पति पर नपुंसकता का आरोप लगा भरण पोषण का दावा करने वाली पत्नी का आवेदन खारिज

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

पति पर नपुंसकता और घरेलू हिंसा का आरोप लगाकर पत्नी ने भरण-पोषण का दावा किया था. सरायकेला फैमिली कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पति को स्वस्थ पाते हुए पत्नी का दावा खारिज कर दिया.

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सरायकेला : पत्नी द्वारा पति पर नपुंसक होने और घरेलू हिंसा के साथ प्रताड़ित करने के दायर वाद पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पत्नी के भरण पोषण दावा को खरिज कर दिया. मेडिकल जांच में पति पूर्ण रूप से शाररिक रूप से स्वास्थ्य पाया गया. निर्णय फैमिली कोर्ट, सरायकेला के न्यायाधीश वीरेश कुमार की अदालत में सुनाया गया है. इस मामले में पत्नी ने पति पर नपुंसक होने के साथ-साथ घरेलू हिंसा और प्रताड़ना का आरोप लगाया था. न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया.मामला नीमडीह थाना क्षेत्र का है.

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क्या है मामला

मामले के अनुसार, पति-पत्नी का विवाह 28 अप्रैल 2022 को सरायकेला में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था. पत्नी का आरोप था कि पति नपुंसक है. उसके साथ घरेलू हिंसा व प्रताड़ना करता है. इसी आधार पर 22 अक्टूबर 2022 को पत्नी ने पति का घर छोड़ दिया और अपने मायके में रहने लगी. इसके बाद उसने पति से भरण-पोषण की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट में वाद दायर किया. सुनवाई के दौरान पत्नी की ओर से तीन गवाहों ने न्यायालय में गवाही दी, जबकि पति की ओर से दो गवाह प्रस्तुत किए गए. पति ने अपनी शारीरिक जांच चिकित्सक से करायी थी.

चिकित्सकीय रिपोर्ट में पति को बताया स्वस्थ

न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत चिकित्सकीय रिपोर्ट में पति को शारीरिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ बताया गया. पति ने पत्नी को वापस लाने के लिए वैवाहिक संबंधों की पुनर्स्थापना के उद्देश्य से कुटुंब न्यायालय, सरायकेला में अलग वाद भी दायर किया था. इसमें उसे पत्नी के विरुद्ध डिक्री प्राप्त हुई थी. इस मामले में भी पति ने चिकित्सकीय रिपोर्ट को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया था. पति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात कुमार महतो ने पैरवी की. न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट और प्रस्तुत कानूनी तर्कों पर विचार करने के बाद पत्नी के भरण-पोषण के आवेदन को खारिज कर दिया. बहस अधिवक्ता अमित कुमार सिंह ने की थी. अधिवक्ता अमित कुमार सिंह ने लिखित बहस के साथ न्यायालय में उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला दिया था. जिन्हें ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने पति के पक्ष में पत्नी के भरण पोषण के वाद को रद्द कर दिया.


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