अब नीड बेस्ड शिक्षक भी बनेंगे PhD के को-गाइड, RU के फैसले का JAPCA ने किया स्वागत
रांची विश्वविद्यालय
रांची विश्वविद्यालय ने नीड बेस्ड शिक्षकों को शोध निर्देशन में को-गाइड बनाने का निर्णय लिया है, जिसका शिक्षक संघ ने स्वागत किया है। इससे शोधार्थियों को लाभ होगा।
रांची: रांची विश्वविद्यालय में नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों को शोध-निर्देशन की अकादमिक प्रक्रिया से को-गाइड (सह-निर्देशक) के रूप में जोड़ने के निर्णय का झारखंड असिस्टेंट प्रोफेसर कॉन्ट्रेक्चुअल एसोसिएशन (JAPCA) ने स्वागत किया है. एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ एसके झा ने कुलपति प्रो सरोज शर्मा और विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति आभार जताया है.
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डॉ झा ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह निर्णय वर्षों से शैक्षणिक व्यवस्था में योगदान दे रहे योग्य नीड बेस्ड शिक्षकों की अकादमिक क्षमता को उचित मंच प्रदान करेगा. साथ ही इसका सीधा लाभ शोधार्थियों को भी मिलेगा. शोधार्थियों को अब अधिक संख्या में योग्य और विषय-विशेषज्ञ मार्गदर्शक उपलब्ध हो सकेंगे.
शोधार्थियों की परेशानी होगी कम
एसोसिएशन ने कहा कि शोध-निर्देशकों की कमी के कारण कई विद्यार्थियों को पीएचडी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. ऐसे में नीड बेस्ड शिक्षकों को को-गाइड की अकादमिक प्रक्रिया से जोड़ने का निर्णय शोधार्थियों के लिए उपयोगी साबित होगा.
JAPCA के सचिव डॉ ब्रह्मानंद साहू, कोषाध्यक्ष डॉ सुमंत कुमार और प्रवक्ता डॉ हरेंद्र पंडित ने भी विश्वविद्यालय के निर्णय का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि रांची विश्वविद्यालय ने यह साबित किया है कि इच्छाशक्ति और सकारात्मक अकादमिक दृष्टिकोण के साथ विश्वविद्यालय में उपलब्ध योग्य शिक्षकों की विशेषज्ञता का उपयोग शोधार्थियों के हित में किया जा सकता है.
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उम्मीद जतायी कि इस निर्णय से विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता और अवसरों को बढ़ावा मिलेगा तथा योग्य शिक्षकों की अकादमिक क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा.
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