लखीमपुर खीरी में सरकारी अस्पताल का जलभराव बना मौत का तालाब, बारिश के पानी में डूबकर युवक की मौत
लखीमपुर खीरी के सरकारी अस्पताल डूबकर युवक की मौत
लखीमपुर खीरी के खमरिया सीएचसी में महीनों से जमा बारिश का पानी एक युवक की मौत का कारण बन गया। अस्पताल परिसर तालाब बनने के बाद भी प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
UP News: लखीमपुर खीरी स्थित खमरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का परिसर महीनों से जमा बारिश के पानी की वजह से किसी तालाब में तब्दील है. इसी जलभराव ने मंगलवार को एक परिवार से उसका अपना छीन लिया. सीएचसी परिसर में भरे गहरे पानी में डूबने से 35 वर्षीय पंकज मिश्रा की मौत हो गई. सरकारी अस्पताल के परिसर में इस तरह लंबे समय तक जलभराव बना रहना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. सवाल यह भी है कि जब अस्पताल आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा खतरा परिसर में साफ दिखाई दे रहा था, तो इसे दूर करने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए.
अस्पताल परिसर में मिला शव, मचा हड़कंप
पंकज मिश्रा पुत्र रमेश मिश्रा खमरिया पंडित गांव के रहने वाले थे. बताया जा रहा है कि मंगलवार को वह किसी काम से खमरिया सीएचसी परिसर में गए थे. इसी दौरान परिसर में भरे पानी में डूब गए. कुछ समय बाद ग्रामीणों ने सीएचसी की पुरानी बिल्डिंग के पास गहरे पानी में उनका शव पड़ा देखा. शव मिलने की खबर फैलते ही मौके पर हड़कंप मच गया.
अपनों के सामने थम गईं सांसें
घटना की जानकारी मिलते ही पंकज के परिजन मौके पर पहुंचे. सामने शव देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई. जिस अस्पताल परिसर से लोगों को इलाज और सुरक्षा की उम्मीद होती है, वहीं जमा पानी एक परिवार के लिए मातम की वजह बन गया. घटना ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है.
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
सूचना मिलने पर खमरिया पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है. धौरहरा के सीओ शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि सीएचसी परिसर में जलभराव के बीच युवक का शव मिला है. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
महीनों से जमा पानी, फिर भी नहीं जागा सिस्टम
सबसे बड़ा सवाल अस्पताल परिसर में लंबे समय से जमा पानी को लेकर है. बारिश का पानी महीनों तक जमा रहना और उसके बीच गहराई वाले हिस्से का बने रहना व्यवस्था की गंभीर खामी को सामने लाता है. अस्पताल परिसर में मरीज, तीमारदार और स्थानीय लोग आते-जाते हैं. ऐसे में जलभराव को नजरअंदाज करना उनकी सुरक्षा के साथ बड़ा जोखिम पैदा करता है. पंकज की मौत के बाद अब यह सवाल और गंभीर हो गया है कि अगर समय रहते पानी की निकासी और सुरक्षा के इंतजाम किए जाते तो क्या इस हादसे को टाला जा सकता था.
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