झारखंड में साल 2010 में हुआ था पॉलिटेक्निक एडमिशन घोटाला, 12 साल बाद भी निगरानी जांच अधूरी

Updated at : 04 Sep 2022 8:56 AM (IST)
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झारखंड में साल 2010 में हुआ था पॉलिटेक्निक एडमिशन घोटाला, 12 साल बाद भी निगरानी जांच अधूरी

पॉलिटेक्निक के पार्ट टाइम डिप्लोमा कोर्स में हुए नामांकन घोटाले की जांच 12 साल बाद भी अधूरी है. निगरानी ने नामांकन घोटाले में वर्ष 2010 में प्राथमिकी दर्ज की थी. इसमें राजकीय पॉलिटेक्निक रांची के कई पूर्व प्राचार्यों सहित 20 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है.

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शकील अख्तर

Jharkhand News: पॉलिटेक्निक के पार्ट टाइम डिप्लोमा कोर्स में हुए नामांकन घोटाले की जांच 12 साल बाद भी अधूरी है. निगरानी ने नामांकन घोटाले में वर्ष 2010 में प्राथमिकी दर्ज की थी. इसमें राजकीय पॉलिटेक्निक रांची के कई पूर्व प्राचार्यों सहित 20 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है. नामांकन का मामला शैक्षणिक सत्र 1994-98,1996-2000, 2001-04 और 2002-05 से संबंधित है. नामांकन घोटाले के ओम प्रकाश कुमार नामक आरोपी ने हाल में 26.82 लाख रुपये के गबन को अंजाम दिया है.

राज्य गठन के बाद मिली थी गड़बड़ी की शिकायत

राज्य गठन के बाद निगरानी को रांची स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक के नामांकन में गड़बड़ी से संबंधित शिकायत मिली थी. निगरानी ने प्रारंभिक जांच की. इसमें नामांकन के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने और निर्धारित सीट से ज्यादा लोगों के नामांकन का मामला पकड़ में आया. जांच में पाया गया कि एआइसीटीइ द्वारा निर्धारित शर्तों और नियमों का उल्लंघन किया गया. एआइसीटीइ ने पार्ट टाइम डिप्लोमा के विभिन्न कोर्स में कुल 135 सीटें निर्धारित की थीं. नियमानुसार, मैकेनिकल में 60,सिविल और इलेक्ट्रिकल में 30-30 और टेली कम्युनिकेशन में 15 सीटें निर्धारित थी. जांच में पाया गया कि निर्धारित सीटों से 10 प्रतिशत अधिक का नामांकन किया गया. इसमें कोर्स के लिए निर्धारित सीटों की संख्या का उल्लंघन किया गया.

फेल छात्रों का भी कराया था नामांकन

जांच में मैट्रिक की परीक्षा में गणित और विज्ञान में फेल छात्रों का भी पार्ट टाइम डिप्लोमा कोर्स मे नामांकन करने का मामला पकड़ में आया. साथ ही जानकारी मिली कि राज्य गठन से पहले शैक्षणिक सत्र 1994-98 और 1996-2000 में भी नामांकन के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गयी. साथ ही राज्य गठन के बाद एकीकृत बिहार के समय हुए नामांकन से संबंधित छात्रों की परीक्षा ली गयी और रिजल्ट प्रकाशित किया गया. हालांकि ऐसा करनेवाले उस वक्त परीक्षा पर्षद के किसी पद पर पदस्थापित नहीं थे. मामले की प्रारंभिक जांच के समय भी निगरानी के बहुत सारे दस्तावेज नहीं मिले थे. अब गड़बड़ी से संबंधित अहम दस्तावेज के गायब बताये जा रहे हैं.

नामांकन के लिए निर्धारित शर्तें

  • आवेदक को सरकारी या गैर सरकारी उपक्रम में कार्यरत होना चाहिए

  • आवेदक को विज्ञान व गणित के साथ कम से कम मैट्रिक पास होना चाहिए

  • विज्ञान व गणित में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना चाहिए

  • आइटीआइ कर चुके आवेदकों को एक साल का कार्य अनुभव चाहिए

  • आवेदक को पॉलिटेक्निक से 50 किमी के दायरे में कार्यरत होना चाहिए

घोटाले के नामजद अभियुक्तों का ब्योरा

  • कमरेंद्र कुमार,तत्कालीन प्राचार्य

  • आरएन सहाय,तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक

  • एसडी राम, पूर्व प्राचार्य

  • मदन मोहन लकड़ा, पूर्व प्राचार्य

  • आरएन चौधरी,वरीय प्राध्यापक

  • एमएल पोद्दार, चेंबर के प्रतिनिधि

  • शिव विलास साहू, इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष

  • केसी यादव,तत्कालीन जेनरल मैनेजर एचइसी

  • डीएन दास, इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य

  • डीआइसी प्रतिनिधि, इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य

  • एसएन झा,इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य

  • एमपी सिंह,इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य

  • अयोध्या कुमार, इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य

  • उमेश कुमार,इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य

  • बीएन दास, इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य

  • बीरेंद्र प्रसाद

  • एसडीपी सिंह,प्रोफेसर

  • सुरेंद्र शर्मा,प्रोफेसर

  • ओम प्रकाश कुमार

  • अरुण कुमार सिंह

Posted By : Rahul Guru

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