मिड-डे मील में बच्चों की थाली में पहुंचेगा झारखंड का मड़ुआ, तीन जिलों में शुरू होगी नई पहल

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झारखंड के सरकारी स्कूलों में अब मिड-डे मील में मड़ुआ का आटा शामिल होगा। इस पहल से बच्चों को पौष्टिक आहार मिलेगा और स्थानीय किसानों को बाजार उपलब्ध होगा।

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रांची. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने शुक्रवार को नेपाल हाउस स्थित सभागार में सहकारिता प्रभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में सरकारी स्कूलों के बच्चों को मध्याह्न भोजन में मड़ुआ का पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया.

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तीन जिलों से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

बैठक में सिद्धकोफेड ने प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए रागी (मड़ुआ) के आटे की आपूर्ति से संबंधित प्रस्ताव की जानकारी दी. फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत रांची, खूंटी और सरायकेला-खरसावां के स्कूली बच्चों को इसका लाभ देने की योजना है. इस संबंध में शिक्षा विभाग के साथ आवश्यक पत्राचार किया गया है.

मंत्री ने कहा कि पहल से स्थानीय किसानों के मड़ुआ को सुनिश्चित बाजार मिलेगा और स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. स्थानीय कृषि उत्पादों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में इस मॉडल को आगे विस्तारित किया जा सकता है.

हर विधानसभा में बनेगा कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर

मंत्री ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में हर विधानसभा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर स्थापित करने की योजना है. इसके लिए डीपीआर तैयार कराने की प्रक्रिया चल रही है. प्राप्त डीपीआर से विभाग संतुष्ट नहीं है. उन्होंने बेहतर लॉजिस्टिक और कोल्ड-चेन सिस्टम विकसित करने वाली अग्रणी कंपनियों को कंसल्टेंसी के लिए आमंत्रित कर तकनीकी सुझाव लेने का निर्देश दिया.

उन्होंने बताया कि राज्य के करीब 20 जिलों में 5,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज बनाये गये हैं, लेकिन कई स्थानों पर ये तकनीकी रूप से पर्याप्त सक्षम नहीं हैं. इससे इनके संचालन में एफपीओ, सहकारी समितियों और थर्ड पार्टी ऑपरेटरों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

लाह उत्पादन के लिए मिलेंगे पौधे

बैठक में लाह उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना की भी जानकारी दी गयी. इसके तहत लाभुकों को 400 सीमियालता, पांच कुसुम, पांच बेर और 20 कैलियेंड्रा/कैलोथायरस के पौधे देने का प्रावधान है. सीमियालता के पौधे करीब एक वर्ष में लाह उत्पादन के योग्य हो जाते हैं.

योजना के तहत करीब 20 डिसमिल भूमि पर एकीकृत खेती को बढ़ावा दिया जायेगा, ताकि किसान लाह उत्पादन के साथ अन्य कृषि गतिविधियां भी कर आय के स्रोत मजबूत कर सकें.

बैठक में विभागीय सचिव अबु बक्कर सिद्दीख, निबंधक शशि रंजन, विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी समेत झास्कोलैम्प्स, झमकोफेड, सिद्धकोफेड, झास्कोफिश और झारखंड मिल्क फेडरेशन के एमडी मौजूद थे.

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