PhD के पुराने अभ्यर्थियों को RU ने दी राहत, दोबारा फॉर्म भरना होगा लेकिन कोर्स वर्क नहीं
रांची विश्वविद्यालय
रांची विश्वविद्यालय ने पीएचडी रेगुलेशन 2026 के तहत छात्रों को कोर्स वर्क और नेट-जेआरएफ वैधता में विशेष छूट दी है। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
रांची: रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. अंग्रेजी समेत अन्य विभागों में पूर्व से पीएचडी में नामांकित अभ्यर्थियों को अब पीएचडी रेगुलेशन-2026 के तहत दोबारा नामांकन के लिए फॉर्म भरना होगा. हालांकि, जिन अभ्यर्थियों ने पहले ही कोर्स वर्क पूरा कर लिया है, उन्हें दोबारा कोर्स वर्क नहीं करना होगा.
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कुलपति प्रो सरोज शर्मा के आदेश पर रजिस्ट्रार डॉ राजकुमार शर्मा ने इस संबंध में निर्देश जारी किया है. विश्वविद्यालय के इस निर्णय से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी, जिन्होंने पुराने नियमों के तहत पीएचडी में नामांकन लिया था और कोर्स वर्क भी पूरा कर लिया था.
NET/JRF अभ्यर्थियों को मिलेगी विशेष छूट
विश्वविद्यालय ने NET और JRF अभ्यर्थियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी विशेष प्रावधान किया है. जिन अभ्यर्थियों के रजिस्ट्रेशन की वैधता 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच समाप्त हो रही है, उन्हें विशेष छूट दी जायेगी. इससे संबंधित अभ्यर्थी नियमानुसार अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे.
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रजिस्ट्रेशन से छूटे अभ्यर्थियों के मामले का होगा निबटारा
पीएचडी रेगुलेशन-2026 लागू होने से पहले रांची विश्वविद्यालय के अंग्रेजी समेत अन्य विभागों में कई अभ्यर्थियों ने पीएचडी में नामांकन लिया था और कोर्स वर्क भी पूरा कर लिया था, लेकिन किसी कारणवश उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका. ऐसे मामलों के निबटारे के लिए कुलपति ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है.
कमेटी के अध्यक्ष सोशल साइंस डीन सह रिसर्च डायरेक्टर डॉ परवेज हसन बनाये गये हैं, जबकि रजिस्ट्रार डॉ राजकुमार शर्मा को सदस्य सचिव बनाया गया है. कमेटी में लॉ डीन डॉ पंकज चतुर्वेदी, प्रॉक्टर डॉ धीरेंद्र त्रिपाठी और पीजी रसायनशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ स्मृति सिंह को सदस्य बनाया गया है.
पश्चिम बंगाल से आये अभ्यर्थियों के मामलों की भी होगी जांच
पांच सदस्यीय कमेटी विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पश्चिम बंगाल से आये अभ्यर्थियों के पीएचडी रजिस्ट्रेशन से जुड़े मामलों की भी जानकारी हासिल करेगी. कमेटी संबंधित मामलों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को रिपोर्ट देगी.
विश्वविद्यालय के इस फैसले से पुराने पीएचडी अभ्यर्थियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े लंबित मामलों के समाधान का रास्ता साफ होने की उम्मीद है.
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