न्यूनतम मजदूरी दर का निर्धारण अव्यवहारिक, फैक्टरी पर बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ : चेंबर

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Birsa Munda

झारखंड चेंबर की कार्यकारिणी समिति की बैठक में सदस्यों ने जतायी नाराजगी.

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रांची.

झारखंड चेंबर की कार्यकारिणी समिति की बैठक शुक्रवार को चेंबर भवन में हुई. सदस्यों ने कहा कि जब मनरेगा में न्यूनतम मजदूरी की दर 280 रुपये है, तो हमें क्यों 450 रुपये का भुगतान करने का दबाव बनाया जा रहा है. चेंबर अध्यक्ष किशोर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हमने अक्तूबर में ही आपत्ति जताते हुए विभाग को सुझाव दिया था कि पूर्व की दर से अधिकतम पांच प्रतिशत वृद्धि ही की जाये. लेकिन, हमारे प्रतिवेदन पर बिना विचार किये नयी दर को अव्यवहारिक रूप से प्रभावी कर दिया गया है. यह हमें मंजूर नहीं है. सदस्यों ने श्रम विभाग के इस निर्णय पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नयी दर के प्रभावी होने से एक फैक्टरी पर सालाना एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो अनुचित है. इधर, सदस्यों ने रांची शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों में वाहनों की गति सीमा 20 किलोमीटर निर्धारित किये जाने को अव्यवहारिक बताया. निर्णय लिया गया कि जल्द ही ट्रैफिक एसपी से मिल कर इसमें संशोधन का आग्रह किया जायेगा. वहीं, जेबीवीएनएल द्वारा इंडस्ट्रियल रेट में वृद्धि किये जाने से होनेवाली परेशानी पर भी सदस्यों ने चिंता जतायी. कहा : यह अतिरिक्त बोझ उद्योगों को प्रोत्साहन देने के योग्य नहीं है. अहारी उप समिति के चेयरमैन आनंद कोठारी ने कहा कि किसान, एफपीओ, एफपीसी द्वारा निर्मित और उत्पादित खाद्य उत्पादों के प्रचार और बिक्री के लिए चेंबर भवन में छह और सात अप्रैल को प्रदर्शनी लगायी जायेगी. मौके पर चेंबर उपाध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, राहुल साबू, परेश गट्टानी, अनिल अग्रवाल, नवजोत अलंग, राम बांगड़, शशांक भारद्वाज, मुकेश पांडे, जेपी शर्मा, महेंद्र जैन, राजीव चौधरी आदि उपस्थित थे.

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