UP Crime: पशु क्रूरता के मामले में फेफना पुलिस पर लीपापोती का आरोप: सीओ की भूमिका पर भी सवाल, VIDEO वायरल, फिर भी एएसपी को जानकारी नहीं

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पशु क्रूरता के मामले में फेफना पुलिस पर लीपापोती का आरोप

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UP News: सिंहपुर से पशु क्रूरता का एक वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जिससे उच्चाधिकारियों तक भी जानकारी नहीं पहुंचने का दावा किया जा रहा है.

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UP Crime: फेफना थाना क्षेत्र के सिंहपुर से पशु क्रूरता से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं. वायरल वीडियो को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि मामले में कार्रवाई करने के बजाय पुलिस स्तर से पूरे प्रकरण को दबाने या लीपापोती करने का प्रयास किया गया. मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आने के बावजूद संबंधित अपर पुलिस अधीक्षक तक इसकी जानकारी नहीं पहुंचने का दावा भी सामने आया है. बताया जा रहा है कि सिंहपुर क्षेत्र में पशु क्रूरता से संबंधित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे. आरोप है कि मामला गंभीर होने के बावजूद फेफना पुलिस ने जिस तरह से इसे हैंडल किया, उससे निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर संदेह पैदा हुआ है.

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वायरल वीडियो ने बढ़ाए सवाल

सिंहपुर से सामने आए वीडियो में पशु के साथ कथित क्रूरता का मामला दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से कार्रवाई की मांग उठी. इसी बीच पुलिस की ओर से मामले में क्या कार्रवाई की गई, इसे लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वीडियो पुलिस के संज्ञान में आया था तो पशु क्रूरता से संबंधित धाराओं में तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई? वहीं, यदि पुलिस को वीडियो या घटना की जानकारी नहीं थी, तो सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद भी इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची?

सीओ की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

पूरे मामले में क्षेत्राधिकारी स्तर की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. आरोप लगाया जा रहा है कि स्थानीय पुलिस की कार्रवाई और मामले की गंभीरता को लेकर उच्च स्तर पर सही जानकारी नहीं पहुंचाई गई. हालांकि, सीओ की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. ऐसे में यह भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस विभाग इस मामले में स्पष्ट करे कि घटना की जानकारी उसे कब मिली, वायरल वीडियो की जांच किस स्तर पर हुई और संबंधित पुलिस टीम ने अब तक क्या कार्रवाई की.

एएसपी को जानकारी नहीं होने से उठे सवाल

मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि वीडियो वायरल होने और स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा के बावजूद अपर पुलिस अधीक्षक को मामले की जानकारी नहीं होने की बात सामने आई है. यदि यह बात सही है तो इससे पुलिस की आंतरिक सूचना व्यवस्था और थाना स्तर से अधिकारियों तक महत्वपूर्ण मामलों की रिपोर्टिंग पर सवाल खड़े होते हैं. पशु क्रूरता से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका केवल मुकदमा दर्ज करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि घटना की सत्यता, वीडियो की प्रामाणिकता, आरोपियों की पहचान और कानून के तहत उचित कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होती है.

एफआईआर जरूरी है, तभी होगी निष्पक्ष जांच : अधिवक्ता मनोज राय हंस

सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मनोज राय हंस ने सिंहपुर में भैंसे के साथ कथित क्रूरता के वायरल वीडियो के मामले में एफआईआर दर्ज करने की आवश्यकता बतायी है. उन्होंने कहा कि किसी पशु की पूंछ, गला या शरीर का कोई अंग धारदार हथियार से काटना गंभीर मामला है और पुलिस को शिकायत मिलने पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए. अधिवक्ता के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने के बाद ही पुलिस घटना में प्रयुक्त धारदार हथियार की बरामदगी, पशु के चिकित्सकीय परीक्षण और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है. उन्होंने कहा कि यदि वीडियो दो दिनों से वायरल है और मामला पुलिस के संज्ञान में पहुंच चुका है, तो इसकी जांच होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस ने अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है तो इसके पीछे क्या कारण है. हालांकि, किसी व्यक्ति को बचाने या पुलिस की मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है.

अब निष्पक्ष जांच की मांग

वायरल वीडियो के बाद स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि पूरे प्रकरण की थाना स्तर से अलग निष्पक्ष जांच कराई जाए. जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि घटना वास्तव में कब और कहां हुई, वीडियो कब बनाया गया, पुलिस को इसकी सूचना कब मिली और सूचना मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई. इसके साथ ही यह भी सामने आना चाहिए कि मामले में किसी स्तर पर कार्रवाई को प्रभावित करने या तथ्यों को दबाने का प्रयास तो नहीं हुआ.

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