झारखंड में कम बारिश पर CM हेमंत सोरेन गंभीर : अब धान छोड़ दलहन-मिलेट पर जोर, खुलेंगे मशरूम सेंटर

Author Sameer Oraon|Edited by Janardan Pandey
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मीटिंग में मौजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और साथ में है कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, Pic Credit- X

झारखंड में कम बारिश को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को विशेष कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया है. अब धान के बजाय कम पानी में उगने वाली दलहन और मिलेट की खेती पर जोर दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी.

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रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट

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रांची: झारखंड में इस साल हो रही कम बारिश को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कड़ा रुख अपनाया है. शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करते हुए सीएम ने अधिकारियों को राज्य के अलग-अलग प्रमंडलों के लिए विशेष कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि पलामू प्रमंडल सहित राज्य के जिन जिलों में प्रतिवर्ष कम बारिश के कारण सुखाड़ की स्थिति बनती है, वहां धान के बजाय कम पानी में उपजने वाली दलहन (दालें) और मिलेट (मोटे अनाज) की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए. मुख्यमंत्री ने जैविक खेती, व्यावसायिक खेती और जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की बात कही.

मॉडल किसान पाठशाला और सौर ऊर्जा से बढ़ेगी किसानों की ताकत

बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलों में एक-एक 'मॉडल किसान पाठशाला' स्थापित करने की योजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने का निर्देश दिया. वर्तमान में राज्य में 57 किसान पाठशालाएं संचालित हैं, जिनके जरिए किसानों को आधुनिक तकनीक और उन्नत खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके साथ ही सीएम ने 'किसान समृद्धि योजना' के तहत सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई पंपों के वितरण में तेजी लाने को कहा ताकि किसानों की सिंचाई लागत कम हो सके. समीक्षा के दौरान सीएम सोरेन ने खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कॉल के जरिए गढ़वा के भवनाथपुर स्थित किसान पाठशाला का जायजा लिया, दुमका के किसान सुरेश मरांडी से बात कर कम पानी वाली फसलें लगाने की सलाह दी. इसके अलावा जामताड़ा के कृषि पदाधिकारी से वहां हो रही काजू की खेती की विस्तृत रिपोर्ट ली.

माइनिंग एरिया के लिए बनेगा स्पेशल बिजनेस मॉडल

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों (माइनिंग एरिया) में जहां कृषि कार्य प्रभावित हुआ है, वहां मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूकर पालन और डेयरी से जोड़कर किसानों के लिए एक मजबूत कॉमर्शियल बिजनेस मॉडल तैयार किया जाए. किसानों को समय पर खाद, उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने लैंप्स (LAMPS) और पैक्स (PACS) को अधिक सक्रिय बनाने और किसानों से सीधे उत्पाद खरीदकर तुरंत उनके बैंक खातों में राशि ट्रांसफर करने का आदेश दिया. बैठक में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, मुख्य सचिव अविनाश कुमार और विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह समेत कई वरीय अधिकारी उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या क्या निर्देश दिये

  1. राज्य के प्रत्येक जिले में अनिवार्य रूप से मशरूम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं.
  2. अलग-अलग प्रमंडलों में हर साल कृषि व्यापार मेला और पशु मेला का आयोजन सुनिश्चित हो.

3. राज्य भर में बंजर एवं परती भूमि को चिन्हित कर वहां कृषि आधारित गतिविधियां शुरू करने की कार्य योजना बने.

  1. गांवों और पंचायतों को कृषि का मॉडल बनाकर नवीनतम तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग किया जाए.


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