बिरसा कॉलेज में स्नातक की सीटें घटाने के विरोध में विद्यार्थियों का प्रदर्शन
बिरसा कॉलेज खूंटी में स्नातक सीटों की संख्या घटाने के विरोध में एबीवीपी ने किया जोरदार प्रदर्शन, छात्रों ने सीटें बढ़ाने की मांग की.
रांची: रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत बिरसा कॉलेज, खूंटी में स्नातक स्तर पर नामांकन की सीटों की संख्या घटाने के विरोध में शनिवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया. विद्यार्थियों ने सीटें बढ़ाने की मांग करते हुए कॉलेज प्रबंधन और विश्वविद्यालय से इस दिशा में पहल करने की अपील की.
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सीटें घटने से ग्रामीण विद्यार्थियों की बढ़ी परेशानी
विद्यार्थियों का कहना है कि बिरसा कॉलेज खूंटी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अनेक विद्यार्थी बाहर जाकर पढ़ाई करने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे में स्नातक स्तर पर सीटों में कमी होने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के सामने उच्च शिक्षा से वंचित होने का खतरा पैदा हो गया है.
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सीट बढ़ाने की मांग को लेकर लगाये नारे
प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने "सीट बढ़ाओ, विद्यार्थियों का भविष्य बचाओ", "हर बच्चे को पढ़ने दो, बिरसा कॉलेज बढ़ने दो" सहित कई नारे लगाये. विद्यार्थियों ने कहा कि सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिक से अधिक स्थानीय और ग्रामीण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का अवसर दिया जाना चाहिए.
गरीब और ग्रामीण विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल
प्रदेश मंत्री प्रकाश टुटी ने कहा कि बिरसा कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि खूंटी के गरीब, ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के हजारों बच्चों के सपनों का केंद्र है. यदि सीटों की कमी के कारण कोई बच्चा उच्च शिक्षा से वंचित होता है, तो यह केवल उस विद्यार्थी की समस्या नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य से जुड़ा सवाल है.
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क्षेत्रीय प्रमुख रवि अग्रवाल ने कहा कि कई विद्यार्थियों का नामांकन केवल सीट उपलब्ध नहीं होने के कारण नहीं हो पा रहा है. इनमें अधिकांश सामान्य परिवार और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थी हैं. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का अवसर मिलना जरूरी है.
रीना ने कहा कि जिन विद्यार्थियों का नामांकन हो चुका है, उनकी भी जिम्मेदारी है कि वे उन साथियों के लिए आवाज उठायें, जिन्हें अभी तक अवसर नहीं मिला है. सुखराम हेंब्रम सहित सुशांति तो ने भी अपने विचार रखे.
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