में टीनशेड नहीं होने के कारण लोगों को चिता के ऊपर चादर ताननी पड़ी. इसी अस्थायी इंतजाम के बीच अंतिम संस्कार पूरा किया गया.

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अंतिम संस्कार के बीच शुरू हुई बारिश

मांगरू गांव निवासी 55 वर्षीय अनिल की बीमारी के चलते मौत हुई थी. शनिवार को परिजन उनका शव लेकर श्मशान स्थल पहुंचे. अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चल रही थी. इसी दौरान बारिश शुरू हो गई. श्मशान में बारिश से बचने के लिए स्थायी टीनशेड नहीं था. ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों के सामने चिता को बारिश से बचाने की चुनौती खड़ी हो गई.

चिता के ऊपर ताननी पड़ी चादर

बारिश से चिता को बचाने के लिए लोगों ने उसके ऊपर चादर तान दी. कुछ लोग चादर को संभालकर खड़े रहे. बारिश के बीच इसी अस्थायी व्यवस्था से अंतिम संस्कार पूरा किया गया. सामने आई तस्वीर में जलती चिता के ऊपर चादर तनी हुई दिखाई दे रही है.

बारिश में हर बार होती है परेशानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में इस श्मशान स्थल पर अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो जाता है. स्थायी टीनशेड नहीं होने से बारिश से बचने के लिए अस्थायी इंतजाम करना पड़ता है. ग्रामीणों ने श्मशान स्थल पर टीनशेड बनवाने की मांग की है.

वायरल तस्वीर के बाद उठे सवाल

अंतिम संस्कार की तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी श्मशान की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे. मांगरू की तस्वीर ने बारिश के दौरान अंतिम संस्कार की मुश्किल को सामने ला दिया है. हालांकि, इसे पूरे हाथरस जिले की व्यवस्था का प्रतिनिधि उदाहरण बताने के बजाय स्थानीय समस्या के तौर पर रखना ज्यादा सटीक होगा.

प्रशासक ने भी मानी टीनशेड नहीं होने की बात

प्रशासक रामकली ने बताया कि वायरल तस्वीर मांगरू से खेरिया जाने वाले मार्ग पर बने श्मशान स्थल की है. उन्होंने बताया कि यहां टीनशेड नहीं है. उनके मुताबिक, इस समस्या को अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया जा चुका है.

हाथरस में अंत्येष्टि स्थलों की व्यवस्था भी चर्चा में

इसी बीच 7 सितंबर की एक रिपोर्ट में प्रशासन के हवाले से बताया गया है कि बजट की कमी के कारण हाथरस की करीब 400 ग्राम पंचायतों में पक्के अंत्येष्टि स्थल अभी नहीं बन सके हैं. यह जिले में अंत्येष्टि स्थलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर बड़ी तस्वीर सामने रखता है.

ग्रामीणों को स्थायी इंतजाम का इंतजार

मांगरू की यह तस्वीर एक परिवार की अंतिम विदाई के दौरान आई परेशानी दिखाती है. ग्रामीण चाहते हैं कि श्मशान स्थल पर स्थायी टीनशेड बनाया जाए. बारिश में चिता को बचाने के लिए चादर तानने की मजबूरी ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी जरूरत के लिए गांव में पर्याप्त सुविधा कब उपलब्ध होगी.

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