पेड़ कटते ही लगने लगी रहस्यमयी आग, निकलने लगे विशाल सांप, हथियागढ़ की अनसुनी लोककथा चौंका देगी

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पीपल का पेड़

पीपल का पेड़

UP News: महाराजगंज जिले के हथियागढ़ गांव की बरम बाबा के स्थान से जुड़ी एक रहस्यमयी लोककथा आज भी जिंदा है. एक पीपल के पेड़ को काटने की कोशिश के बाद पूरे गांव में आग और डरावने सांपों का आतंक फैल गया था. जानिए कैसे बरम बाबा की पूजा से सामान्य हुए हालात.

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UP News: कहते हैं कि कुछ जगहों की पहचान सिर्फ वहां मौजूद मंदिर या पेड़ से नहीं होती, बल्कि उनसे जुड़ी कहानियां पीढ़ियों तक लोगों की जुबान पर जिंदा रहती हैं. महराजगंज जिले के सिसवा क्षेत्र का हथियागढ़ गांव भी ऐसी ही एक रहस्यमयी कहानी को अपने भीतर समेटे हुए है. यहां बरम बाबा के स्थान से जुड़ी एक लोकमान्यता आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि एक समय ऐसा आया था जब पीपल का एक पेड़ काटे जाने के बाद पूरे इलाके में ऐसी घटनाएं होने लगीं कि लोगों की रातों की नींद उड़ गई. कहीं आग लग रही थी तो कहीं बड़े-बड़े सांप दिखाई देने लगे. आज भले ही हालात सामान्य हैं, लेकिन उस दौर की कहानी आज भी गांव वाले श्रद्धा और रहस्य के साथ सुनाते हैं.

गांव के बाहर है बरम बाबा का स्थान

महराजगंज जिले के सिसवा क्षेत्र के हथियागढ़ गांव के उत्तर दिशा में बरम बाबा का एक प्रसिद्ध स्थान है. यह स्थान एक पीपल के पेड़ के नीचे बना हुआ है और आसपास के लोगों की गहरी आस्था इससे जुड़ी हुई है. गांव के लोग बताते हैं कि यहां दूर-दूर से श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं. हालांकि इस जगह की पहचान सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी एक पुरानी रहस्यमयी घटना भी लोगों के बीच आज तक चर्चा में रहती है.

जब पीपल का पेड़ काटने की हुई कोशिश

गांव की एक बुजुर्ग महिला के मुताबिक कई साल पहले यहां सिर्फ एक खुला मैदान था. बाद में यहां एक विशाल पीपल का पेड़ उग आया. बताया जाता है कि किसी व्यक्ति ने उस पेड़ को खरीद लिया और उसे काटने का फैसला किया. महिला का कहना है कि उस व्यक्ति ने कुल्हाड़ी से पांच बार वार किया और फिर वहां से चला गया. लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद गांव में तरह-तरह की अनहोनी होने लगी और लोगों के बीच डर का माहौल बन गया.

गांव में लगने लगी रहस्यमयी आग

स्थानीय लोगों का कहना है कि उस घटना के कुछ समय बाद गांव के अलग-अलग हिस्सों में अचानक आग लगने की घटनाएं शुरू हो गईं. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. एक जगह आग बुझती तो दूसरी जगह से आग लगने की खबर आ जाती. लगातार हो रही इन घटनाओं ने पूरे गांव को चिंता और भय में डाल दिया. लोग इसे किसी अनजानी शक्ति से जोड़कर देखने लगे.

फिर बुलाए गए बाबा और शुरू हुई पूजा

जब गांव वाले लगातार हो रही घटनाओं से परेशान हो गए तो उन्होंने एक बाबा को बुलाया. महिला बताती हैं कि बाबा ने लोगों से कहा कि इस स्थान पर विशेष पूजा-अर्चना करनी होगी. उन्होंने यह भी कहा कि एक पैर पर खड़े होकर प्रार्थना करने से संकट दूर होगा. इसके बाद गांव के लोगों ने मिलकर पूजा शुरू की. हर सुबह लोग अलग-अलग घरों से दूध लाकर बरम बाबा के स्थान पर चढ़ाने लगे. वहीं शाम के समय जल में फूल डालकर जलाभिषेक किया जाने लगा. यह पूजा करीब डेढ़ महीने तक लगातार चलती रही.

डरावने सांपों ने बढ़ा दी थी दहशत

महिला के अनुसार उस समय सिर्फ आग लगने की घटनाएं ही नहीं हो रही थीं...बल्कि गांव और आसपास के इलाकों में बड़े और डरावने सांप भी बड़ी संख्या में दिखाई देने लगे थे. सांपों के लगातार निकलने से लोग इतने घबरा गए कि कई परिवारों ने अपने घर छोड़ दिए. कुछ लोग गांव से बाहर तो कुछ लोग खेतों में जाकर रहने लगे. हर किसी के मन में डर बैठ गया था और लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब कब खत्म होगा.

डेढ़ महीने बाद बदले हालात

गांव वालों का कहना है कि लगातार पूजा-पाठ और प्रार्थना के बाद धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे. आग लगने की घटनाएं बंद हो गईं और सांपों का निकलना भी कम हो गया. इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली और गांव में फिर से सामान्य जीवन शुरू हो गया. तभी से बरम बाबा के इस स्थान को लोग विशेष श्रद्धा की नजर से देखने लगे.

आज भी दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब पहले जैसी कोई घटना नहीं होती. गांव में शांति का माहौल है और बरम बाबा के स्थान पर रोज श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के लोग भी यहां पूजा करने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. गांव वालों के लिए यह स्थान सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं... बल्कि उनकी पुरानी यादों और लोकमान्यताओं का भी अहम हिस्सा है.

लोकमान्यता आज भी जिंदा है

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कोई आधिकारिक या वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है. यह कहानी स्थानीय लोगों की मान्यताओं और पीढ़ियों से चली आ रही मौखिक परंपराओं पर आधारित है. इसके बावजूद हथियागढ़ गांव में बरम बाबा के स्थान से जुड़ी यह रहस्यमयी कथा आज भी लोगों के बीच उतनी ही चर्चा में रहती है और हर आने वाले श्रद्धालु की जिज्ञासा बढ़ा देती है.

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